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काली शलवार - सआदत हसन मन्टो
काली शलवार - सआदत हसन मन्टो

दिल्ली आने से पहले वो अंबाला छावनी में थी जहां कई गोरे उसके गाहक थे। उन गोरों से मिलने-जुलने के बाइस वो अंग्रेज़ी के दस पंद्रह जुमले सीख गई ...

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अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन - अमन चांदपुरी
अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन - अमन चांदपुरी

अपनी लाश का बोझ उठाऊँ, नामुमकिन ! मौत से पहले ही मर जाऊँ, नामुमकिन ! दुनिया ने इतने खानों में बाँट दिया फिर ख़ुद को यकजा कर पाऊँ, ना...

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 नाम से गाँधी के चिढ़ बैर आज़ादी से है - ज़फ़र कमाली
नाम से गाँधी के चिढ़ बैर आज़ादी से है - ज़फ़र कमाली

नाम से गाँधी के चिढ़ बैर आज़ादी से है नफ़रतों की खाद हैं उल्फ़त मगर खादी से है आलिमों का इल्म से वो रब्त है इस दौर में रब्त धोबी के ...

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किस कदर नादानियां दिन रात कर जाते हैं लोग - रुखसाना  सिद्दीकी
किस कदर नादानियां दिन रात कर जाते हैं लोग - रुखसाना सिद्दीकी

किस कदर नादानियां दिन रात कर जाते हैं लोग ज़ख्म देते है दवा की बात कर जाते हैं लोग आंखों में बस जाते हैं वो रोज़ काजल की तरह बिन किसी मौस...

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नसीबों पर नहीं चलते, नज़ीरों पर नहीं चलते - कमलेश भट्ट कमल
नसीबों पर नहीं चलते, नज़ीरों पर नहीं चलते - कमलेश भट्ट कमल

नसीबों पर नहीं चलते, नज़ीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े हैं वो, लकीरों पर नहीं चलते। नियम, कानून जितने हैं, गरीबों के लिए ही हैं नि...

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तूफान कभी भी मात नहीं खाते - पाश (अवतार सिंह संधू )
तूफान कभी भी मात नहीं खाते - पाश (अवतार सिंह संधू )

हवा का रुख बदलने से बहुत उछले, बहुत कूदे वे जिनके शामियाने डोल चुके थे उन्होंने ऐलान कर दिया अब वृक्ष शांत हो गए है अब तूफान का दम टूट...

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