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जिस तरह तन झुलसती गर्मी में - गुलज़ार
जिस तरह तन झुलसती गर्मी में - गुलज़ार

यह नज़्म गुलज़ार साहब ने अहमद नसीम कासमी (बाबा) के लिए लिखी है जिस तरह तन झुलसती गर्मी में ठंडे दरिया में डुबकियाँ ले कर दिल को र...

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खड़े है मुझको खरीदार देखने के लिए - राहत इंदौरी
खड़े है मुझको खरीदार देखने के लिए - राहत इंदौरी

खड़े है मुझको खरीदार देखने के लिए मै घर से निकला था बाज़ार देखने के लिए हज़ार बार हजारो की सम्त देखते है तरस गए तुझे एक बार देखने के लि...

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चूहों का अचार - नज़ीर अकबराबादी
चूहों का अचार - नज़ीर अकबराबादी

फिर गर्म हुआ आन के बाज़ार चूहों का। हमने भी किया खोमचा तय्यार चूहों का। सर पांव कुचल कूट के दो चार चूहों का। जल्दी से कचूमर सा किया मार ...

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दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी - बलजीत सिंह बेनाम
दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी - बलजीत सिंह बेनाम

दे सकेगा क्या किसी को वो ख़ुशी खौफ़ में जिसने बिताई ज़िन्दगी सिर्फ़ कहने का तरीका है नया बात कोई भी नहीं है अनकही उम्र भर की शोहरतों का य...

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ध्यान रखेंगे  -डॉ. जियाउर रहमान जाफ़री
ध्यान रखेंगे -डॉ. जियाउर रहमान जाफ़री

क्यों सबको कन्फ्यूज़ करेंगे नहीं प्लास्टिक यूज़ करेंगे पॉलीथिन में जो आता है कब धरती में गल पाता है उपजाऊ जो ज़मीं न होगी खा कर क्या फि...

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दादी भी स्मार्ट हुईं - डॉ. जिया उर रहमान जाफरी
दादी भी स्मार्ट हुईं - डॉ. जिया उर रहमान जाफरी

बदल गया है आज ज़माना बदल गईं हैं दादी भी पहले वाली नहीं है बंदिश मिली उन्हें आजादी भी कंप्यूटर को खोल के ख़ुद से गूगल तक वो जाती हैं ...

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