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मुसलसल बेकली दिल को रही है  - नासिर काज़मी
मुसलसल बेकली दिल को रही है - नासिर काज़मी

मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा मारा-मारा ये बस्ती चैन से क्यों सो रही है चल दिल स...

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बेसबब कोई गिरफ्तार भी हो सकता है - नूर मुनीरी
बेसबब कोई गिरफ्तार भी हो सकता है - नूर मुनीरी

बेसबब कोई गिरफ़्तार भी हो सकता है ये तमाशा सर-ए-बाज़ार भी हो सकता है पूछना ज़ुर्म नहीं, इसलिए पूछा कीजे सामने वाला समझदार भी हो सकता...

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इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे -वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे -वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे टूटा हुआ हूँ पहले से कुछ और तोड़ दे अब देके ज़ख्म मेरे सितमगर खड़ा है क्यों मिर्ची भुरक दे ज़ख्म पे नी...

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लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो - वजीर आगा
लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो - वजीर आगा

लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो मैला बदन पहन के न इतना उदास हो इतना न पास आ कि तुझे ढूंढते फिरें, इतना न दूर जा कि हम:वक्त पास हो ...

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Alif Laila - 4 किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का
Alif Laila - 4 किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का

पिछले भाग भाग - १ शहरयार और शाहजमाँ की कहानी भाग - २ किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का भाग - ३ किस्सा व्यापारी और दैत्य का   किस्सा बूढ़े और ...

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कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल - मुजफ्फर हनफ़ी
कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल - मुजफ्फर हनफ़ी

कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल  । आंख जब सूख रही थी तो कहां थे बादल । तीर बरसे जो नज़र कौसे-कुज़ह पर की है । आग टपकी हे जहां हम न...

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