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हीरा जनम अनमोल था, कौड़ी बदले जाये  | कबीर जयंती पर विशेष लेख - प्रदीप कुमार सिंह
हीरा जनम अनमोल था, कौड़ी बदले जाये | कबीर जयंती पर विशेष लेख - प्रदीप कुमार सिंह

कबीर जयंती पर श्री प्रदीप कुमार सिंह का विशेष लेख आप सभी के लिए | आज समाज, देश और विश्व के देशों में बढ़ती हुई भुखमरी, अशिक्षा, बेरोज...

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दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... - सचिन शाश्वत
दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... - सचिन शाश्वत

दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... मझधार में बनके रहे पतवार पिताजी... साया भी उन्हीं से है, सहारा भी उन्हीं का... बच्चों के लिए दर ...

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एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा
एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा

यगाना चंगेजी ( आस अज़ीमाबादी ) सिर्फ एक नाम नहीं, एक शायर ही नहीं, एक शोला थे, एक तहलका थे | 17 अक्टूबर 1884 को अजीमाबाद (पटना) में जन्मे मश...

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घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान
घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान

पढ़ने में मज़ा तो है आता इन छाओं में, घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में पहली अशुद्धि सच लिखना, है दूसरी इनका ना बिकना, चोर ना छिप ...

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तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे - राजेंद्र नाथ रहबर
तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे - राजेंद्र नाथ रहबर

तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे प्यार में डूबे हुए खत मैं जलाता कैसे तेरे हाथों के लिखे खत मैं जलाता कैसे जिनको दुनिया की निगाहों स...

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कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची - अबु तालिब
कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची - अबु तालिब

कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची हम ग़रीबों ने बेकसी बेची चन्द साँसे ख़रीदने के लिये रोज़ थोड़ी सी ज़िन्दगी बेची जब रुलाने लगे मुझे साये मैंने उकता ...

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