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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा - दुष्यंत कुमार
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा - दुष्यंत कुमार

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ मुझे मालूम है...

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दोस्तो नजरे फसादात नही होने की - मुजफ्फर हनफ़ी
दोस्तो नजरे फसादात नही होने की - मुजफ्फर हनफ़ी

दोस्तो नजरे फसादात नही होने की जान दे कर भी मुझे मात नहीं होने की उन से बिछडे तो लगा ज...

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एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर - अतुल कन्नौजवी
एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर - अतुल कन्नौजवी

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर, जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहीं शक उन्हें भी है तेरी ईमान...

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ऐ शरीफ़ इंसानों -साहिर लुधियानवी
ऐ शरीफ़ इंसानों -साहिर लुधियानवी

जंगी जूनून के खिलाफ जनता के कवि साहिर लुधियानवी की प्रसिद्ध कविता "ऐ शरीफ इंसानों" आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी जनवरी १९६६ मे...

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तुम्हारे रास्तो से दूर रहना - सतलज राहत
तुम्हारे रास्तो से दूर रहना - सतलज राहत

तुम्हारे रास्तो से दूर रहना कहा तक ठीक है मजबूर रहना सभी के बस की बात थोड़ी है नशे में इस कदर भी चुर रहना ना जाने किस कदम में छोड़ेगी ...

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वफ़ा और प्यार के जज़्बात वाले - राज़िक़ अंसारी
वफ़ा और प्यार के जज़्बात वाले - राज़िक़ अंसारी

वफ़ा और प्यार के ज़ज्बात वाले बहुत अच्छे थे हम देहात वाले ज़रुरत हाथ फैलाए खड़ी है कहाँ हैं सब हमारे साथ वाले हमारी एकता को मार देंगे ...

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