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तुम्हारे रास्तो से दूर रहना - सतलज राहत
तुम्हारे रास्तो से दूर रहना - सतलज राहत

तुम्हारे रास्तो से दूर रहना कहा तक ठीक है मजबूर रहना सभी के बस की बात थोड़ी है नशे में इस कदर भी चुर रहना ना जाने किस कदम में छोड़ेगी ...

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वफ़ा और प्यार के जज़्बात वाले - राज़िक़ अंसारी
वफ़ा और प्यार के जज़्बात वाले - राज़िक़ अंसारी

वफ़ा और प्यार के ज़ज्बात वाले बहुत अच्छे थे हम देहात वाले ज़रुरत हाथ फैलाए खड़ी है कहाँ हैं सब हमारे साथ वाले हमारी एकता को मार देंगे ...

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कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी
कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी

कोई तो सूद चुकाए, कोई तो ज़िम्मा ले उस इंकलाब का, जो आज तक उधार सा है कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है जहाँ को अपनी तबाही का इंत...

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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी
ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद वो भी सराहने लगे अर्बाब-ए-फ़न के बाद दाद-ए-सुख़न मि...

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बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी
बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर, मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल, गई तो हाथ न आएगी जान...

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आइए तीर चलाने के लिये - परवेज़ मुजफ्फर
आइए तीर चलाने के लिये - परवेज़ मुजफ्फर

आइए तीर चलाने के लिये हम भी हाज़िर हैं निशाने के लिये चाँद को साथ तेरे करता हूँ नज़रे बद से बचाने के लिये ख़ास हिकमत से बना हे मेरा दिल...

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