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कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी
कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी

कोई तो सूद चुकाए, कोई तो ज़िम्मा ले उस इंकलाब का, जो आज तक उधार सा है कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है जहाँ को अपनी तबाही का इंत...

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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी
ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद वो भी सराहने लगे अर्बाब-ए-फ़न के बाद दाद-ए-सुख़न मि...

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बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी
बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर, मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल, गई तो हाथ न आएगी जान...

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आइए तीर चलाने के लिये - परवेज़ मुजफ्फर
आइए तीर चलाने के लिये - परवेज़ मुजफ्फर

आइए तीर चलाने के लिये हम भी हाज़िर हैं निशाने के लिये चाँद को साथ तेरे करता हूँ नज़रे बद से बचाने के लिये ख़ास हिकमत से बना हे मेरा दिल...

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आ गई उसकी नानी है (बाल कविता) - डा जियाउर रहमान जाफरी
आ गई उसकी नानी है (बाल कविता) - डा जियाउर रहमान जाफरी

रीता को परेशानी है आ गई उसकी नानी है नानी उसे हिदायत देगी नहीं ज़रा सी राहत देगी बोलेंगी वो ये मत खाओ नहीं धूप में बाहर जाओ शाम मे...

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हमें इसकी ज़रूरत भी नहीं है - डॉ  जियाउर रहमान जाफरी
हमें इसकी ज़रूरत भी नहीं है - डॉ जियाउर रहमान जाफरी

हमें इसकी ज़रूरत भी नहीं है तुम्हारे पास फुरसत भी नहीं है मोहब्बत का वो कुछ पैगाम दे दे सियासत को इजाज़त भी नहीं है सभी ने रख लिये बा...

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