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मेरी बिटिया बड़ी सयानी - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मेरी बिटिया बड़ी सयानी मेरी बिटिया बड़ी सयानी, जगती सुबह-सवेरे। और सैर पर जाती हर दिन, साथ घूमने मेरे। योग और व्यायाम नित्य कर, अपना स्वास्थ्य बनाती। चुनती सदा उचित चीज़ें ही, उचित समय पर खाती। सही समय विद्यालय जाती, पढ़ती ध्यान लगाकर। विद्…

चिड़िया रानी - श्यामला कांत वर्मा

चिड़िया रानी चिड़िया रानी! चिड़िया रानी! आओ, बैठो, सुनो कहानी। मेरे आंगन में आ जाओ बिखरे दाने चुन-चुन खाओ फुदक-फुदक तुम नाचो-कूदो प्यास लगे तो पी लो पानी। सखी-सहेली तुम बन जाओ, साथ रहो तुम गीत सुनाओ, मुझको भी उड़ना सीखलाओ, तुम तो हो जानी…

फूलों की घाटी में - शोभनाथ लाल

फूलों की घाटी में चलो चलो उड़ चले आज हम फूलों की उस घाटी में जहाँ फूल ही फूल खिले हों घाटी की उस माटी में देवलोक से परियां आती वहाँ देखने फुलवारी रंग-बिरंगे फूल खिले है महके केसर की क्यारी मंद पवन दुलराए जब-जब झूम उठे कलियाँ सारी थिरक-थ…

नंदू का जुकाम - रामनरेश त्रिपाठी

नंदू का जुकाम बहुत जुकाम हुआ नंदू को, एक रोज वह इतना छींका। इतना छींका, इतना छींका, इतना छींका, इतना छींका। सब पत्ते गिर गए पेड़ के, धोखा हुआ उन्हें आंधी का! - रामनरेश त्रिपाठी Nandu ka jukam bahut jukam hua nandu ko ek roj wah itna chhik…

आगे बढ़ते जायेंगे - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

आगे बढ़ते जायेंगे मिलकर कदम बढ़ायेंगे । आगे बढ़ते जायेंगे ।। हाँ, बाधाएं आयेंगी, माना, बहुत डरायेंगी, किन्तु न हम घबरायेंगे। आगे बढ़ते जायेंगे ।। रुकना अपना काम नहीं, जीत बिना आराम नहीं, सबको यह समझायेंगे । आगे बढ़ते जायेंगे ।। विघ्नों…

मेरी गुड़िया - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मेरी गुड़िया मेरी गुड़िया बड़ी सयानी जगती सुबह- सबेरे । और सैर पर जाती हर दिन साथ घूमने मेरे ।। योग और व्यायाम नित्य कर अपना स्वास्थ्य बनाती । चुनती सदा उचित चीजें ही उचित समय पर खाती ।। सही समय विद्यालय जाती पढ़ती ध्यान लगाकर । विद्यालय …

चिड़िया का गीत - निरंकार देव सेवक

चिड़िया का गीत सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार तब मैं यही समझती थी बस इतना सा ही है संसार। फिर मेरा घर बना घोंसला सूखे तिनकों से तैयार तब मैं यही समझती थी बस इतना सा ही है संसार। फिर मैं निकल गई शाखों पर हरी भरी थी जो सुकुमार तब म…

उठो बटोही - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

उठो बटोही सूरज नभ से झांका, बिखरी जग में किरणों की अरुणाई । छा गये चतुर्दिक सुखद रंग, हर ओर नई सुषमा छाई ।। शीतल बयार बहकी, झूमीं पत्ती- पत्ती, डाली-डाली । मुस्काये फूल सुगंध लुटा, निखरीं कलियाँ भोली भाली ।। भरकर उमंग में पाखी-दल, गा उठा…

मीठी बातों का जादू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मीठी बातों का जादू जब भी बोलो सच ही बोलो बातों में मिश्री सी घोलो । जादू करतीं मीठी बातें, मीठा बोल सभी के हो लो ।। महामंत्र है मीठी भाषा, सबको कर लेती है वश में । नहीं मिठास मिठाई,फल में, जो मिठास बातों के रस में ।। प्यारी मीठी बातें सुन…

धरती कितनी बड़ी किताब - अनवारे इस्लाम

धरती कितनी बड़ी किताब जीवन के आने जाने का, इस दुनिया के बन जाने का, इसमें लिक्खा सभी हिसाब- धरती कितनी बड़ी किताब! खोल-खोल कर बाँचा इसको, देखा-परखा, जाँचा इसको, निकला है अनमोल ख़जाना, मानव का इतिहास पुराना। सब अच्छा, कुछ नहीं खराब, धरती …

दादा दादी - श्रीप्रसाद

दादा दादी एक हमारे दादाजी हैं, एक हमारी दादी। दोनों ही पहना करते हैं, बिल्कुल भूरी खादी। दादी गाना गाया करतीं, दादाजी मुस्काते। कभी-कभी दादाजी भी, कोई गाना गाते। ~ श्रीप्रसाद Dada Dadi ek hamare dadaji hain, ek hamari dadi. donon hi p…

औरों के दुःख हरना - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

/ औरों के दुःख हरना हर दिन तपता, चलता सूरज, देता सुखद उजाला । रात रात भर चांद चमककर हरता है तम काला ।। तप्त आग में जल सोने का, मोहक रूप निखरता । मेघ स्वयं की देह मिटाकर, खुशियों के सर भरता ।। मीठे फल देकर औरों को वृक्ष झूमते रहते । औरों…

कठपुतली - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

कठपुतली ठुमक-ठुमक नाचे कठपुतली सबके मन को मोहे । रंग बिरंगे सुन्दर कपड़े उसके तन पर सोहे ।। हाथ नचाती, पैर नचाती, रह रह कमर घुमाती । नये नये करतब दिखलाकर सबका मन बहलाती ।। उसे थिरककर नचा रहे हैं आशाओं के धागे । सपनों के नव पंख लगाकर बढ़…

दीदी की शादी - गोपीचंद श्रीनागर

दीदी की शादी दीदी दिल्ली जाएगी, छोटू ढोल बजाएगा, दीदी जी को शादी में, डोली में बिठलाएगा! पापा पापड़ परसेंगे, बाबा बरफी लाएँगे, सभी बराती शादी में छक-छक भोग लगाएँगे। मेरे जीजा घोड़ी पर, साफा बाँधे आएँगे, बाजे वाले कुछ आगे मीठी तान लगाएँ…

पत्तियों का चिड़ियाघर - अरविन्द गुप्ता

पत्तियों का चिड़ियाघर पेड़ों के कपड़े है पत्ते पेड़ उन्हीं को पहने रहते पेड़ों के बस्ते में होते खेल खिलौने सस्ते सस्ते पत्तों का भी है संसार पत्तों के है कई प्रकार हर पत्ते का है आकार केले बरगद और अनार पत्तों को छूकर तो देखो उनसे हाथ मि…

नाना-नानी जी के नाम - गोपीचंद श्रीनागर

नाना-नानी जी के नाम उधम करूँ पर रोक न एक तनिक किसी की टोक न एक झिलमिल करती बाग़ में घाम सुबह सुनहरी चहके शाम गर्मी के ये सभी छुट्टियाँ नाना-नानी जी के नाम मामा मुर्ख बनाएँ एक नानी कथा सुनाएँ एक दिनभर गपशप और आराम मम्मी जी का बस यह काम गर्…

जुगनू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जुगनू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला जुगनू कहो, तुम्हारे मन में कैसे सपने घिरते । मद्धिम-मद्धिम दीप्ति दिखाकर किसे ढूंढते फिरते ।। मन में क्या संकल्प लिए हो निकले सघन निशा में । क्या तम का अस्तित्व मिटाने फिरते दिशा दिशा में ।। अंधकार की व्यापक स…

कोयल - सुभद्राकुमारी चौहान

कोयल - सुभद्राकुमारी चौहान देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली इसने ही तो कूक कूक कर आमों में मिश्री घोली कोयल कोयल सच बतलाना क्या संदेसा लाई हो बहुत दिनों के बाद आज फिर इस डाली पर आई हो क्या गाती हो किसे बुलाती बतला दो कोयल रानी प्य…

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला एक हाथ में छड़ी घुमाता । जोकर आया हंसता गाता ।। रंग-बिरंगे कपड़े पहने। पहने था वह नकली गहने ।। लाल नाक पर बिन्दी पीली । बना रखी थीं भौंह कटीली ।। मुख सफेद, आंखें थी नीली । चुस्त कमीज़, पैन्ट कुछ ढ़ीली । शंक्व…

मीठे बोल - सोहनलाल द्विवेदी

मीठे बोल  मीठा होता खस्ता खाजा मीठा होता हलुआ ताजा, मीठे होते गट्टे गोल सबसे मीठे, मीठे बोल। मीठे होते आम निराले मीठे होते जामुन काले, मीठे होते गन्ने गोल सबसे मीठे, मीठे बोल। मीठा होता दाख छुहारा मीठा होता शक्कर पारा, मीठा होता रस …

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