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नंदू का जुकाम - रामनरेश त्रिपाठी

नंदू का जुकाम बहुत जुकाम हुआ नंदू को, एक रोज वह इतना छींका। इतना छींका, इतना छींका, इतना छींका, इतना छींका। सब पत्ते गिर गए पेड़ के, धोखा हुआ उन्हें आंधी का! - रामनरेश त्रिपाठी Nandu ka jukam bahut jukam hua nandu ko ek roj wah itna chhik…

अन्वेषण - रामनरेश त्रिपाठी

अन्वेषण मैं ढूँढता तुझे था, जब कुंज और वन में। तू खोजता मुझे था, तब दीन के सदन में॥ तू 'आह' बन किसी की, मुझको पुकारता था। मैं था तुझे बुलाता, संगीत में भजन में॥ मेरे लिए खड़ा था, दुखियों के द्वार पर तू। मैं बाट जोहता था, तेरी किसी चमन …

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