खटपट-खटपट - गोपीचंद श्रीनागर
खटपट-खटपट - गोपीचंद श्रीनागर कोयल दीदी खाकर गाती- मीठे, मीठे आम रे! गिल्लो रानी कुटकुट खाती बैठी ले बादाम रे। गौरैया जी बैठ डाल पर करती हैं आराम रे। सूरज दादा लौट चले हैं ढल जाती जब शाम रे। खेल-कूदकर हम भी चल दें अपने-अपने काम रे।…