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खटपट-खटपट - गोपीचंद श्रीनागर

खटपट-खटपट - गोपीचंद श्रीनागर कोयल दीदी खाकर गाती- मीठे, मीठे आम रे! गिल्लो रानी कुटकुट खाती बैठी ले बादाम रे। गौरैया जी बैठ डाल पर करती हैं आराम रे। सूरज दादा लौट चले हैं ढल जाती जब शाम रे। खेल-कूदकर हम भी चल दें अपने-अपने काम रे।…

लाल गुलाब सरीखे बापू - गोपीचंद श्रीनागर

लाल गुलाब सरीखे बापू एक फूल से खिल जाते थे हमजोली वे बन जाते थे बच्चों के रंग रंग जाते थे लाल गुलाब सरीखे बापू। बच्चे उनके राज दुलारे बच्चे उनके चाँद-सितारे बच्चों के संग मन मुसकाते मन के बच्चे सच्चे बापू। बच्चों से थे हिल-मिल जाते खिलखिल…

दीदी की शादी - गोपीचंद श्रीनागर

दीदी की शादी दीदी दिल्ली जाएगी, छोटू ढोल बजाएगा, दीदी जी को शादी में, डोली में बिठलाएगा! पापा पापड़ परसेंगे, बाबा बरफी लाएँगे, सभी बराती शादी में छक-छक भोग लगाएँगे। मेरे जीजा घोड़ी पर, साफा बाँधे आएँगे, बाजे वाले कुछ आगे मीठी तान लगाएँ…

नाना-नानी जी के नाम - गोपीचंद श्रीनागर

नाना-नानी जी के नाम उधम करूँ पर रोक न एक तनिक किसी की टोक न एक झिलमिल करती बाग़ में घाम सुबह सुनहरी चहके शाम गर्मी के ये सभी छुट्टियाँ नाना-नानी जी के नाम मामा मुर्ख बनाएँ एक नानी कथा सुनाएँ एक दिनभर गपशप और आराम मम्मी जी का बस यह काम गर्…

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