जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला एक हाथ में छड़ी घुमाता जोकर आया हंसता गाता रंग-बिरंगे कपड़े पहने पहने था वह नकली गहने लाल नाक पर बिन्दी पीली बना रखी थीं..

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

एक हाथ में छड़ी घुमाता ।
जोकर आया हंसता गाता ।।

रंग-बिरंगे कपड़े पहने।
पहने था वह नकली गहने ।।

लाल नाक पर बिन्दी पीली ।
बना रखी थीं भौंह कटीली ।।

मुख सफेद, आंखें थी नीली ।
चुस्त कमीज़, पैन्ट कुछ ढ़ीली ।

शंक्वाकार टोप सिर पर धर ।
लगा हंसाने वह रह रहकर ।।

दिखलाये उसने जब करतब ।
हुए हंसी से लोटपोट सब ।।

जोकर बनना एक कला है ।
खुशी बांटना बड़ा भला है ।।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला


jokar

ek hath mein chhadi ghumata
jokar aaya hansta gata

rang-birange kapde pahne
pahne tha wah nakli gahne

laal naak par bindi pili
bana rakhi thi bhonh katili

mukh safed, aankhe thi nili
chust kameej, paint kuchh dhili

shankakar top sir par dhar
laga hansane wah rah rahkar

dikhlaye usne jab kartab
hue hansi se lotpot sab

jokar banna ek kala hai
khushi bantna bada bhala hai
Trilok Singh Thakurela

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