त्रिलोक सिंह ठकुरेला : संक्षिप्त परिचय
त्रिलोक सिंह ठकुरेला (Trilok Singh Thakurela) का जन्म 1 अक्टूबर 1966, नगला मिश्रिया, हाथरस में हुआ | आप एक सुपरिचित कुण्डलियाकार हैं। आपने कुण्डलिया और छंद को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने कुण्डलिया छंद को नए आयाम देने का अभूतपूर्व प्रयास किया है।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला के पिता का नाम श्री खमानी सिंह एवं माता का नाम श्रीमती देवी है। इनके पिता अध्यापक थे। इनका जन्म हाथरस के निकट नगला मिश्रिया ग्राम में हुआ। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला, बसगोई में और माध्यमिक शिक्षा विजय विद्यालय इंटर कालेज, तोछीगढ़ में हुई। प्राविधिक शिक्षा परिषद, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से इन्होंने विद्युत अभियांत्रिकी में डिप्लोमा प्राप्त किया। बचपन में इनके शिक्षक पिता इन्हें प्रेरक बाल-कवितायें सुनाते थे, जो कविता के प्रति इनकी अभिरुचि का कारण बना।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला छांदस कविताओं के पक्षधर हैं। इन्होंने कविता, दोहा, कुण्डलिया, गीत , नवगीत, हाइकु-गीत, बाल कवितायें, लघुकथा आदि अनेक विधाओं में सृजन किया है। बाल-साहित्य सृजन के लिए इन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा 'शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार (2012 -13) से सम्मानित किया गया है।
'नया सवेरा', 'काव्यगन्धा' इनकी चर्चित कृतियाँ हैं। कुण्डलिया छंद के उन्नयन के लिए इन्होंने रचनाकारों को प्रेरित कर 'कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर' और 'कुण्डलिया-कानन' का सम्पादन किया। 'आधुनिक हिन्दी लघुकथाएँ ' इनके द्वारा संपादित लघुकथा संकलन है।
प्रसारण : आकाशवाणी और रेडियो मधुवन से रचनाओं का प्रसारण
पाठ्यक्रम में : महाराष्ट्र राज्य की दसवीं कक्षा की हिन्दी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी कुमारभारती' सहित चालीस से अधिक पाठ्यपुस्तकों में रचनाएँ सम्मिलित ।
अनुवाद : अनेक रचनाओं का पंजाबी में अनुवाद ।
विशिष्टता : कुण्डलिया छंद के उन्नयन , विकास और पुनर्स्थापना हेतु कृतसंकल्प एवं समर्पित ।
सम्प्रति : उत्तर पश्चिम रेलवे में इंजीनियर
चल-वार्ता : 9460714267
ईमेल : trilokthakurela@gmail.com
त्रिलोक सिंह ठकुरेला के पिता का नाम श्री खमानी सिंह एवं माता का नाम श्रीमती देवी है। इनके पिता अध्यापक थे। इनका जन्म हाथरस के निकट नगला मिश्रिया ग्राम में हुआ। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला, बसगोई में और माध्यमिक शिक्षा विजय विद्यालय इंटर कालेज, तोछीगढ़ में हुई। प्राविधिक शिक्षा परिषद, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से इन्होंने विद्युत अभियांत्रिकी में डिप्लोमा प्राप्त किया। बचपन में इनके शिक्षक पिता इन्हें प्रेरक बाल-कवितायें सुनाते थे, जो कविता के प्रति इनकी अभिरुचि का कारण बना।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला छांदस कविताओं के पक्षधर हैं। इन्होंने कविता, दोहा, कुण्डलिया, गीत , नवगीत, हाइकु-गीत, बाल कवितायें, लघुकथा आदि अनेक विधाओं में सृजन किया है। बाल-साहित्य सृजन के लिए इन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा 'शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार (2012 -13) से सम्मानित किया गया है।
'नया सवेरा', 'काव्यगन्धा' इनकी चर्चित कृतियाँ हैं। कुण्डलिया छंद के उन्नयन के लिए इन्होंने रचनाकारों को प्रेरित कर 'कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर' और 'कुण्डलिया-कानन' का सम्पादन किया। 'आधुनिक हिन्दी लघुकथाएँ ' इनके द्वारा संपादित लघुकथा संकलन है।
प्रकाशित कृतियाँ :
- नया सवेरा ( बाल कविता संग्रह )
- काव्यगंधा ( कुण्डलिया संग्रह )
- समय की पगडंडियों पर ( गीत संग्रह )
- आनन्द मंजरी ( मुकरी संग्रह)
- सात रंग के घोड़े ( बाल कविता संग्रह )
सम्पादन
- आधुनिक हिंदी लघुकथाएँ
- कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर
- कुण्डलिया कानन
- कुण्डलिया संचयन
- समसामयिक हिंदी लघुकथाएँ
- कुण्डलिया छंद के नये शिखर
- समकालीन मुकरियाँ
- अभिनव कुण्डलिया
- समकालीन कुण्डलिया शतक
- कुण्डलिया कौस्तुभ (अप्रकाशित)
सम्मान / पुरस्कार
आपको अपने साहित्यिक योगदान के लिए अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।- राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा 'शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार',
- पंजाब, कला साहित्य अकादमी द्वारा 'विशेष अकादमी सम्मान'
- विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, गांधीनगर (बिहार) द्वारा 'विद्या- वाचस्पति'
- हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा 'वाग्विदाम्वर सम्मान'
- राष्ट्रभाषा स्वाभिमान ट्रस्ट (भारत) गाज़ियाबाद द्वारा 'बाल साहित्य भूषण'
- पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ( राजस्थान) के 'बाल साहित्य सृजक सम्मान',
- निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान, बस्ती (उत्तर प्रदेश) द्वारा 'राष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान'
- हिंदी साहित्य परिषद, खगड़िया (बिहार) द्वारा स्वर्ण सम्मान
प्रसारण : आकाशवाणी और रेडियो मधुवन से रचनाओं का प्रसारण
पाठ्यक्रम में : महाराष्ट्र राज्य की दसवीं कक्षा की हिन्दी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी कुमारभारती' सहित चालीस से अधिक पाठ्यपुस्तकों में रचनाएँ सम्मिलित ।
अनुवाद : अनेक रचनाओं का पंजाबी में अनुवाद ।
विशिष्टता : कुण्डलिया छंद के उन्नयन , विकास और पुनर्स्थापना हेतु कृतसंकल्प एवं समर्पित ।
सम्प्रति : उत्तर पश्चिम रेलवे में इंजीनियर
चल-वार्ता : 9460714267
ईमेल : trilokthakurela@gmail.com