जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर शायरी संग्रह | जखीरा, साहित्य संग्रह

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जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर शायरी संग्रह

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जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर संग्रह जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है जंग क्या मसअलों का हल देगी - साहिर लुधियानवी

जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर संग्रह
युद्ध और जंग से किसी समस्या का हल कभी नहीं हुआ असल में जंग के कारण के नरसंहार जरुर हुए है | जंग/ युद्ध कभी वर्चस्व पाने के लिए की गई या कभी संपत्ति पाने के लिए | जंग / युद्ध सत्ता हथियाने के लिए हुए |
जंग के कारण जन धन का नुक्सान तो होता ही है इसके साथ ही साथ यह हमेशा के लिए एक दर्द दे जाता है माँ की कोख सूनी हो जाती है, बच्चे अनाथ हो जाते है, बीबी विधवा हो जाती है |
जंग युद्ध पर लिखे गए शेर और कवितांश आपके लिए पेश है :


अकेला लड़ रहा हूँ ज़िंदगी की जंग बचपन से
बला की भीड़ है कोई नहीं अपना नज़र आया
- मुकेश इंदौरी



अकेले जंग लड़ी जीत ली तो सब ने कहा
पहुँचते हम भी अगर तू हमें ख़बर करता
- तैमूर हसन



अकेले हैं वो और झुँझला रहे हैं
मिरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी



अज़ल से जब्र ओ सदाक़त की जंग जारी है
अभी तलक नहीं मज़लूम हारे ज़िंदा हैं
- राम रियाज़



अजीब उस से तअल्लुक़ है क्या कहा जाए
कुछ ऐसी सुल्ह नहीं है कुछ ऐसी जंग नहीं
- अकबर अली खान अर्शी जादह



अजीब जंग रही मेरी मेरे अहद के साथ
मैं उस के जाल को वो मेरे पर कतरता रहा
- निसार नासिक



अजीब जंग-ओ-जिदाल हर पल है मेरे अंदर
कि नूर-ओ-ज़ुल्मत का एक मक़्तल है मेरे अंदर
- नदीम फ़ाज़ली



अज़ीम क़िला-दार सब असीर कर लिए गए
जो जंग-जू थे ना-तवाँ हवा उड़ा के ले गई
- सरफ़राज़ ख़ान आज़मी



अना का नाज़ लबादा उतार कर देखो
किसी के वास्ते ये जंग हार कर देखो
- नाज़ मुजफ़्फ़राबादी



अना की जंग ने बर्बाद कर दिए रिश्ते
अगरचे इश्क़ है तो सर झुका लिया जाए
- मुसव्विर फ़िरोज़पुरी



अना ही दोस्त अना ही हरीफ़ है मेरी
इसी से जंग इसी को सिपर भी करना है
- अरशद अब्दुल हमीद



अपनी जंग ही लड़ती है
लाख कहो वो बाग़ी है
- बिल्क़ीस ख़ान



अपनी सुल्ह-ए-दोस्ती लाई ये रंग
वो मुसलसल जंग में रहने लगा
- इस्लाम उज़्मा



अपनी ही आरज़ूओं से इक जंग है हयात
बस यूँ समझ लो दस्त-ए-तह-ए-संग है हयात
- शायर जमाली



अपने बल पे लड़ती है अपनी जंग हर पीढ़ी
नाम से बुजुर्गों के अज्मतें नहीं मिलतीं
- मंज़र भोपाली



अपने मफ़ाद के लिए मैदान-ए-जंग में
जीता गया कभी कभी हारा गया मुझे
- नबील अहमद नबील



अपने शजरे को भी हमराह लिए चल रस्मन
जंग से क़ब्ल यहाँ नाम-ओ-नसब पूछते हैं
- महमूद आमिर



अपनो की साज़िशों से ही मसरूफ़-ए-जंग हूँ
ग़ैरों से दुश्मनी की ज़रूरत नहीं मुझे
- सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़



अपनों से जंग है तो भले हार जाऊँ मैं
लेकिन मैं अपने साथ सिपाही न लाऊँगा
- अख़तर शाहजहाँपुरी



अब अँधेरों से जंग की ख़ातिर
कुछ चराग़ों को बो रही है शब
- सलीम रज़ा रीवा



अब इस जहाँ में रहना भी मुमकिन नहीं रहा
आख़िर को ये भी जंग का मैदान बन गया
- सईद नज़र



अब के बचा सकी न मिरी ख़ामुशी मुझे
इस बार मेरी जंग किसी हम-नवा से थी
- कुलदीप कुमार



अब जंग हर किसी से तो मत छेड़ गर ये लोग
देने को अपनी जाँ तुझे तैयार हो गए
- महेश जानिब



अब तो इस जंग का फ़ैसला हो कोई
लड़ रहे हैं अज़ल से हवा और मैं
- इफ़्तिख़ार मुग़ल



अब निशाना उस की अपनी ज़ात है
लड़ रहा है इक अनोखी जंग वो
- अब्दुस्समद ’तपिश’



अब मेरी अपने आख़िरी दुश्मन से जंग है
मैदाँ में कोई मेरे सिवा अब नहीं रहा
- मिद्हत-उल-अख़्तर



अब यही जंग का उन्वान भी हो सकता है
उस ने पत्थर कोई फेंका है ख़बर की सूरत
- ज़िया फ़ारूक़ी



अबरू से गो लड़ा कभी तीर-ए-निगाह से
दिल को है मेरे जंग ये ऐ जंग-जू पसंद
- नवाब उमराव बहादूर दिलेर



अभी जीते हैं अहरमन-ज़ादे
अभी बरपा है ख़ैर-ओ-शर की जंग
- बदर जमाली



अभी तो जंग जारी है
मगर आ'साब ढीले हैं
- फ़रहत अब्बास शाह



अभी मैं फ़ाक़ा-कशी के महाज़-ए-जंग पे हूँ
मिरी ग़ज़ल से कहो मेरा इंतिज़ार करे
- सग़ीर रियाज़



अमन पसंद इन्सान इधर भी है और उधर भी है,
मगर जो शोलो को हवा दे वो इधर भी है और उधर भी है
- डॉ. महेन्द्र भास्कर



अम्न की कर ख़ैरात अता मेरे मौला
जंग-ओ-जदल को दूर हटा मेरे मौला
- साहिल मुनीर



अम्न की ख़ातिर इतना ही कर सकता था
मैं ने जंग में अपने बेटे भेजे हैं
- इकराम बसरा



अम्न-ए-आलम की ख़ातिर
जंग युगों से जारी है
- असलम हबीब



अल्लाह अल्लाह सियासत-ए-हाज़िर
सुल्ह के साथ साथ जंग भी है
- ऐन सलाम



अहद-ए-सितारा जंग है मंज़र-याबी पर
दिल दिल 'रहमानी' वहशत-सामानी है
- परवेज़ रहमानी



अहबाब हैं क्यूँ दंग मुझे ही नहीं मालूम
किस से है मिरी जंग मुझे ही नहीं मा'लूम
- राहत हसन



आ अंदलीब सुल्ह करें जंग हो चुकी
ले ऐ ज़बाँ-दराज़ तू सब कुछ सिवाए गुल
- मीर तक़ी मीर



आ गया दस्ता अबाबीलों का अहमद-इरफ़ान
अब हमें जंग में पस्पाई नहीं हो सकती
- अहमद इरफ़ान



आँख में अफ़्वाज ख़्वाबों की उतारें मुस्तक़िल
और ता'बीरें उठाएँ ज़िंदगी की जंग से
- ज़किया शैख़ मीना



आँखें लड़ा रहे हो सर-ए-बज़्म ग़ैर से
और मुझ से ये बयान कि हम जंग-जू नहीं
- रशीद लखनवी



आँखें लड़ीं तुझ से मैं हुआ क़त्ल
इन तुर्कों ने जंग-ए-ज़रगरी की
- रिन्द लखनवी



आँखों को तेरी दीद मयस्सर नहीं मगर
दिल जंग कर रहा है रसद के बग़ैर भी
- सरदार अयाग़



आइए करते हैं बे-जंग-ओ-जदल
बाहमी रस्सा-कशी पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़
- मसूद हस्सास



आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ
फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना
- मुबारक सिद्दीक़ी



आख़िरी हिचकी लेगा कौन
मेरी जंग लड़ेगा कौन
- राहिल बुख़ारी



आग पानी में अगर जंग हुई
किस तरफ़ आदमी होगा देखें
- राम रियाज़



आज तलवार हुई जाती हैं शाख़ें उस की
जंग होनी है हवाओं से शजर जान गया
- फ़ारूक़ अंजुम



आज भी जंग के बादल हैं जहाँ पर छाए
अहद-नामों से अयाँ अम्न की तहरीर न देख
- नरेश नदीम



आबगीनों में सियाही भर के चल
दोस्ती में जंग का इज़हार कर
- अबुल हसनात हक़्क़ी



इंकार ज़बानी था कोई जंग नहीं थी
फिर क्यों मिरा बे-कार बदन टूट रहा है
- काशिफ़ शकील



इंसान अपनी जंग का ख़ुद फ़ैसला करें
ख़ुशनूदी चाहता हूँ ख़ुदा की मदद नहीं
- हम्ज़ा याक़ूब



इक क़लम की ताक़त पर हम ये जंग जीतेंगे
हौसलों की वुसअत है ज़िंदगी के दामन में
- शिफ़ा कजगावन्वी



इक तरीक़ा है जंग रुकने का
जंग ख़ुद पे हराम कर लीजे
- नाज़िम नक़वी



इक बड़ी जंग लड़ रहा हूँ मैं
हँस के तुझ से बिछड़ रहा हूँ मैं
- इफ़्तिख़ार राग़िब



इक बार करो जंग में उस माँ का तसव्वुर
जो फ़ौत हुआ लख़्त-ए-जिगर ढूँढ रही है
- जगजीत काफ़िर



इक मुसलसल जंग थी ख़ुद से कि हम ज़िंदा हैं आज
ज़िंदगी हम तेरा हक़ यूँ भी अदा करते रहे
- अब्दुल्लाह कमाल



इक रात देख लेना एलान-ए-जंग होगा
गाड़े हैं आशिक़ो ने झंडे तिरी गली में
- बेतकल्लुफ़ शाजापुरी



इक सर्द-जंग का है असर मेरे ख़ून में
एहसास हो रहा है दिसम्बर का जून में
- ग़ौसिया ख़ान सबीन



इज़्ज़त-ए-नफ़्स का मुश्किल है तहफ़्फ़ुज़ यानी
एक फ़िरक़े को यहाँ जंग-ओ-जदल चाहिए है
- सरफ़राज़ ख़ान आज़मी



इब्तिदा से उम्र के अंजाम तक
जंग अपनी लड़ रहा है आदमी
- मीम शीन नज्मी



इश्क़ और जंग में हर्गिज़ नहीं देखा जाता
फ़ायदा किसका हुआ और ख़सारा किस का
- ज़मीर यूसुफ़



इश्क़ ने सामने होते ही जलाया दिल को
जैसे बस्ती को लगावे है अदू जंग में आग
- ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी



इश्क़ में जंग में सियासत में
कुछ भी हो नारवा नहीं होता
- ज़फ़र महमूद ज़फ़र



इस अना की जंग में तू फ़त्ह-याब कर मुझे
ये शरफ़ भी आज मेरे शहसवार दे मुझे
- शाहिद कमाल



इस एक ख़ौफ़ से मैं जंग में शहीद हुआ
अदू कमीना है ताने ख़ुदा के मारेगा
- ज़ुबैर क़ैसर



इस ज़िंदगी की जंग में हर इक महाज़ पर
मेरे मुक़ाबले में मिरी ज़ात डट गई
- सिब्त अली सबा



इस ज़ीस्त के हर मोड़ पे लड़नी है मुझे जंग
क़िर्तास ओ क़लम हैं कोई शमशीर नहीं है
- शाइस्ता मुफ़्ती



इस दश्त में जीत किस की ठहरी
इस जंग में जान किस ने दी है
- अतहर नासिक



इस दौर-ए-फ़ित्ना-गर में मिरी एक बात सुन
सब कुछ है सुल्ह हेच है ये जंग-ओ-दावरी
- जगन्नाथ आज़ाद



इस मारके में काम जो हम आ गए तो क्या
जारी रहेगी बा'द हमारे भी जंग ये
- नसीम सहर



उजड़ न जाए उरूस-ए-सुख़न की माँग कहीं
ख़याल-ओ-फ़न की नई जंग से बचाओ हमें
- मंज़र अय्यूबी



उन से जावेद जंग लाज़िम है
हक़ का जो फ़ैसला नहीं देते
- जावेद सिद्दीक़ी आज़मी



उन्हीं को मिल रहे हैं आज तमग़ा-ए-बहादुरी
ब-वक़्त-ए-जंग जो हमारी ओट में दुबक गए
- मोईन कौसर



उस क़बीले से नहीं मैं कि जो अपनी लड़की
जंग के ख़ौफ़ से लश्कर के हवाले कर दे
- रेहाना क़मर



उस ज़ुल्म का क़िस्सा लम्बा है उस जंग की पुस्तक भारी है
वो जंग जो कब की ख़त्म हुई वो जंग अभी तक जारी है
- सईद अहमद अख़्तर



ऊस परी-रू सीं और हातिम सीं
रात दिन सुल्ह ओ जंग है यारो
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम



एक तरफ़ कुछ होंट मोहब्बत की रौशन आयात पढ़ें
इक सफ़ में हथियार सजाए सारे जंग-परस्त रहें
- अहमद जहाँगीर



एक भी लफ्ज़ को आवाज़ नहीं करना है।
अब किसी जंग का आगाज़ नहीं करना है
- मध्यम सक्सेना



एक रात देख लेना एलान-ए-जंग होगा
गाड़े हैं आशिक़ों ने झंडे तिरी गली में
- बेतकल्लुफ़ शाजापुरी



एक सफ़्हा कहीं तारीख़ में ख़ाली है अभी
आख़िरी जंग से पहले तुम्हें मोहलत दूँगा
- सलीम कौसर



एक सर्द जंग है अब मोहब्बतें कहाँ
टूटते हुए तिलिस्म फैलता हुआ धुआँ
- आसिफ़ जमाल



ऐ पलट आने की ख़्वाहिश ये ज़रा ध्यान में रख
जंग से कोई बराबर नहीं आया करता
- अहमद कामरान



और कुछ देर यूँही जंग सियासत मज़हब
और थक जाओ अभी नींद कहाँ आएगी
- निदा फ़ाज़ली



कब तक जंग लड़ेगा तेरे सूरज से
सूखेगा इक दिन आख़िर ये सागर भी
- हकीम मंज़ूर



क़बीले अपनी ही बस्ती के जंग-जू निकले
ख़ुलूस-ओ-सिद्क़-ओ-मोहब्बत के ज़ाब्ते टूटे
- तसनीम हसन



कभी किसी के भरोसे पे जंग मत करना
कोई किसी से उलझता नहीं किसी के लिए
- शकील इबन-ए-शर्फ़



कभी न हो अब जंग ज़मीं पर देश रहें सब मिलकर,
जंग एक ही हो दुनिया में भूख, रोग और दु:ख पर,
- शंकर शैलेंद्र



कभी भी अपनी तबीअत न जंग-जू की थी
वहाँ अना की नहीं बात आबरू की थी
- सय्यद अहमद शमीम



कम मारका-ए-ज़ीस्त नहीं जंग-ए-उहद से
अस्बाब-ए-जहाँ माल-ए-ग़नीमत की तरह है
- मोहम्मद आज़म



कमाँ पे चढ़ के ब-शक्ल-ए-ख़दंग होना पड़ा
हरीफ़-ए-अम्न से मसरूफ़-ए-जंग होना पड़ा
- ज़मीर अतरौलवी



कर रहे हैं मुझ से तुझ-बिन दीदा-ए-नमनाक जंग
दाग़-ए-दिल जूँ शम्अ' करते हैं जुदा बेबाक जंग
- वली उज़लत



करता रहा मैं तेरे लिए दोस्तों से जंग
तू मेरे दुश्मनों से ख़फ़ा क्यूँ नहीं हुआ
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



करते हैं लोग जंग यहाँ इश्क़ के लिए
हम लोग इश्क़ जंग के दौरान करके ख़ुश
- यासिर ख़ान



करेगा यार मिरी जंग-ए-ग़ैर में इमदाद
जो आश्ना हैं वो होते हैं आश्ना की तरफ़
- हैदर अली आतिश



कर्बला नहीं लेकिन झूट और सदाक़त में
कल भी जंग जारी थी अब भी जंग जारी है
- मंज़र भोपाली



कल मय-कदे की जानिब आहंग-ए-मोहतसिब है
दरपेश मय-कशों को फिर जंग-ए-मोहतसिब है
- बक़ा उल्लाह बक़ा



कल मौजों में जंग हुई
और किनारे टूट गए
- हाफ़िज़ कर्नाटकी



कश्तियाँ सारी जला डालीं अना की जंग में
मैं ने भी कब वापसी का रास्ता रहने दिया
- ज़ाहिद अाफ़ाक



कहते हैं जिस को इश्क़ मिरे भाई जंग है
ये दो दिलों के बीच इलाक़ाई जंग है
- एजाज तवक्कल



कहते हैं लोग देख के इस हाल में मुझे
अपने ख़िलाफ़ जंग तो लड़ता नहीं कोई
- रूही कंजाही



कहराता सूरज ये कह कर डूब जाता है ।
वो जंग जीती हुई थी जो मैंने हारी है ।
- ताहिर फ़राज़



कहीं पे अम्न लाया जा रहा है
कहीं पे जंग होती जा रही है
- जावेद जहद



किनारे पाँव से तलवार कर दी
हमें ये जंग ऐसे जीतनी थी
- नोमान शौक़



किया है जंग को रुख़्सत मगर दुआ दे कर
अदू के पास अगर उस की ढाल है तो रहे
- अहमद निसार



किस क़दर काट है ख़ामोश-लबी में साग़र
जंग बे-तेग़ भी लड़ता है सिपाही कैसी
- साग़र मेहदी



किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक
जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता
- मोमिन ख़ाँ मोमिन



किस ज़ेहन से ये सारे महाज़ों पे जंग थी
क्या फ़त्ह हो गया कि सफ़-आराइयाँ गईं
- अज़हर इनायती



किस ने दिया था सुल्ह-ओ-सफ़ाई का मशवरा
बस्ती में हो के जंग का एलान रह गया
- नय्यर क़ुरैशी गंगोही



किसी के काम ही आएगा जंग में हर्षित
बदन से तीर अगर तू निकाल लेता है
- हर्षित मिश्रा



किसी भी जंग में उस ने नहीं फ़त्ह पाई
ये और बात कि वो वक़्त का सिकंदर था
- मोहम्मद सिद्दीक़ नक़वी



किसी से जंग किसी से जिहाद चाहते हैं
ख़ुदा के नाम पे क्या क्या फ़साद चाहते हैं
- हम्ज़ा याक़ूब



क़िस्से में जंग आई तो क़ुर्बान हो गए
प्यादे लड़े थे आख़िरी किरदार के लिए
- ओम अवस्थी



कुछ अब के जंग पे उस की गिरफ़्त ऐसी थी
दर-अस्ल था वही फ़ातेह शिकस्त ऐसी थी
- मुबारक अंसारी



कुछ जीत में भी फ़ाएदा होता नहीं फिर भी
वो जंग नहीं हारता हर्जाने के डर से
- हसन अज़ीज़



कुफ़्र ओ इस्लाम के झगड़े को चुका दो साहब
जंग आपस में करें शैख़ ओ बरहमन कब तक
- सबा अकबराबादी



कोई पंछी कोई शिकारी है
ज़िंदा रहने की जंग जारी है
- फ़हमी बदायूनी



कोह से नीचे उतर कर कंकरी चुनते हैं अब
इश्क़ में जो आबजू थे जंग में सैलाब थे
- हसन नईम



कौन करता है यहाँ जंग नतीजे के लिए
जीत कर हारने वाले से झगड़ सकता हूँ
- अमूल्य मिश्रा



कौन जीतेगा इस जंग में देखिए
हो गए हैं मुक़ाबिल हवा और मैं
- फ़रहत नदीम हुमायूँ



क्या उन से लड़ाई में मज़ा आएगा हम को
मैदान में आए हैं नहीं जंग से वाक़िफ़
- फ़ारूक़ शकील



क्या कोई जंग होने वाली है
ख़्वाब में थीं सिपर की तस्वीरें
- हर्षित मिश्रा



क्या जाने कैसी जंग है तिश्ना-लबी के साथ
ख़ंजर ही हाथ धोने लगे अपनी जान से
- वफ़ा नक़वी



क्या पूछते हैं आप मिरे दिल की कैफ़ियत
दिन-रात अपने आप से लड़ता हूँ जंग मैं
- राणा गन्नौरी



क्यूँ सिखाएं अपने बच्चों को यहाँ जंग ओ जदल
बस मोहब्बत ही है जब सरमाया ए नज़्म ओ ग़ज़ल
- बाबर इमाम



खड़े रहो न मुक़ाबिल हर एक के अमजद
कि इस तरह से तो ख़तरा है जंग होने का
- अमजद मिर्ज़ा



ख़त्म हो जंग ख़राबे पे हुकूमत की जाए
आख़िरी मारका-ए-सब्र है उजलत की जाए
- इरफ़ान सिद्दीक़ी



ख़बर भी जंग की लेकर सलाम आया है
लहू से आज लिखा क्यूँ कलाम आया है
- दिनकर राव दिनकर



ख़मोश होके अगर लोग सुन सकें तो सुनें
फ़ज़ाये जंग में एक नग़मये रुबाब हूँ मैं
- डॉ नुसरत मेहदी



ख़िराज देता चला आ रहा हूँ आज तलक
मैं एक रोज़ ज़माने से जंग हारा था
- मक़बूल आमिर



ख़िलाफ़-ए-ज़ुल्म ग़ज़ल भी है जंग-जू मेरी
यही सबब कि ग़ज़ल है लहू लहू मेरी
- कौसर तसनीम सुपौली



ख़ुद अपने आप से लड़नी पड़ेगी जंग हमें
दिलों से ख़ौफ़ का लश्कर ज़रूर निकलेगा
- अशफ़ाक़ हुसैन



ख़ुदा को कभी तो हराएँगे हम
मरेंगे नहीं जंग हारे बिना
- अंकित गौतम



ख़ुदी से बे-ख़ुदी की जंग है गोया मुझे इस पल
मुक़ाबिल अपने ही अपनी कोई तस्वीर रखनी है
- नदीम सिरसीवी



ख़ून की एक नदी और बहेगी शायद
जंग जारी है तो जारी ही रहेगी शायद
- याक़ूब राही



ख़ूब कर तारीफ़-ए-नव्वाब-ए-ज़फ़र-जंग ऐ मुनीर
काम आ जाएगी ये आक़ा-परस्ती एक दिन
- मुनीर शिकोहाबादी



खेत रुल जाएँगे पागल-पन में
जंग कैसी मुझे हारा समझो
- इदरीस बाबर



ख़्वाबों के दरमियान है मुद्दत से एक जंग
मैदान-ए-कार-ज़ार न लश्कर दिखाई दे
- मोहसिन ज़ैदी



ग़म-ए-ज़माना ग़म-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-जानाँ
सुलग रहे हैं ख़यालात जंग जारी है
- ग़ुलाम दस्तगीर शरर



ग़ाफ़िल न जानिए मुझे मसरूफ़-ए-जंग हूँ
उस चुप से जो कलाम से आगे निकल गई
- लियाक़त अली आसिम



गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले
- अज़ीम बेग अज़ीम



गुर सिखाए जो जंग-बाज़ी के
ऐसी दानिश को रहनुमा न करो
- हज़ीं लुधियानवी



चंद जज़्बे जंग में मशग़ूल थे
रात-भर मैं सो न पाया शोर से
- असलम हबीब



चराग़ों में लहू डालो है लड़नी जंग ज़ुल्मत से
वगरना अब उजालों को अंधेरा मार डालेगा
- हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी



चलो कि चल के सियासी मुकामिरों से कहें,
कि हम को जंगो-जदल के चलन से नफ़रत है
गुज़श्ता जंग में घर ही जले मगर इस बार,
अजब नहीं कि ये तनहाइयाँ भी जल जायें
गुज़श्ता जंग में पैकर जले मगर इस बार,
अजब नहीं कि ये परछाइयाँ भी जल जायें
- साहिर लुधियानवी



चार दाँग-ए-आलम-ए-ईजाद में
चार मौजें हैं बहम और ख़ाना-जंग
- साहिर देहलवी



चाहता हूँ कि यहाँ फूल खिले हों हर-सू
या'नी ये जंग का मैदान नहीं चाहता मैं
- अज़हर अब्बास



चाहें तो इस को तेग़-ए-ख़मोशी से काट दें
लेकिन जुनूँ से जंग ज़बानी करेंगे हम
- अभिनंदन पांडे



छतें भी बट चुकीं आँगन भी बट चुके लेकिन
छिड़ी है जंग कि हक़ किस का है दफ़ीने पर
- मुज़फ़्फ़र अबदाली



छिड़ जाए तो तबक़ात की अब जंग सलीम
कुछ भी हो मगर हम को न ज़हमत दी जाए
- सलीम कौसर



छिड़ी तो फिर न रुकेगी हयातयाती जंग
हमारी ज़िंदगियाँ ख़ौफ़ में बसर होंगी
- शाहिद माकली



छिड़ी थी जंग बहुत पहले रौशनी के लिए
चराग़ जलते हुए बुझ गए थे दोनों तरफ़
- अमूल्य मिश्रा



छिड़ी हुई है अज़ल से दिल ओ निगाह में जंग
महाज़ एक है लश्कर बदलता जाता है
- असअद बदायुनी



छिड़ी है जंग मुसलसल मिरी अना के साथ
मैं अपनी वज़्अ पे क़ाएम रहूँ बक़ा के साथ
- सय्यद निसार अहमद निसार



छीन कर एक दूसरे की बक़ा
हम ने तज़हीक-ए-जंग उड़ाई थी
- अफ़ज़ाल नवेद



छुपते फिरते हैं वक़्त-ए-जंग-ओ-जदल
बुज़दिला उन को बरमला कहिए
- नैन सुख



छुपाए जंग का सामान सरहद
है लाशों का भी क़ब्रिस्तान सरहद
- फ़ारुक़ अहमद बट



छेड़िए इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के खिलाफ़
दोस्त मेरे मजहबी नग़मात को मत छेड़िए
- अदम गोंडवी



छोड़ो भी ये जंग की बातें
ख़ून-ख़राबे की ये घातें

जंग की भड़की आग बुझाओ
अम्न की ठंडी छाँव में आओ
- सय्यदा फ़रहत



जंग अख़्लाक़-ओ-मोहब्बत से भी हो सकती है
अपने दुश्मन पे न तलवार उठाओ यारो
- शौक़ सालकी



जंग अगर छिड़ गई ख़ुदाओं में
सिर्फ़ मख़्लूक़ मारी जाएगी
- राना अब्दुर्रब



जंग अपने मुक़द्दर से ख़रीदी है कि हम ने
इक शख़्स है दिल दे की जिसे यार किया है
- महशर बदायुनी



जंग अपनों से है तो दिल को किनारे कर लूँ
रास्ते में यही तलवार न हाएल हो जाए
- नोमान शौक़



जंग इफ़्लास और ग़ुलामी से
अम्न बेहतर निज़ाम की ख़ातिर
- साहिर लुधियानवी



जंग और इश्क़ में हर बात है जाएज़ लेकिन
जीत उस की है जो आमादा-ए-पैकार तो हो
- ज़फ़र मेहदी



जंग कर लेना सभी अस्बाब से
अपने रब से फिर मचल कर देखना
- चाँद अकबराबादी



जंग करेंगे ये तो बता दो
साथ सिपर में कौन रहेगा
- अनीस अब्र



जंग का फ़ैसला दुश्मन को मिरे करना है
फूल रखता हूँ मैं इक हाथ में तलवार के साथ
- फ़य्याजुद्दीन साइब



जंग का मतलब आहें आँसू
जंग का मतलब ख़ून लहू
- वक़ार ख़लील



जंग का वक़्त नहीं ये प्यारे
घर में आए हैं मुदारात करो
- आबरू शाह मुबारक



जंग का शोर भी कुछ देर तो थम सकता है
फिर से इक अम्न की अफ़्वाह उड़ा दी जाए
- शाहिद कमाल



जंग का हथियार तय कुछ और था
तीर सीने में उतारा और है
- परवीन शाकिर



जंग की बातें करने वालो याद रहे
बचते हैं बस आहें आँसू नाले जी
- मुनीर अनवर



जंग के आसार हैं बाक़ी अभी
आ रहा है पास लश्कर का धुआँ
- वसाफ़ बासित



जंग के फ़ैसले मैदाँ में कहाँ होते हैं
जब तलक हाफ़िज़े बाक़ी हैं अलम बाक़ी है
- निदा फ़ाज़ली



जंग के बाद अगर सुल्ह न हो सद-अफ़्सोस
चाहिए क़ल्ब-ए-मुकद्दर हो सफ़ा तीसरे दिन
- अबुल बक़ा सब्र सहारनपुरी



जंग के मैदाँ में लश्कर की तरह
हौसला रख्खो सिकंदर की तरह
- अजमेर अंसारी कशिश



जंग के मैदान से फिर जंग के मैदान तक
ज़िंदगी तेरी ही इक जंगाह में बैठे थे हम
- नासिरा ज़ुबेरी



जंग क्यूँ इस ज़मीं पे जारी है
जब हमारा अदू हवा में है
- इम्तियाज़ दानिश नदवी



जंग ख़त्म हो गई मगर अभी
क़ैदियों की रस्सियाँ खुली नहीं
- मुनीर जाफ़री



जंग खुद से हर घड़ी करनी पड़ी
यूँ बसर ये ज़िन्दगी करनी पड़ी
- हातिम जावेद



जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें
ये हमारी ज़बान है प्यारे
- हफ़ीज़ जालंधरी



जंग जब उन से लाज़मी ठहरे
उन से फिर जंग ही करो बाबा
- याक़ूब राही



जंग जारी है अभी जागते रहिए शब-भर
जाने कस ओट से छुप कर कोई लश्कर आए
- जानाँ मलिक



जंग जारी है ख़ानदानों में
ग़ैर महफ़ूज़ हूँ मकानों में
- अमीर क़ज़लबाश



जंग जारी है चार आँखों में
हो रहा है क़िताल आँखों में
- सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़



जंग जारी है मेरी नफ़्स-ए-अमारा से हनूज़
जब से देखा तुझे बरसात के आईने में
- सय्यद इक़बाल रिज़वी शारिब



जंग जारी है रिश्ते-नातों में
सब असासा बिखर न जाए कहीं
- फ़ारूक़ रहमान



जंग ज़ालिम से हुई मैदान मेँ हम डट गए
जितने इज़्ज़त दार थे सब लोग पीछे हट गए
- अब्दुल रहमान मंसूर



जंग जितनी हो सके दुश्वार होनी चाहिए
जीत हासिल हो तो लज़्ज़त-दार होनी चाहिए
- चराग़ शर्मा



जंग जीती है कैसे ख़ुश्बू से
फूल हैरत से देखते हैं मुझे
- शोएब ज़मान



जंग तेरी बड़ी तवील सही
माअ'रके बे-मिसाल कितने हैं
- जी आर कँवल



जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है
जंग क्या मसअलों का हल देगी
- साहिर लुधियानवी



जंग तो हो रही है सरहद पर
अपने घर में लहूलुहान हूँ मैं
- आबिद मुनावरी



जंग दरपेश इक ऐसी है मुझे जिस के लिए
उम्मत-ए-मुस्लिमा तय्यार नहीं हो सकती
- अमान अब्बास



जंग दस्तक लिए आ पहुँची है दरवाज़े तक
शाहज़ादा लब-ओ-रुख़्सार में उलझा हुआ है
- ख़ुर्शीद तलब



जंग पर जाते हुए बेटे की माँ से पूछो
कैसे जज़्बात के तूफ़ान सँभाले होंगे
- शिफ़ा कजगावन्वी



जंग में आएगा मज़ा सैफ़ी
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी है
- असलम सैफ़ी



जंग में कत़्ल सिपाही होंगे
सुर्खरु ज़िल्ले इलाही होंगे
- मौज रामपुरी



जंग में क़त्ल सिपाही होंगे
सुर्ख़-रू ज़िल्ल-ए-इलाही होंगे
- मोहम्मद अली मोज रामपुरी



जंग में कैसे टिकेंगे वो भला हस्ती की
जो किसी शाख़ को शमशीर नहीं कर सकते
- सिया सचदेव



जंग में जीत की ज़मानत हैं
हौसला इख़्तियार और यक़ीन
- फ़ैसल नदीम फ़ैसल



जंग में परवर-दिगार-ए-शब का क्या क़िस्सा हुआ
लश्कर-ए-शब सुब्ह की सरहद पे क्यूँ पसपा हुआ
- जमुना प्रसाद राही



जंग में सब कहाँ शमशीर-ज़नी करते हैं
काम लाशों को उठाना भी तो हो सकता है
- अमान अब्बास



जंग में हौसला होना भी ज़रूरी है बहुत
काँपते हाथ में तलवार कहाँ रुकती है
- शाह आलम रौनक



जंग मैदान से कमरों में सिमट आई है
घर न जाना कभी बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर औरों के
- शाहिद जमाल



जंग ये जीती भी जा सकती है
ज़िंदगी से कोई साज़िश तो करो
- शकील आज़मी



जंग रिश्तों और अना में छिड़ गई
हारने का हौसला पैदा करूँ
- शम्सा नज्म



जंग रोटी की नहीं बच्चों के मुस्तक़बिल की है
मा'रका अब ये भी सर करना ज़रूरी हो गया
- इसहाक़ असर



जंग लड़ते रहे दर-पेश मसाइल से शफ़ीक़
हम ने दुनिया से कहाँ पुश्त-पनाही चाही
- शफ़ीक़ आबिदी



जंग लड़नी हो जिस को रिश्तों से
हो वो पागल नहीं तो फिर क्या हो
- कंचन डोभाल



जंग लड़ने गए हम जो सहर-ए-दुनिया से
शाम को घर कई हिस्सों में बिखर कर आए
- चराग़ बरेलवी



जंग लड़े बरसों गुज़रे लेकिन अब भी
सर पे मिरे तलवार चमकती रहती है
- परवीन कुमार अश्क



जंग सारी तुम्हीं को ले कर थी
ज़ेहन-ओ-दिल के जो दरमियान चली
- कमल हातवी



जंग से आएंगे अच्छे दिन यहां
है हुकूमत को वहम हम क्या करें
- जगन्नाथ पटौदी



जंग से आगे अब जिदाल पे हैं
गो कि शमशीर एहतिमाल पे हैं
- अनीसुर्रहमान



जंग से जंगल बना जंगल से मैं निकला नहीं
हो गया ओझल मगर ओझल से मैं निकला नहीं
- अफ़ज़ाल नवेद



जंग से मसअले हल करने चले हो लोगो
तुम्हें तारीख़ का एक एक सबक़ याद नहीं
- आर पी शोख़



जंग हारी न थी अभी कि फ़राज़
कर गए दोस्त दरमियाँ से गुरेज़
- अहमद फ़राज़



जंग ही गर तुझे मंज़ूर है फिर आँख लड़ा
ये भी इक जंग है ओ आँख लड़ाने वाले
- अब्दुल रहमान एहसान देहलवी



जंग है जहल से अफ़रंग क़लम ही काफ़ी
क्या ज़रूरत है कि शमशीर उठानी क्यों है
- ज़ोहेब फ़ारूक़ी अफ़रंग



जंग है जुर्म मोहब्बत है ख़िलाफ़-ए-तहज़ीब
हो चुका वलवला-ए-अह्द-ए-जवानी पैदा
- अकबर इलाहाबादी



जंग है तो जंग का मंजर भी होना चाहिये
सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिये
- राहत इंदौरी



जंग होती अदू से ऐ साबिर
और मैं फ़त्ह-याब हो जाता
- फ़ज़ल हुसैन साबिर



जंग-ए-अरब में छोड़ गए जब हिमायती
कूफ़ा के इक जवाँ ने मिरी जाँ बचाई थी
- वक़ार ख़ान



जंग-ए-वतन में सिद्क़ के हथियार का है काम
दरकार इस में असलहा-ए-आहनीं नहीं
- दत्तात्रिया कैफ़ी



जंग-ए-हयात-ओ-मौत में क्या क्या नहीं हुआ
गुज़रा है दर्द हद से पे चारा नहीं हुआ
- अजय सहाब



जंग-ओ-जदल के वास्ते आख़िर बड़े क्यूँ आ गए
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल था झगड़ा कोई झगड़ा हुआ
- सय्यद अमीन अशरफ़



जंग-जू मारकों में हुए सुर्ख़-रू
बस्तियाँ बैन करती हैं तन्हा बहुत
- असअद बदायुनी



जंग-जू वो मिलाप में भी रहे
मुझ से आँखें लड़ाए बैठे हैं
- अनवर देहलवी



जंगो जदल की गुफ़्तगू गैज़ो ग़ज़ब की बात
अब हो गई हमारे लिये रोज़ ओ शब की बात
- शाहिद जमाल



जंगो- जदल के हम तो सदा से ख़िलाफ़ हैं
इस फ़लसफ़े को अहले-हरम मानते नहीं
- जावेद क़मर फ़िरोज़ाबादी



जकड़ के साँसों में तश्हीर हो रही है मिरी
मैं एक क़ैद सिपाही हूँ जंग हारा हुआ
- अमीर इमाम



ज़ख़्म-ए-दिल-ए-बेताब है हाथों में निवाला
इस बात पे दुनिया से मिरी जंग नहीं क्या
- बाक़ी सिद्दीक़ी



जब भी करोगे हक़ को मिटाने की जुस्तुजू
मीनारों मस्जिदों की रहेगी कलस से जंग
- शाह रूम ख़ान वली



जब भी तलवार उठाता हूँ कि छेड़ूँ कोई जंग
ऐसा लगता है कि हर शाने पे सर मेरा है
- मेराज फ़ैज़ाबादी



ज़माना गुज़रा है लहरों से जंग करते हुए
कभी तो पार लगूँ डूबते उभरते हुए
- राशिद अनवर राशिद



ज़माना गो मुझे माइल-ब-जंग करता है
मगर ये तेग़-ओ-सिनान-ओ-सिपर नहीं देता
- सज्जाद हैदर



ज़माने भर के अँधेरों से जंग होती है
मैं रौशनी के लिए जब दिया बनाता हूँ
- यशब तमन्ना



ज़मीर ओ ज़ेहन में इक सर्द जंग जारी है
किसे शिकस्त दूँ और किस पे फ़त्ह पाऊँ मैं
- कबीर अजमल



जहाँ पर युद्ध में शामिल थे सारे
वहाँ तुम को भी घबराना नहीं था
- डॉ राकेश जोशी



जहाँ में अम्न हो क्यूँ-कर कि हर सू
बपा जंग-ए-बक़ा-ए-बेहतरीं है
- मेला राम वफ़ा



जारी है एक तीरगी-ओ-रौशनी की जंग
जब से शुऊर-ए-सिलसिला-ए-रोज़-ओ-शब हुआ
- लैस क़ुरैशी



ज़ालिम नहीं तू हर्फ़-ए-मोहब्बत से आश्ना
मश्क़-ए-सितम से शर्म कर ऐ जंग-जू क़लम
- शाह नसीर



ज़िंदगानी है जंग का मैदान
बस यहाँ आर-पार बन के रहो
- अन्दाज़ अमरोहवी



ज़िंदगी जंग है आसाब की और ये भी सुनो
इश्क़ आसाब को मज़बूत बना देता है
- तैमूर हसन



ज़िंदगी बच निकलती है हर जंग में वक़्त के वार से
फिर टपकता है इक बार लम्हों का ख़ूँ साँस की धार से
- शनावर इस्हाक़



ज़िंदगी यूँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे कोई जंग हारी जा रही है
- अज़्म शाकरी



ज़िंदगी से जो जंग हारा था
सब ग़ुरूर उस का पारा-पारा था
- ज़ाहिद कोंचवी



ज़िंदगी है नाम जोहद ओ जंग का
मौत क्या है भूल जाना चाहिए
- जिगर मुरादाबादी



ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा
जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते
- मेराज फ़ैज़ाबादी



ज़िक्र कर यारों में मोहब्बत का
जंग की इफ़्तिताह कर आया
- जय राज सिंह झाला



जिन में जंग-ओ-जदल के क़िस्से हों
वो कुतुब क्यों पढ़ा करे कोई
- कैफ़ अहमद सिद्दीकी



जिस का तरीक़-ए-जंग ही शब-ख़ूँ रहा शकील
मैं ऐसे हादसात के लश्कर में क़ैद था
- सय्यद शकील दस्नवी



जिसके खातिर हमने मोल ली जमाने की रंजिशें
इल्जाम लगाकर मैदान-ए-जंग से किनारा कर गया
- मोबिन गाज़ी कास्तवी



जीत जाती है कोई भी जंग ये शाबान पर
जिंदगी लाचार होती है क़ज़ा के सामने
- शाबान अली



जीतता जा रहा हूँ इश्क़ का खेल
हारता जा रहा हूँ ज़ीस्त की जंग
- ज़ियाउल हसन



जीने का कुछ उसूल न मरने का ढंग है
हर छोटी-छोटी बात पे आपस में जंग है
- रऊफ़ रहीम



जीने का यह हुनर भी आज़माना चाहिए,
भाइयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए।
- जौहर कानपुरी



जुज़ कुश्त-ओ-ख़ून बे-गुनहाँ आस्तीं से तू
बाहर निकालता है कब ऐ ख़ाना-जंग दस्त
- बक़ा उल्लाह बक़ा



जुनून-ए-इश्क़ के लश्कर से हार जाएगी
सिपाह-ए-होश-ओ-ख़िरद लाख जंग-जू ही सही
- सबा नक़वी



ज़ुल्मतों से जंग अपना काम बन कर रह गई
ये इबादत शग़्ल-ए-सुब्ह-ओ-शाम बन कर रह गई
- कनीज़ फ़ातिमा किरण



जूझ मरो यारों दुश्मन से जंग ये आर पार करो
करना है कुछ करो अभी वक्त न यूं बेकार करो
- कपिल कुमार बेल्जियम



ज़ेहन और दिल में अजब जंग हुई है इस बार
ज़िंदगी मोम से फिर संग हुई है इस बार
- वासिफ़ फ़ारूक़ी



ज़ेहन और दिल में छेड़ गया कोई सर्द जंग
इक सैल-ए-कश्मकश के मुक़ाबिल खड़ा हूँ मैं
- रूही कंजाही



ज़ेहन और दिल में जंग जारी थी
जाग कर मैं ने शब गुज़ारी थी
- अल्का मिश्रा



ज़ेहन-ओ-दिल में है जंग या कुछ और
हो रहा हूँ मलंग या कुछ और
- इफ़्तिख़ार राग़िब



ज़ेहनों की कहीं जंग कहीं ज़ात का टकराव
इन सब का सबब एक मफ़ादात का टकराव
- ज़फ़र गोरखपुरी



जो जंग के मैदाँ को इक खेल समझता था
हारे हुए लश्कर को देखा तो बहुत रोया
- रईस अंसारी



जो जंग छिड़ी थी उसे जीते भी हमीं लोग
रन छोड़ के भागे वो सिपाही भी हमीं थे
- नसीम सिद्दीक़ी



जो जहाँ हो उसको हासिल हो वहाँ ज़ेहनी सुकून
दूर हो जाए जहाँ से बुग्ज़, नफरत और जंग
- अहमद अली बर्क़ी आज़मी



जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुल्ह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
- लाला माधव राम जौहर



जो मुझ को झोंक के भागे हैं जंग में तन्हा
हैं मेरे बाद ख़िलाफ़त सँभालने वाले
- आफ़ताब नवाब



ज़ोर पर है ज़ोहद के पर्दे में जंग-ए-ज़र-गरी
शो'बदा-बाज़ी वही है सादा ईमानों के साथ
- मंज़ूर अहमद मंज़ूर



ज़ोर यारो आज हम ने फ़तह की जंग-ए-फ़लक
यक तमांचे में कबूदी कर दिया रंग-ए-फ़लक
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम



जोशिश उस अरबदा-जू तुर्क-ए-सितम-गार ने आज
आश्ती की है बड़ी जंग-ओ-जदल से हम से
- जोशिश अज़ीमाबादी



ज़ोहद अगर जंग-आज़मा हो खींचिए शमशीर-ए-शौक़
हुस्न अगर मद्द-ए-मुक़ाबिल हो सिपर रख दीजिए
- सिराजुद्दीन ज़फ़र



टूटते तारे देख कर यूँ लगा
आसमाँ में भी जंग जारी है
- दख़लन भोपाली



ठहर न जाए कहीं आज फिर से नब्ज़-ए-हयात
पिला वो जाम कि जो ख़्वाहिशों में जंग भरे
- अहमद मुशर्रफ़ ख़ावर



ठहरे कब जंग-ए-हुस्न में ये शैख़
एक मुद्दत के ये भगेले हैं
- मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही



तजल्लियों से अँधेरों की जंग जारी है
उजाले सुर्ख़-रू हों ये दुआ हमारी है
- मोहम्मद अज़हर शम्स



तन्हा निहत्ते लड़ते रहे ज़िंदगी की जंग
लश्कर था साथ और न तीर-ओ-कमान थे
- फ़रहान हनीफ़ वारसी



तमाम शहर से मैं जंग जीत सकता हूँ
मगर मैं तुम से बिछड़ते ही हार जाऊँगा
- एजाज़ अंसारी



तलवार का सवाल यही जंग-जू से था
क्यूँ आज तक मियान में रक्खा गया मुझे
- जहाँगीर नायाब



तवहहुमात से इक जंग थी जो जारी रही
सहाब-ए-मर्ग न अब्र-ए-हयात से उलझे
- क़ादिर सिद्दीक़ी



तालिब-ए-सुल्ह हूँ मैं और नज़र तालिब-ए-जंग
रात दिन लड़ने पे तय्यार बड़ी मुश्किल है
- परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़



तितलियाँ ख़ुशबुएँ रंग सब
खा गई इक बला जंग सब
- इशरत आफ़रीं



तिरी तरफ़ से लड़ूँगा मैं तेरी हर इक जंग
रहूँगा साथ मगर हौसला नहीं दूँगा
- लियाक़त जाफ़री



तुझ को असीर गर्दिश-ए-अय्याम ने किया
चोब-ए-क़फ़स से करती है क्यूँ जंग अंदलीब
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी



तुझ से मैं जंग का एलान भी कर ही दूँगा
मेरे दुश्मन तू मिरे क़द के बराबर तो आ
- नदीम गुल्लानी



तुम अगर होते कर्बला वाले
जंग में मात पर नहीं रोते
- फैज़ुल अमीन फ़ैज़



तुम मिरे सामने अब जंग की बातें न करो
न्याम से निकली तो शमशीर लहू मांगेगी
- अख़्तर ग्वालियारी



तुम ये कहते हो वो जंग हो भी चुकी!
जिस में रक्खा नहीं है किसी ने क़दम
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



तुम्हारी जंग इसी सरज़मीं से होना थी
हज़ार हैफ़ मिरी गुल-ज़मीं से होना थी
- अनीसुर्रहमान



तुम्हारी जीत का मतलब है जंग फिर होगी
हमारी हार का मतलब है इंतिशार गया
- हसीब सोज़



तुम्हारी शान में मुझ को क़सीदा पढ़ना है
ख़िलाफ़ अपनी तबीअत के जंग करते हुए
- वसीम अहमद



तुम्हारे नाम पे झगड़ा हो और इस के बाद
हो ऐसी जंग कि जिस में मिरी हलाकत हो
- जहाँज़ेब साहिर



तेग़ शमशीर या ख़ंजर की ज़रूरत क्या है
जंग जब ख़ुद से हो लश्कर की ज़रूरत क्या है
- ज़ोहेब फ़ारूक़ी अफ़रंग



तेग़-ओ-गुलू की जंग में अक्सर
जान से वज़्नी इज़्ज़त ठहरी
- जमील अहमद जमील



तेज़ रखना धार अपने हौसले की हर घड़ी
मुनहसिर है ज़िंदगी की जंग इस शमशीर पर
- अब्दुस सत्तार दानिश



तेरी आँखों पे बात होने लगी
जंग सी छिड़ गई ग़ज़ालों में
- मुक़द्दस मालिक



दर्द के सामने दौलत नहीं देखी जाती
जंग में सिर्फ़ ग़नीमत नहीं देखी जाती
- याह्या ख़ान यूसुफ़ ज़ई



दस्त-ए-तारीख़ से निकलते ही
जंग ज़ेहनों में फैल जाती है
- नसीर अहमद नासिर



दस्ताने में संग है बाबा
फ़र्ज़ानों की जंग है बाबा
- सज्जाद सय्यद



दाग़-ए-इस्याँ इक तरफ़ अश्क-ए-नदामत इक तरफ़
नूह के तूफ़ान से जंग-ए-शरर होने को है
- मुनीर शिकोहाबादी



दामन को तेरे थाम के राहत बड़ी मिली
अब तक मैं अपने आप से मसरूफ़-ए-जंग था
- अमीर हम्ज़ा साक़िब



दिल में इक जंग थी जो जारी रही
कोई तो शख़्स था ख़फ़ा मुझ में
- नीलमा नाहीद दुर्रानी



दिल-ओ-दिमाग़ की इन क़ुर्बतों से लर्ज़ां हूँ
मैं सोचता हूँ कोई आए इन में जंग भरे
- नोमान अनवर



दीन-ओ-दुनिया में रही जंग अंधेरे के सबब
सुब्ह के वक़्त मगर मेरी तरफ़ मेरा था
- सौलत ज़ैदी



दुनिया की हर जंग वही लड़ जाता है
जिसको अपने आप से लड़ना आता है
- वसीम बरेलवी



दुश्मन है और तरह का जंग और तरह की
आगे बढ़ो न पीछे हटो फ़ासला रखो
- जव्वाद शैख़



दुश्मनों के नर्ग़े में मैं खड़ा हूँ तन्हा सा
मा'रका मोहब्बत का जंग-ए-कर्बला सा है
- ज़फ़र अंसारी ज़फ़र



दूर नई ताक़तों ने जंग लड़ी थी
ख़ौफ़ अभी रूह के जवार में न था
- साक़ी फ़ारुक़ी



देखना सब लोग मुझ को ख़ारिजी ठहराएँगे
कल यहाँ जंग-ए-जमल का मसअला छेड़ूँगा मैं
- अफ़ज़ल ख़ान



देखूँ वो करती है अब के अलम-आराई कि मैं
हारता कौन है इस जंग में तन्हाई कि मैं
- हसन अज़ीज़



देखे कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर के रंग भी
उस फ़ित्ना-ख़ू से प्यार भी है और जंग भी
- आफ़ताब हुसैन



देखे जाते नहीं मुझसे हारे हुए
इसलिए मैं कोई जंग जीता नहीं
- वसीम बरेलवी



देखे जाते हैं फ़क़त फ़त्ह-ए-मुबीं के सपने
जंग में कटते हुए सर नहीं देखे जाते
- बिलाल राज़



दोनों के दस्त-ओ-बाज़ू इक दूसरे पे उट्ठे
जंग-ओ-जिदाल कैसी हैहात चल रही है
- अनीसुर्रहमान



दोनों के दिल में ख़ौफ़ था मैदान-ए-जंग में
दोनों का ख़ौफ़ फ़ासला था दरमियान का
- मोहम्मद अल्वी



दोनों लड़ते हैं जीतने के लिए,
जंग दोनों ही हार जाते हैं।
- एहतराम इस्लाम



दोस्त दुश्मन हैं सभी वज़्अ पे क़ाएम राहत
क्या कहूँ जीत के मैं जंग कहाँ से आया
- राहत हसन



दोस्तो जंग भी लाज़िम है हरीफ़ों से मगर
परचम-ए-अमन भी हाथों में उठाए रखना
- सय्यद शीबान क़ादरी



दौरान-ए-जंग हिम्मत-ए-मर्दाना चाहिए
हिम्मत अगर नहीं है तो मर जाना चाहिए
- रहबर ताबानी दरियाबादी



धुआँ धुआँ है नज़र गर्द गर्द है मंज़र
दरून-ए-ख़ाना कोई मुझ में जंग जारी है
- तारा इक़बाल



न तेरे चाहने वालों में हो ये जंग-ओ-जदल
इशारा गर न तिरी चश्म-ए-फ़ित्ना-साज़ करे
- ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर



न बात दिल की सुनूँ मैं न दिल सुने मेरी
ये सर्द जंग है अपने ही इक मुशीर के साथ
- फ़हीम जोगापुरी



नए ग़मों के अँधेरों से जंग है उस की
बुझे दियों की जवानी तलाश करता है
- चाँद अकबराबादी



नक़ीब-ए-अम्न रहा मैं महाज़-ए-जंग पे भी
यही उसूल मिरी फ़तह का सबब ठहरा
- नाज़ क़ादरी



नज़दीकी ओ दूरी की कशाकश को मिटा दे
इस जंग में तू सुल्ह के परचम की तरह आ
- फ़ना निज़ामी कानपुरी



न-जाने कितने लहजे और कितने रंग बदलेगा
वो अपने हक़ में ही सारे उसूल-ए-जंग बदलेगा
- फ़ारूक़ अंजुम



नये तरीक़े से मैंने ये जंग जीती है
कमान फेंक दी तरकश में तीर होते हुए
- मुनव्वर राना



नव्वाब-ए-नाम-दार ज़फ़र-जंग के हुज़ूर
गाती है आ के ज़ोहरा-ए-गर्दूं-मकाँ बसंत
- मुनीर शिकोहाबादी



नशा अजीब है इस जंग-ए-बे-समर का मुझे
ख़ुमार ख़ूब है ख़ून-ए-ख़िरद बहाने का
- तनवीर अंजुम



नस्लें तबाह होंगी क़बीलों की जंग में
जा बढ़ के अपने बाप से तलवार छीन ले
- सलीम अंसारी



नहा उठेंगे अभी लोग बे-सबब ख़ूँ में
ये जंग सिर्फ़ हमारे ही एक सर की है
- नवाब अहसन



नहीं मरूँगा किसी जंग में ये सोच लिया
मैं अब की बार मोहब्बत में मारा जाऊँगा
- राणा सईद दोशी



नावक-ए-ताज़ा दिल पर मारा जंग पुरानी जारी की
आज हवा ने ज़ख़्म-ए-कुहन में डूब के ताज़ा-कारी की
- अज़ीज़ हामिद मदनी



नित जंग में है सुल्ह तो नित सुल्ह में है जंग
सुल्ह का मज़ा हम ने तिरी जंग में देखा
- सय्यद अली नज़र



निशाना तीर-ए-निगह का ब-दिल करूँ आरिफ़
लड़ाए आँख अगर मुझ से जंग-जू मेरा
- ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़



नींद क्या कीजिए कि आँखों में
इक नई जंग ख़ैर ओ शर की है
- रसा चुग़ताई



नुमू की ख़ाक से उट्ठेगा फिर लहू मेरा
अक़ब से वार करे चाहे जंग-जू मेरा
- आसिफ़ साक़िब



पता है ज़िन्दगी इक जंग है फिर
जरूरी है कि लाचारी से बचिये
- सौमेन्दु वर्धन मालवीय



परचम-ए-जंग झुक गया लेकिन
वसवसा सा दिलों में रहता है
- शाइस्ता यूसुफ़



परछाइयों की जंग थी ख़ूँ का दरिया
हम-ज़ाद रजज़-ख़्वाँ हुआ ऐसा न कभी
- इक़बाल ख़ुसरो क़ादरी



पागलों जंग बगूलों से छिड़ी थी और तुम
अपने तन पर ख़स-ओ-ख़ाशाक पहन कर पहुँचे
- नितिन नायाब



प्यार से उस ने बनाई है ये प्यारी दुनिया
क्यों ये इंसान मगर जंग किए रहता है
- रिंकी सिंह साहिबा



फ़तह खुद मरहम लगाएगी हमें
जंग में क्या घाव देखा जाएगा
- महशर अफ़रीदी



फ़त्ह का एलान मत करना ऐ ज़ालिम तब तलक
जब तलक इक जंग-जू मैदान में मौजूद है
- शादाब अंजुम



फ़त्ह भी इक शिकस्त ही होगी
आरज़ूओं से महव-ए-जंग हूँ मैं
- सहर अंसारी



फ़लक पे रेंगते सूरज ज़मीन-बोस हुए
वो शहसवार-ए-शफ़क़ बहर-ए-जंग आ गया था
- ओसामा ज़ाकिर



फ़िक्र-ओ-नज़र की जंग है ख़ुद सर के सामने
इक सब्ज़ इंक़लाब है पत्थर के सामने
- बिसमिल आज़मी



फिर अगली जंग लड़ना मगर इस शिकस्त में
ये सोचना पड़ेगा कहाँ क्या कमी रही
- सौलत ज़ैदी



फिर उस के बाद हवाओं से जंग करता रहा
दिया जला था बड़ी आन-बान से पहले
- ताजदार आदिल



फिर एक बार किसी जंग पर निकलते हुए
फ़ज़ा-ए-क़र्या-ए-अम्न-ओ-अमान ओढ़ के देख
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



फिर ख़ौफ़ का इक रंग यहाँ भी है वहाँ भी
दरपेश कोई जंग यहाँ भी है वहाँ भी
- फ़राग़ रोहवी



फिर दरमियान-ए-अक़्ल-ओ-जुनूँ जंग छिड़ गई
फिर मजमा-ए-ख़वास गिरोहों में बट गया
- शकेब जलाली



फिर बहार आई जो बाहम मुस्तइद्द-ए-जंग हैं
यक तरफ़ दस्त-ए-जुनूँ जैब-ओ-गरेबाँ यक तरफ़
- मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार



फिरती है यूँ निगाहें उस शोख़ जंग-जू की
पामाल कर के जैसे कोई सिपाह उल्टे
- सनाउल्लाह फ़िराक़



फिल्मों में जंग देखी है इस नस्ल ने अभी
सचमुच में देख लेने दो इक बार चुप रहो ।
- अमीर इमाम



फूल गालों को तो आँखों को कँवल कहता रहा
जंग थी बाहर गली में मैं ग़ज़ल कहता रहा
- इफ़्तिख़ार नसीम



फैंसला जो कुछ भी हो, मंजूर होना चाहिए,
इश्क हो या जंग हो, भरपूर होना चाहिए,
- राहत इंदौरी



बक़ा के वास्ते सदियों से जंग जारी है
फ़ना के शोर-शराबे से नाक में दम है
- अरशद लतीफ़



ब-ज़ाहिर जंग होगी हादसों की
अगर मैं बीच में से हट गया तो
- सावन शुक्ला



ब-जुज़ इक जंग के फिर जीतने को क्या रहेगा
जुनून-ए-जंग में ईमान हारे जा रहे हैं
- कुलदीप कुमार



बदल चुके थे क़वानीन-ए-जंग सो मैं ने
दिया बुझा के अंधेरे से इंतिक़ाम लिया
- सय्यद क़ैस रज़ा



बम नही मरते,तोपें नही मरतीं
गोलियां नही मरतीं,बंदूकें नही मरतीं
मरते बस इंसान हैं

जंग के बाद का नुकसान
कोई फरिश्ता नही भरता
भरते बस इंसान हैं
- मारूफ आलम



बर-सर-ए-जंग हैं अनवार से ज़ुल्मात के देव
चाँद रातों के अँधेरे में कहीं डूब न जाए
- सय्यद एहतिशाम हुसैन



बस एक जान बची है सो तुझ पे वारेंगे
हम एक जंग तुझे जीतने में हारेंगे
- विक्रम गौर वैरागी



बस ख़ामुशी से जंग लड़े जा रहे थे हम
वो लड़ रहे थे लफ़्ज़ की तलवार खींच कर
- ग़ज़ला तबस्सुम



बहर-ए-ज़ीनत दामन-ए-शमशीर में ओ जंग-जू
मेरी गर्दन का तुझे पट्ठा लगाना चाहिए
- अरशद अली ख़ान क़लक़



बहुत दिन से वतन में इक महाज़-ए-जंग क़ाएम है
कहीं है धर्म को ख़तरा कहीं ईमान को ख़तरा
- अहमक़ फफूँदवी



बहुत से शेर सुनाए हैं गुनगुना के मगर
ये जंग जीती नहीं जा रही तरानों से
- अम्न शहजादी



बाहर न आए हम भी अना के हिसार से
इस जंग में तुम्हारे बराबर रहे हैं हम
- फ़हीम जोगापुरी



बिखेरती है शब मुझे समेट लेती है सहर
मैं चाहता हूँ ख़त्म हो ये जंग बार बार की
- इमरान बदायूनी



बिन लड़े जंग हारने वाले
तेरा दुश्मन तिरी सिपाह में है
- नक़्क़ाश अली बलूच



बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी
अटक गई है सितारे में इक पतंग मिरी
- दानियाल तरीर



बुतों को फ़ाएदा क्या है जो हम से जंग करते हैं
ख़फ़ा जो ज़िंदगी से हूँ उन्हें क्यूँ तंग करते हैं
- रज़ा अज़ीमाबादी



बुराई से बुरों से जंग मेरी
मैं शायद इसलिए अच्छा नहीं हूँ
- नूर मोहम्मद नूर



बे-नतीजा बे-समर जंग-ओ-जदल सूद ओ ज़ियाँ
सारी जीतें एक जैसी सारी मातें एक सी
- मुनीर नियाज़ी



बे-मुरव्वत बेवफ़ा बेदर्द बे-परवा ख़िराम
जंग-जू क़त्ताल-वज़ ओ सरफ़राज़ ओ सर-फ़गन
- नज़ीर अकबराबादी



भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा
- सरवत हुसैन



भरोसा क़ुव्वत-ए-बाज़ू पे अपनी जो नहीं करता
महाज़-ए-जंग में उस के लिए लश्कर ज़रूरी है
- सईद रहमानी



मअरका ख़त्म हुआ जंग अभी जारी है
दिल की मानें कि ख़िरद की यही दुश्वारी है
- कान्ती मोहन सोज़



मक़्सद ये क्या नहीं है कि दुश्मन को हो शिकस्त
ये जंग हो रही है कोई दोस्ताना क्या
- मोहसिन ज़ैदी



मग़रिब में उस को जंग है क्या जाने किस के साथ
सूरज चला है बाँध के तेग़ ओ सिपर कहाँ
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी



मज़ा जब है आपस में कुछ जंग भी हो मज़ा जंग में जब है कुछ सुल्ह भी हो
दिखा दे तलव्वुन का अपने तमाशा इधर लड़ उधर मिल इधर मिल उधर लड़
- नूह नारवी



मसरूफ़ अपनी जंग में रहना सदा मगर
नज़रें उठा के तुम कभी ऊपर न देखना
- विश्मा ख़ान विश्मा



महबूब और जहान के ज़ख़्मों में जंग है
इस सानेहा से दाग़ का चेहरा उदास है
- प्रणव मिश्र तेजस



महाज़-ए-इश्क़ पे क़ुर्बत की जंग लड़ते हुए
मैं फुर्क़तों के मुमासिल विसाल रखती हूँ
- निगहत नसीम



महाज़-ए-जंग पे खिलते नहीं हैं हाथ मिरे
मैं क्या करूँ कि मुक़ाबिल मिरा अदू तू है
- आसिम वास्ती



महाज़-ए-जंग पे तेरी शिकस्त आख़िर है
हिसार कर ले ख़ुद अपना तमाम लश्कर खींच
- फ़रहत नादिर रिज़्वी



महाज़-ए-जंग में पहले हरीफ़ तय तो हों
लगाम थामे हुए शहसवार चीख़ता है
- अखिलेश तिवारी



महाज़-ए-जंग में वो अपने फ़र्ज़ की ख़ातिर
न देता जान तो आख़िर पियादा क्या करता
- याक़ूब आरिफ़



महाजे़-जंग पर अक्सर बहुत कुछ खोना पड़ता है
किसी पत्थर से टकराने को पत्थर होना पड़ता है
- अकील नोमानी



माज़ी में तुम जीत गए मुझ से बेताब
मुस्तक़बिल की जंग अभी तक जारी है
- प्रीतपाल सिंह बेताब



मिज़ाज-ए-दहर है गोया मिज़ाज औरत का
अभी है अम्न भी जंग-ओ-जिदाल क्या कहिए
- मोहन सिंह ओबेरॉय दीवाना



मियान-ए-जंग मुसलसल कमान खींच के रख
गुहर हर एक शनावर का ध्यान खींच के रख
- शब्बीर एहराम



मिरे अंदर पयम्बर अम्न का रहता है शौकत
वही दुनिया के शोर-ए-जंग में महव-ए-सुख़न है
- शौकत हाशमी



मिरे सीने से तेरा तीर जब ऐ जंग-जू निकला
दहान-ए-ज़ख़्म से ख़ूँ हो के हर्फ़-ए-आरज़ू निकला
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़



मिरे हरीफ़ मिरी यक्का-ताज़ियों पे निसार
तमाम उम्र हलीफ़ों से जंग की मैं ने
- जौन एलिया



मिलेगी फ़त्ह या शिकस्त वक़्त ही बताएगा
मैं लड़ रहा हूँ ज़िंदगी से जंग आर-पार की
- पवन कुमार



मिस्मार अजाइब जो हुआ जंग-ओ-जदल से
मिट्टी के ज़रूफ़ आ गए मीनों से निकल कर
- अफ़ज़ाल नवेद



मुक़ाबिल-ए-सफ़-ए-आदा जिसे किया आग़ाज़
वो जंग अपने ही दिल में तमाम होती रही
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़



मुजादिला ही ज़रूरी है तो चमन का नाम
बहार जंग का मैदान क्यूँ नहीं रखती
- ख़ालिद इबादी



मुझ बे-गुनह के क़त्ल का आहंग कब तलक
आ अब बिना-ए-सुल्ह रखें जंग कब तलक
- क़ाएम चाँदपुरी



मुझ से इक जंग जीतनी थी उसे
सो लगी मेरी हार की क़ीमत
- विवेक बिजनौरी



मुझ से भी बरसर-ए-पैकार है क़िस्मत मेरी
देखना जंग का नक़्शा है तो आ देख मुझे
- ज़ाहिदा ख़ातून शरवानिया



मुद्दत से फिर रहा हूँ ख़ुद अपनी तलाश में
हर लम्हा लड़ रहा हूँ ख़ुद अपने ख़िलाफ़ जंग
- बशर नवाज़



मुल्ला बना दिया है इसे भी महाज़-ए-जंग
इक सुल्ह का पयाम थी उर्दू ज़बाँ कभी
- आनंद नारायण मुल्ला



मुसलसल चीख़ता रहता है हम ये जंग जीतेंगे
जो हर लम्हा शिकस्त-ए-फ़ाश का एहसास रखता है
- मोहम्मद अब्दुल कबीर हनफ़ी



मुसलसल जंग हारे जा रहा हूं
मगर शबख़ून मारे जा रहा हूं
- जावेद अकरम



मुस्कुराता है ब-सद-नाज़ तू दिल ही दिल में
हम सा करता है कोई नाम पे जब जंग तिरे
- अली रज़ा असीर



मुहरा सियासतों का मिरा नाम आदमी
मेरा वजूद क्या है ख़लाओं की जंग हूँ
- सूर्यभानु गुप्त



मेरे अंदर ही कोई जंग छड़ी है शायद
मेरे अंदर ही कोई दश्त-ए-बला रहता है
- मुईद रशीदी



मेरे तो सिर्फ पाँव ही उखड़े है जंग में
दुश्मन की देखो सांस उखड़ तो नही गयी
- सलीम सिद्दीक़ी



मेरे दुश्मन के क़ल्ब में फ़िल-वक़्त
जंग का हौसला नहीं बाक़ी
- सिया सचदेव



मैं अपनी जंग में तन-ए-तन्हा शरीक था
दुश्मन के साथ सारा ज़माना शरीक था
- आलमताब तिश्ना



मैं अपनी जंग में नाकाम हो नहीं सकता
मिरे ख़याल की ताक़त है और अकेला मैं
- शौकत हाशमी



मैं अपने आप लड़ूँगा समुंदरों से जंग
अब ए'तिमाद मुझे अपने नाख़ुदा पे नहीं
- मुबीन मिर्ज़ा



मैं अपने आप से ही जंग करता रहता हूँ
कि मुझ पे होता नहीं अब मिरा उदू रौशन
- सुल्तान अख़्तर



मैं अभी इश्क़ नहीं हालत-ए-ईमान में हूँ
जंग करते हुए अस्बाब नहीं भूलता मैं
- नदीम भाभा



मैं अहल-ए-दुनिया से मसरूफ़-ए-जंग हो जाऊँ
कि पिछली रात मिला है मुझे इशारा-ए-ख़्वाब
- सालिम सलीम



मैं एक जंग ख़ुद अपने ख़िलाफ़ लड़ता हुआ
तमाम अज़्व-ए-बदन मुझ से घात करते हुए
- ख़ुर्शीद तलब



मैं ऐसी जंग में हूँ एक ऐसी जंग जहाँ
मिरा ख़ुलूस ही मेरे ख़िलाफ़ लड़ता है
- दिनेश कुमार द्रौण



मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ
मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है
- वसीम बरेलवी



मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ
मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है
कोई बताये ये उसके ग़ुरूर-ए-बेजा को
वो जंग हमने लड़ी ही नहीं जो हारी है
- वसीम बरेलवी



मैं क़तरा हो के भी तूफ़ाँ से जंग लेता हूँ
मुझे बचाना समुंदर की ज़िम्मेदारी है
- वसीम बरेलवी



मैं कभी इश्क़ में पसपा नहीं होने वाला
जंग हारूँ भी तो साबित-क़दमी रहती है
- नूर अमरोहवी



मैं किस लिए फ़सील-ए-बदन में छुपा रहूँ
मेरी किसी के साथ कोई जंग तो नहीं
- हफ़ीज़ शाहिद



मैं ख़ाली मैदान-ए-जंग
हाथ उस के तलवार मिरी
- फ़रहत एहसास



मैं ख़ुद से जंग में हारा हुआ सिपाही हूँ
कि जिस का राब्ता नंबर अता-पता दुख है
- ओसामा ख़ालिद



मैं जंग जीत के जब्र-ओ-अना की हार गया
अदू पे रहम का एहसास मुझ को मार गया
- रासिख़ इरफ़ानी



मैं तो पोरस की तरह जंग लड़ा और हारा
तू बिना जंग ही बन बैठा सिकंदर साईं
- नज़र सिद्दीक़ी



मैं दुश्मनों से अगर जंग जीत भी जाऊँ
तो उन की औरतें क़ैदी नहीं बनाऊँगा
- तहज़ीब हाफ़ी



मैं ने उस को पिछाड़ना है मियाँ
मेरी साए से जंग जारी है
- तौसीफ ताबिश



मैं शिकस्ता हूँ इधर तू भी शिकस्ता है उधर
जंग में कोई ज़फ़र-याब नज़र तो आए
- आलम ख़ुर्शीद



मैं सर्द जंग की आदत न डाल पाऊँगा
कोई महाज़ पे वापस बुला रहा है मुझे
- आशुफ़्ता चंगेज़ी



मैं सोचता रहता हूँ इसी बाब में यारो
रोने लगा जंग जीत के सरदार मगर क्यों
- मजाज़ अमरोहवी



मैदान-ए-जंग आने से पहले पलट गए
निकले थे ले के हाथ में तलवार सब के सब
- असअद बदायुनी



मैदान-ए-जंग में मत देख दोस्त दुश्मन,
ये देख हुकूमत किसकी है मरता कौन है
- शाहरुख मोईन



मोहब्बत जंग थी महँगी पड़ी है
हुई तक़्सीम मैं तावान हो कर
- फ़रह शाहिद



यक़ीन और गुमाँ की जंग से गुरेज़ था नहीं
जो फ़ैसला किया है उस से इंहिराफ़ क्या करें
- हुमैरा रहमान



यज़ीद मोरचा जीता था जंग हारा था
ये सच रगों में मिरे इंक़लाब भरता है
- सय्यद इक़बाल रिज़वी शारिब



यतीमी-ओ-ला-वारसी बेवगी के
ब-जुज़ कुछ न हासिल है जंग-ओ-जदल से
- दीपक पुरोहित



यहाँ सियासत-ओ-मज़हब पे जंग होगी फ़क़त
मिरी ज़मीन पे अब शाइरी नहीं होगी
- मीसम अब्बास



यही सिखाया है हम को हमारे लोगों ने
जो जंग जीते वो तलवार अपनी होती है
- अज़लान शाह



याद कर लेना बहत्तर की कहानी बाक़ी
जंग छिड़ जाए किसी वक़्त अगर पानी की
- बाक़ी अहमदपुरी



यारो अना की जंग में अक्सर यही हुआ
वो हारता गया है हराते हुए मुझे
- कुलदीप कुमार



युद्ध और प्यार में
सब कुछ को
जायज़ मानने वाले
किसी नियम या नैतिकता के ग़ुलाम नहीं हैं
हारी हुई लड़ाई लड़ने वालों के लिए
नियम है
नैतिकता है विधान है
- सदानंद शाही



युद्ध और प्यार में
सब कुछ को
जायज़ मानने वाले
किसी नियम या नैतिकता के ग़ुलाम नहीं हैं

हारी हुई लड़ाई लड़ने वालों के लिए
नियम है
नैतिकता है विधान है
- सदानंद शाही



यूँ उस की शुजाअत हुई मश्कूक पस-ए-जंग
तन्हा वो सिपाही था जो घाएल न हुआ था
- नूर मोहम्मद यास



यूँ ज़िंदगी की जंग को लड़ता रहा चराग़
आँखों में रात भर बुझा बुझ कर जला चराग़
- इमरान महमूद मानी



यूँ बा-ए-फ़त्ह नहीं रहना ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में
महाज़-ए-जंग में पसपाइयाँ भी होती हैं
- जावेद अख़्तर आज़ाद



यूँ मुझे आप से अब करती है तक़दीर जुदा
जिस तरह जंग में हो क़ब्ज़े से शमशीर जुदा
- इमाम बख़्श नासिख़



यूँ ही जंग कभी जीती नहीं जा सकती
क़दम अपना मैदान में रखना पड़ता है
- परवेज़ साहिर



ये अगर जंग-ए-मोहब्बत है मिरे यार तो फिर
ऐसा करता हूँ कि मैं मात उठा लेता हूँ
- अहमद कामरान



ये और बात एक सितारे से जंग है
बस जंग है जिहाद-ए-मुसलसल न कर उसे
- साक़ी फ़ारुक़ी



ये खुली जंग है और जंग भी है अपने ख़िलाफ़
इस लिए अपने तरफ़-दार उठाने लगा हूँ
- अहमद कामरान



ये चंद दिन में क़यामत गुज़र गई कैसी
कि आज सुल्ह तिरी जंग लग रही है मुझे
- शहरयार



ये जंग अजब जंग है लड़ना न कभी भी
इस इश्क़ के मैदाँ में जिएँगे न मरेंगे
- ख़लील हुसैन बलूच



ये जंग अब कहाँ हो बदन में कि रूह में
गोया कि इश्क़ का कोई मैदान ही नहीं
- फ़रहत एहसास



ये जंग जीत है किस की ये हार किस की है
ये फ़ैसला मिरी टूटी कमान से होगा
- तैमूर हसन



ये जंग वक़्त की तहज़ीब को कुचल देगी
ये जंग अम्न के फूलों को भी मसल देगी
- सिया सचदेव



ये जंग वो है कि अब ख़ुद भी हारना चाहूँ
मगर मैं इस के लिए भी तिरी रज़ा चाहूँ
- इशरत आफ़रीं



ये जंग होगी तमाम ग़ाज़ी शहीद होंगे
किसी को मैदाँ से लौट जाना नहीं पड़ेगा
- साबिर अमानी



ये जब से रात बुज़दिल हो गई है
दिए की जंग मुश्किल हो गई है
- भव्य सोनी



ये जो जंग है किसी और वक़्त पे टाल दें
सफ़-ए-दोस्ताँ सफ़-ए-दुश्मनाँ मैं उदास हूँ
- अरशद अब्बास ज़की



ये जो मुझ से और जुनूँ से याँ बड़ी जंग होती है देर से
सो कुछ ऐसी ढब से लड़ाई है लड़े शेर जैसे कि शेर से
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा



ये तबस्सुम ही है मेरा अस्लहा सब से बड़ा
जीतना मुमकिन नहीं हर जंग बस शमशीर से
- अनुकृति तबस्सुम



ये तुम ने जंग का उनवान ही बदल डाला
अलम सजाया न लश्कर कोई रवाना किया
- हुसैन ताज रिज़वी



ये पहली बार कोई जंग रास आई मुझे
मैं इस तक आ गया दुश्मन शुमार होता हुआ
- ओसामा ख़ालिद



ये मेरे बाज़ू ही जंग का फ़ैसला करेंगे
पकड़ ले तलवार और मुझ को पछाड़ ऐसे
- आमिर अमीर



ये लोग जंग की बातें नहीं करेंगे अगर
गली में खेलता बच्चा समझ में आ जाए
- नदीम भाभा



ये शोर तुम्हें जंग में जाने नहीं देगा .
पाज़ेब की झंकार को सूली पे चढ़ा दो...
- लकी फ़ारुक़ी हसरत



ये सर-ए-इश्क़ हो गई वर्ना
क्या कोई जंग चाहते थे हम
- कुलदीप कुमार



रक़ीब से तिरी परख़ाश देख कर ऐ शोख़
वही हो ख़ुश जो न ये जंग-ए-ज़रगरी जाने
- फ़ख़रुद्दीन ख़ाँ माहिर



रखता है सुल्ह सब से दिल उस का प मुझ से जंग
ग़ैरों के हक़ में मोम है और मेरे हक़ में संग
- मीर हसन



रज़ा क्या मिल गए उस जंग-जू से
तुम्हारा आज चेहरा लाल है म्याँ
- रज़ा अज़ीमाबादी



रब ने उसको तो बनाया है मुहब्बत के लिए
ऐसे वो जंग का इज़हार हुआ था कैसे
- कुसुम शर्मा अंतरा



रवाँ था गर्म लहू आहनी परिंदों में
छड़ी थी अम्न-पसंदों में सर्द-जंग अलग
- निज़ामुद्दीन निज़ाम



रसद आती नहीं दानिश कभी जंग-ए-मुक़द्दर में
बशर तन्हा ही लड़ता है कोई लश्कर नहीं होता
- अब्दुस सत्तार दानिश



रस्ते से मिरी जंग भी जारी है अभी तक
और पाँव तले ज़ख़्म की वहशत भी वही है
- यासमीन हमीद



रहा वो शहर में जब तक बड़ा दबंग रहा
मगर ख़ुद अपने ख़िलाफ़ आप महव-ए-जंग रहा
- सलीम शहज़ाद



रहेंगे राह में संग-ए-गिराँ न दीवारें
अमल के जज़्बा को थोड़ा सा जंग-जू तो करो
- रफ़ी बदायूनी



रात के अंधेरों से जंग करने वालों ने
सुब्ह की हथेली पर आफ़्ताब रखना है
- सरवर अरमान



रात से जंग कोई खेल नईं
तुम चराग़ों में इतना तेल नईं
- अम्मार इक़बाल



रोज़ मैदान-ए-जंग बनता हूँ
मुझ में आबाद हैं क़बाइल क्या
- मुनीर सैफ़ी



रौशनी की जंग में तारीकियाँ पैदा हुईं
चाँद पागल हो गया तारे भिकारी हो गए
- राहत इंदौरी



लख़्त-लख़्त आवाज़ें फ़र्द फ़र्द पहचानें
शोर शोर ख़ामोशी वज्ह-ए-जंग आईना
- परवेज़ रहमानी



लग़ज़िशें करती रही उम्रे-रवां शान के साथ,
जंग जारी रही इब्लीस की ईमान के साथ
- एजाज़ उल हक़ शिहाब



लड़ रहे हैं जंग सब, अब देखना,
किसमें दम कितना रहा है आजकल
- जावेद जहद



लड़ने को दिल जो चाहे तो आँखें लड़ाइए
हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो
- लाला माधव राम जौहर



लड़ाई हम को विरासत में दी गई है हुज़ूर
हम अहल-ए-जंग कहाँ शाइ'री के क़ाबिल हैं
- सबाहत उरूज



लब पे आवाज़-ए-हक़ रहे क़ाएम
जंग जीतो कि हार कर देखो
- नासिर शहज़ाद



लबों पे अम्न के नग़्मे दिलों में जंग की आग
शिकस्त-ए-अज़्म ब-नाम-ए-सिपाह लिख लीजे
- बेकल उत्साही



ले चुके दिल तो जंग क्या है अब
आ मिलो फिर दरंग क्या है अब
- मीर मोहम्मदी बेदार



वक़ार-ए-ख़ून-ए-शहीदान-ए-कर्बला की क़सम
यज़ीद मोरचा जीता है जंग हारा है
- मोहम्मद अली जौहर



वक़्त मिलता ही नहीं है मुझे तन्हाई से
जंग ख़ुद से ही मिरी आज तलक जारी है
- अमित शर्मा मीत



वफ़ा की जंग में दोनों का इश्तिराक हुआ
कोई शहीद हुआ और कोई हलाक हुआ
- तस्लीम नियाज़ी



वह बादशाह भी साँसों की जंग हार गये
जो अपने गिर्द हमेशा सिपाह रखते थे
- अनवर जलालपुरी



वो अकेला हज़ारों से लड़ता रहा
जंग होती रही रात भर सामने
- नसीम अजमल



वो अकेला है और उस के चाहने वाले बहुत
जंग होने जा रही है आशिक़ों के दरमियाँ
- हमज़ा दाइम



वो अब जंग-ओ-जदल कुछ भी नहीं है
नहीं दश्त-ओ-जबल कुछ भी नहीं है
- इम्तियाज़ दानिश नदवी



वो एक था जो मुझे चार-सू दिखाई दिया
मैं जंग हार गया हूँ कि दाव ऐसा था
- दानियाल तरीर



वो क्यूँ कहेंगे कि दोनों में अम्न हो जाए
हमारी जंग से जिन की कमाई जारी है
- अली ज़रयून



वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
मुझे वो जीत भी 'अम्बर' न होगी हार से कम
- अंबरीन हसीब अंबर



वो जंग जीत के ऊँटों का रुख़ बदलने लगे
अभी तो उन की मचानों से ख़ून बहता है
- जहाँज़ेब साहिर



वो जंग हार के मुझ से ये पूछता है कि मैं
बग़ैर तेग़ मुज़फ़्फ़र हुआ तो कैसे हुआ
- फ़राग़ रोहवी



वो महंतों के मठों में युद्ध की तय्यारियाँ
बन गए जोगी कई निरवान सफ़दर देखिए
- मुनव्वर लखनवी



वो शोख़ जंग-जू जो हमारे गले मिला
मातम मुख़ालिफ़ों ने मुहिब्बों ने ईद की
- अरशद अली ख़ान क़लक़



शमशीर दुआ करके मुसल्ले से उठाई
फिर जंग पे निकला मैं इबादत से गुज़र कर
- कामरान नफ़ीस



शमीम ज़ुल्मत-ए-दौराँ से जंग है दरपेश
जो चाहता हो सवेरा तो मेरे साथ चलो
- शमीम करहानी



शहज़ादी ने दिल हारा और जीती जंग
माल-ए-ग़नीमत में तुम शामिल शहज़ादे
- फ़ौज़िया रबाब



शहर से रहती है इक जंग मुसलसल दिन-भर
शहर जब हाँपने लगता है तो घर जाता हूँ
- महमूद शाम



शहीद होने से पहले उसे भी देखना था
मगर ये बात उसे जंग से न कह पाया
- ज़ुबैर क़ैसर



शिकस्ता हैं मिरे आसाब यूँ भी
अना से जंग इक मुद्दत लड़ी है
- बिल्क़ीस ख़ान



शिकायत करें क्या शिकायत से क्या हो
अगर जंग लाज़िम है तो हौसला हो
- ज़ोहेब फ़ारूक़ी अफ़रंग



शुक्र ख़ुदा का जीत गए हम जंग मगर
हम से बेहतर तो तय्यारी उस की थी
- मंज़ूर देपालपुरी



शुरूअ हो चुकी है जंग शहर में
मोहब्बतों को दरमियान छोड़ दे
- अज़हर अब्बास



शौहरों से बीबियाँ लड़ती हैं छापा-मार जंग
राब्ता उन का भी क्या कश्मीर की वादी से है
- ज़फ़र कमाली



सच्चाई वो जंग है जिस में बाज़ औक़ात सिपाही को
आप मुक़ाबिल अपने ही डट जाना पड़ता है
- ख़ावर जीलानी



सज्दे में वालिदा के ये हस्सास था असर
दस्त-ए-दुआ' ने जीत ली दस्त-ए-क़ज़ा से जंग
- मसूद हस्सास



सदाक़तें हैं अजब इश्क़ के क़बीले की!
उसी से जंग भी ठहरी है जिस से यारी है
- रज़ी अख़्तर शौक़



सफ़-ए-अज़ीज़ाँ सफ़-ए-दुश्मनाँ भी मेरी थी
वो जंग मेरी थी सूद-ओ-ज़ियाँ भी मेरे थे
- ज़ुबैर रिज़वी



सब हवाओं से जंग करता रहा
एक नन्हा दिया हमेशा से
- ताजदार आदिल



सय्याद ओ बाग़बाँ में बहुत होती है सलाह
ऐसा न हो कहीं गुल ओ बुलबुल में जंग हो
- लाला माधव राम जौहर



सय्याद मैं जो हार गया हौसले की जंग
फिर ख़ुद कहूँगा तुझ से मिरे पर लपेट दे
- अहमद मुशर्रफ़ ख़ावर



सर कट के गिर पड़ा उसी क़ातिल के पाँव पर
जल्लाद से मिलाप दम-ए-जंग हो गया
- मुनीर शिकोहाबादी



सर कटा कर भी खड़ा हूँ सर-ए-मैदाँ अख़्तर
इस तरह जंग यहाँ कौन लड़ा है देखो
- अख़्तर होशियारपुरी



सरफ़रोशों के चले लश्कर पे लश्कर देखिए
अपनी पहली जंग-ए-आज़ादी का मंज़र देखिए
- मुनव्वर लखनवी



सामने फिर मिरे अपने हैं सो मैं जानता हूँ
जीत भी जाऊँ तो ये जंग मैं हारा हुआ हूँ
- अहमद फ़रीद



सिखाया इश्क़ ने मुझ को कि जंग-जू क्या है
ये क्या है ज़ख़्म की शिद्दत कि फिर रफ़ू क्या है
- सालिम एहसान



सिपर भी तेग़ भी तन पर ज़रा-बक्तर सही अनवर
बराए जंग दिल में हौसला होना ज़रूरी है
- अनवर सादिक़ी



सिपाही चाहते थे दुश्मनों से जंग हो जाए
सभी ने बादशाह की बात मानी कर नहीं सकते
- आशुतोष तिवारी



सिपाही जंग से कब लौटते हैं
वो कोई और है ज़िंदा अगर है
- रसूल साक़ी



सियाह ज़ुल्फ़ घटा जाल जादू जंग जलाल
फ़ुसूँ शबाब शिकारन शराब रात घनी
- शहज़ाद क़ैस



सिर्फ़ अँधेरे ही से दिए की जंग नहीं होती
तेज़ हवाओं से भी इस को लड़ना पड़ता है
- आज़ाद गुलाटी



सिर्फ़ बाहर नहीं महाज़ खुला
मेरे अंदर भी जंग जारी है
- अज़हर इनायती



सीने में उन के साँस बहुत तंग तंग थी
जैसे ख़ुद अपने आप से इक जंग जंग थी
- डाक्टर राही



सुनहरी हाथ में ताज़ा लहू की फ़स्ल न दी
कि अपने हक़ के लिए जंग-जू भी होना था
- इक़बाल साजिद



सुना है मैं ने यहाँ सुर्ख़ घास आ गई थी
वो बादशाह यहीं अपनी जंग हारा था
- अज़हर इनायती



सुबुक-ख़िराम चला और कभी मैं ठहरा रहा
कि मेरी अपने ही साए से जंग जारी थी
- मंज़र नक़वी



सुरख़-रू जंग से लौट आया था
ख़ूँ में लत-पत जिसे घर में देखा
- हमदम कशमीरी



सुर्ख़ है रूमाल-ए-शाली उस के तहतुल-जंग तक
मुसहफ़ रुख़्सार पर या जदवल-ए-शंगर्फ़ है
- वलीउल्लाह मुहिब



सुल्ह की दिल से हैं याँ मस्लिहतें
वाँ सर-ए-जंग रहा करता है
- हैदर अली आतिश



सुल्ह-जूई की तमन्ना में शब-ओ-रोज़ अज़ीज़
यक जहाँ मुज़्तरिब-ए-जंग नज़र आता है
- अज़ीज़ हैदराबादी



सुल्हुल्लाह नहीं जंग भी फ़िल्लाह नहीं
ना'रा-बाज़ाँ कोई शब्बर कोई शब्बीर भी है
- रशीद कौसर फ़ारूक़ी



सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए
- राहत इंदौरी



सैलाब जंग ज़लज़ले तूफ़ान आँधियाँ
सुनते रहे कहानियाँ बूढ़े शजर से लोग
- आफ़ताब आरिफ़



सौ गाली एक चश्मक इतना सुलूक तो है
औबाश ख़ाना जंग उस ख़ुश-चश्म बद-ज़बाँ का
- मीर तक़ी मीर



हज़ार सुल्ह का परचम बुलंद कर देखो
मगर ज़मीं पे मुसल्लत रहेगी जंग वही
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
- साहिर लुधियानवी



हम एक साथ मोहब्बत की जंग हारे हैं
हमें शिकस्त भी इक साथ ही मनाने दे
- शुमामा उफ़ुक़



हम ऐसे जंग-जू असीर-ए-इश्क़ क्या हुए
मोहब्बतों में अम्न के सफ़ीर हो गए
- हिना अंबरीन



हम किसी जंग में शामिल न हुए बस हम ने
हर तमाशे को फ़क़त राहगुज़र से देखा
- असअद बदायुनी



हम ज़िंदगी की जंग में हारे ज़रूर हैं
लेकिन किसी महाज़ से पसपा नहीं हुए
- शौकत वास्ती



हम जो तलवार उठा लें तो क़यामत आ जाए
हाँ मगर ये कि हमें जंग से डर लगता है
- नसीम सिद्दीक़ी



हम फ़क़त जंग ही नहीं हारे
हौसला भी बिखर गया अफ़्सोस
- सिराज फ़ैसल ख़ान



हम भी इस जंग में फ़िलहाल किए लेते हैं सुल्ह
देखा जाएगा जो हालात ने अंगड़ाई ली
- तसनीम फ़ारूक़ी



हम-दिगर मोमिन को है हर बज़्म में तकफ़ीर-ए-जंग
नेक सुल्ह-ए-कुल है बद है बा-जवान-ओ-पीर-ए-जंग
- वलीउल्लाह मुहिब



हमारी जंग में जावेद ख़ूँ नहीं बहता
हमारे पास हैं फ़िक्र-ओ-नज़र की शमशीरें
- जावेद जमील



हमारी लाश तो गिरती है जंग लड़ते हुए
मगर जो पीठ पे बरछे उतारे जाते हैं
- ज़ुबैर क़ैसर



हमें तबाह तो होना था अपनी अपनी जगह!
तवील जंग थी और जंग भी अना की थी
- इफ़्तिख़ार मुग़ल



हमें तो अपने उसूलों की जंग जीतनी है
किसे ग़रज़, जो कोई फ़तह के सिले हुए भी
- इरफ़ान सत्तार



हमें तो पढ़ना है मैदान-ए-जंग में भी नमाज़
मुअज़्ज़िनोंं के लबों पर अज़ाँ रहे न रहे
- रईस अंसारी



हमें पसंद नहीं जंग में भी मक्कारी
जिसे निशाने पे रक्खें बता के रखते हैं
- हस्तीमल हस्ती



हर इक नफ़स पे गुज़रता है ये गुमाँ जैसे
चराग़ ले के हवाओं से जंग पर जाना
- आलमताब तिश्ना



हर एक जंग में वो कामयाब होता है
ज़हीन हाथ में तेग़-ओ-तबर नहीं लेता
- याक़ूब साक़ी



हर एक शय से मोहब्बत की रिश्ता-दारी रख
अब इस को जंग समझ और जंग जारी रख
- नाज़िम नक़वी



हर क़दम एक नई जंग के मुतरादिफ़ है
पिछले हर साल से संगीन है ये साल मिरा
- सरफ़राज़ ख़ान आज़मी



हर घड़ी जंग जीने मरने की
हर कोई ज़ोर-आज़मा तन्हा
- सलीमुर्रहमान



हर तरफ़ अम्न के नारों से फ़ज़ा है मामूर
हर तरफ़ जंग का सामाँ है ग़ज़ल क्या कहिए
- शमीम फ़ारूक़ बांस पारी



हर तरफ़ इक जंग का माहौल है आज़म यहाँ
आदमी अब घर के भी अंदर सलामत है कहाँ
- इमाम आज़म



हर रोज़ नई जंग है हर रोज़ नई जेहद
कब अपने मुक़ाबिल कोई लश्कर नहीं होता
- क़मर सिद्दीक़ी



हर सम्त दिमाग़ों के तरंगों का है शब-ख़ूँ
तकनीक की इस जंग में लश्कर न मिलेगा
- तफ़ज़ील अहमद



हवादिस पर न ऐ नादाँ नज़र कर
क़ज़ा से जंग बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर कर
- जोश मलसियानी



हाथ क्या आएगा अब जंग को जारी रख कर
फ़ैसला कर भी दिया शह की गिरफ़्तारी ने
- ग़ुलाम हुसैन साजिद



हालात के दबाओ से हैजान में रहे
हम सारी उम्र जंग के मैदान में रहे
- हयात वारसी



हालात बदल सकते हैं करवट किसी लम्हे
हो जंग तो घोड़े को सधाया नहीं जाता
- अज़ीज़ आदिल



हुई गर सुल्ह भी तो भी रही जंग
मिला जब दिल तो आँख उस से लड़ा की
- ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर



है इंतिज़ार मुझे जंग ख़त्म होने का
लहू की क़ैद से बाहर कोई बुलाता है
- आशुफ़्ता चंगेज़ी



है कभी दिल कभी निगाह से जंग
रोज़ इक ख़्वाहिश-ए-गुनाह से जंग
- औसाफ़ शैख़



है निशाँ जंग से भाग आने का
घर मुझे बाइस-ए-रुस्वाई है
- फ़रहत एहसास



है सल्तनत ही मेरी न लश्कर मिरा मगर
मैं बद-नसीब जंग का मैदान हो गया
- शफ़क़ सुपुरी



हैरत जब अपना जादू जगाने पे आए हैं
जीने को हम ने मर्तबा-ए-जंग दे दिया
- बलराज हैरत



होती है किस की जीत रज़ा देखते रहो
मौज-ए-ग़ज़ब की आज किनारे से जंग है
- क़ाज़ी हसन रज़ा



होती है हर इक जंग में क्यों हार हमारी
देखो तो कभी क़ाफ़िला सालार बदल कर
- वाजिद मेरठी



होश-ओ-हवस की जंग में हैरत-ज़दा रहा
जज़्बों का शोर अक़्ल के अफ़्कार देख कर
- अख़्तर हुसैन शाफ़ी



हौसला ख़ूब है चराग़ों को
जंग हवा के ख़िलाफ़ करते हैं
- हुसैन ख़ां दानिश



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जखीरा, साहित्य संग्रह: जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर शायरी संग्रह
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जंग / युद्ध पर शायरी | जंग पर शेर संग्रह जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है जंग क्या मसअलों का हल देगी - साहिर लुधियानवी
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