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मेरी बिटिया बड़ी सयानी - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मेरी बिटिया बड़ी सयानी मेरी बिटिया बड़ी सयानी, जगती सुबह-सवेरे। और सैर पर जाती हर दिन, साथ घूमने मेरे। योग और व्यायाम नित्य कर, अपना स्वास्थ्य बनाती। चुनती सदा उचित चीज़ें ही, उचित समय पर खाती। सही समय विद्यालय जाती, पढ़ती ध्यान लगाकर। विद्…

भगवन् हमको ऐसा वर दो - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

भगवन् हमको ऐसा वर दो भगवन् हमको ऐसा वर दो। जग के सारे सद्गुण भर दो॥ हम फूलों जैसे मुस्कायें, सब पर प्रेम ­सुगंध लुटायें, हम पर­हित कर खुशी मनायें, ऐसे भाव हृदय में भर दो। भगवन् हमको ऐसा वर दो॥ दीपक बनें, लड़े हम तम से, ज्योर्तिमय हो यह…

आगे बढ़ते जायेंगे - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

आगे बढ़ते जायेंगे मिलकर कदम बढ़ायेंगे । आगे बढ़ते जायेंगे ।। हाँ, बाधाएं आयेंगी, माना, बहुत डरायेंगी, किन्तु न हम घबरायेंगे। आगे बढ़ते जायेंगे ।। रुकना अपना काम नहीं, जीत बिना आराम नहीं, सबको यह समझायेंगे । आगे बढ़ते जायेंगे ।। विघ्नों…

मेरी गुड़िया - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मेरी गुड़िया मेरी गुड़िया बड़ी सयानी जगती सुबह- सबेरे । और सैर पर जाती हर दिन साथ घूमने मेरे ।। योग और व्यायाम नित्य कर अपना स्वास्थ्य बनाती । चुनती सदा उचित चीजें ही उचित समय पर खाती ।। सही समय विद्यालय जाती पढ़ती ध्यान लगाकर । विद्यालय …

उठो बटोही - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

उठो बटोही सूरज नभ से झांका, बिखरी जग में किरणों की अरुणाई । छा गये चतुर्दिक सुखद रंग, हर ओर नई सुषमा छाई ।। शीतल बयार बहकी, झूमीं पत्ती- पत्ती, डाली-डाली । मुस्काये फूल सुगंध लुटा, निखरीं कलियाँ भोली भाली ।। भरकर उमंग में पाखी-दल, गा उठा…

मीठी बातों का जादू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मीठी बातों का जादू जब भी बोलो सच ही बोलो बातों में मिश्री सी घोलो । जादू करतीं मीठी बातें, मीठा बोल सभी के हो लो ।। महामंत्र है मीठी भाषा, सबको कर लेती है वश में । नहीं मिठास मिठाई,फल में, जो मिठास बातों के रस में ।। प्यारी मीठी बातें सुन…

औरों के दुःख हरना - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

/ औरों के दुःख हरना हर दिन तपता, चलता सूरज, देता सुखद उजाला । रात रात भर चांद चमककर हरता है तम काला ।। तप्त आग में जल सोने का, मोहक रूप निखरता । मेघ स्वयं की देह मिटाकर, खुशियों के सर भरता ।। मीठे फल देकर औरों को वृक्ष झूमते रहते । औरों…

कठपुतली - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

कठपुतली ठुमक-ठुमक नाचे कठपुतली सबके मन को मोहे । रंग बिरंगे सुन्दर कपड़े उसके तन पर सोहे ।। हाथ नचाती, पैर नचाती, रह रह कमर घुमाती । नये नये करतब दिखलाकर सबका मन बहलाती ।। उसे थिरककर नचा रहे हैं आशाओं के धागे । सपनों के नव पंख लगाकर बढ़…

जुगनू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जुगनू - त्रिलोक सिंह ठकुरेला जुगनू कहो, तुम्हारे मन में कैसे सपने घिरते । मद्धिम-मद्धिम दीप्ति दिखाकर किसे ढूंढते फिरते ।। मन में क्या संकल्प लिए हो निकले सघन निशा में । क्या तम का अस्तित्व मिटाने फिरते दिशा दिशा में ।। अंधकार की व्यापक स…

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जोकर - त्रिलोक सिंह ठकुरेला एक हाथ में छड़ी घुमाता । जोकर आया हंसता गाता ।। रंग-बिरंगे कपड़े पहने। पहने था वह नकली गहने ।। लाल नाक पर बिन्दी पीली । बना रखी थीं भौंह कटीली ।। मुख सफेद, आंखें थी नीली । चुस्त कमीज़, पैन्ट कुछ ढ़ीली । शंक्व…

त्रिलोक सिंह ठकुरेला : संक्षिप्त परिचय

त्रिलोक सिंह ठकुरेला : संक्षिप्त परिचय त्रि लोक सिंह ठकुरेला (Trilok Singh Thakurela) का जन्म 1 अक्टूबर 1966, नगला मिश्रिया, हाथरस में हुआ | आप एक सुपरिचित कुण्डलियाकार हैं। आपने कुण्डलिया और छंद को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। राज…

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