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मीठे बोल - सोहनलाल द्विवेदी

मीठे बोल  मीठा होता खस्ता खाजा मीठा होता हलुआ ताजा, मीठे होते गट्टे गोल सबसे मीठे, मीठे बोल। मीठे होते आम निराले मीठे होते जामुन काले, मीठे होते गन्ने गोल सबसे मीठे, मीठे बोल। मीठा होता दाख छुहारा मीठा होता शक्कर पारा, मीठा होता रस …

जगमग-जगमग - सोहनलाल द्विवेदी

जगमग-जगमग - सोहनलाल द्विवेदी हर घर, हर दर, बाहर, भीतर, नीचे ऊपर, हर जगह सुघर, कैसी उजियाली है पग-पग, जगमग जगमग जगमग जगमग! छज्जों में, छत में, आले में, तुलसी के नन्हें थाले में, यह कौन रहा है दृग को ठग? जगमग जगमग जगमग जगमग! पर्वत में, नदिय…

रेल की खिड़की - सोहन लाल द्विवेदी

रेल की खिड़की मै बैठा डिब्बे के अंदर जब नज़र डालता हूँ बाहर छक-छक, फक-फक, छक-छक, भक-भक है रेल चली जाती है धक-धक तो दुनियाँ अजब नज़र आती सब चीजे भगती दिखलाती ये पेड भगे, ये पात भगे जंगल के बड़े जमात भगे ये खेत बाग़ खलिहान भगे लंबे चौड़े मैदा…

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