deepawali

यह दीया सब को उजाला दे - नंद चतुर्वेदी

यह दीया सब को उजाला दे पार जाएँ हम अँधेरों की विवशता के पार जाएँ हम बाज़ारों की अधमता के डूबते को नाव भूखों को निवाला दे हम पढ़ें वह पाठ ऐसे आदमी का हो ठोकरें खाता शिखर पर चढ़ गया है जो वह उमंगों की चमकती पाठशाला दे लिख सकें सारी कथा हम आस…

आज फिर से - हरिवंशराय बच्चन

आज फिर से आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ । है कहां वह आग जो मुझको जलाए, है कहां वह ज्वाल पास मेरे आए, रागिनी, तुम आज दीपक राग गाओ; आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ। तुम नई आभा नहीं मुझमें भरोगी, नव विभा में स्नान तुम भी तो करोगी, आज तुम मुझको…

जगमग-जगमग - सोहनलाल द्विवेदी

जगमग-जगमग - सोहनलाल द्विवेदी हर घर, हर दर, बाहर, भीतर, नीचे ऊपर, हर जगह सुघर, कैसी उजियाली है पग-पग, जगमग जगमग जगमग जगमग! छज्जों में, छत में, आले में, तुलसी के नन्हें थाले में, यह कौन रहा है दृग को ठग? जगमग जगमग जगमग जगमग! पर्वत में, नदिय…

दिवाली - अबरार किरतपुरी

दिवाली दिवाली के दीप जलाएँ आ जाओ रौशन रौशन गीत सुनाएँ आ जाओ गोशे गोशे में तज़ईन-ओ-ज़ेबाई साफ़ करें हर दिल की मैली अँगनाई फ़ितरत ने भी मस्ती में ली अंगड़ाई ख़ुशियों का संगीत सुनाएँ आ जाओ दिवाली के दीप जलाएँ आ जाओ रौशन रौशन गीत सुनाएँ आ जाओ …

अंधियार ढल कर ही रहेगा - गोपालदास नीरज

अंधियार ढल कर ही रहेगा अंधियार ढल कर ही रहेगा आंधियां चाहें उठाओ, बिजलियां चाहें गिराओ, जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा। रोशनी पूंजी नहीं है, जो तिजोरी में समाये, वह खिलौना भी न, जिसका दाम हर गाहक लगाये, वह पसीने की हंसी है, वह शहीद…

आओ फिर से दिया जलाएँ - अटल बिहारी वाजपेयी

आओ फिर से दिया जलाएँ आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अँधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ हम पड़ाव को समझे मंज़िल लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल वर्त्तमान के मोहजाल में- आने वाला कल…

दिवाली के दीये - सआदत हसन मंटो

दिवाली के दीये - सआदत हसन मंटो छत की मुंडेर पर दिवाली के दीये हाँपते हुए बच्चों के दिल की तरह धड़क रहे थे। मुन्नी दौड़ती हुई आई। अपनी नन्ही सी घगरी को दोनों हाथों से ऊपर उठाए छत के नीचे गली में मोरी के पास खड़ी हो गई। उसकी रोती हुई आँखों में मुंडे…

दीपावली पर पाँच मुक्तक - शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

दीपावली पर पाँच मुक्तक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम छोड़कर चल दिए रस्ते सभी फूलों वाले चुन लिए अपने लिए पथ भी बबूलों वाले उनके किरदार की अज़मत है निराली शाहिद दोस्त तो दोस्त, हैं दुश्मन भी उसूलों वाले परतवे-अर्श (आकाश का प्रतिबिंब) जगमगाते हुए …

साथी घर-घर आज दिवाली (कविता) - हरिवंशराय बच्चन

साथी, घर-घर आज दिवाली साथी, घर-घर आज दिवाली! फैल गयी दीपों की माला मंदिर-मंदिर में उजियाला, किंतु हमारे घर का, देखो, दर काला, दीवारें काली! साथी, घर-घर आज दिवाली! हास उमंग हृदय में भर-भर घूम रहा गृह-गृह पथ-पथ पर, किंतु हमारे घर के अंदर डर…

परिंदे लौट के जब घर को जाने लगते हैं - जमुना प्रसाद राही

परिंदे लौट के जब घर को जाने लगते हैं परिंदे लौट के जब घर को जाने लगते हैं हमें भी याद दर-ओ-बाम आने लगते हैं फ़सील-ए-सरहद-ए-माज़ी धड़कने लगती है जो ख़्वाब नींद का दर खटखटाने लगते हैं हुबाब धूप की बारिश में फूटते बनते सबात-ए-ज़ात का मतलब बतान…

दीवाली 1958 - प्रेम लाल शिफ़ा देहलवी

दीवाली 1958 दीपावली आती है जो हर साल फिर आई पैग़ाम मसर्रत का जहाँ के लिए लाई मक़्सूद है कुछ जश्न भी कुछ इस से भलाई बरसात का मौसम गया लाज़िम है सफ़ाई पैग़ाम-ए-नफ़ासत है ब-हर-गाम दीवाली दुनिया नहीं भूली है अभी राम का आना फुर्क़त-ज़दा भाई को …

दीपावली (नज़्म) - आदिल हयात

दीपावली - आदिल हयात जब से आई है दीपावली हर तरफ़ छाई है रौशनी हर जगह चाहतों के दिए शाम होते ही जलने लगे फुल-झड़ियों का बाज़ार है ये पटाख़ों का तेहवार है दीपों का है सुहाना समाँ जिन से धरती बनी कहकशाँ जितने रॉकेट पटाख़े चले आसमाँ पर ल…

दीपावली - नज़ीर बनारसी

दीपावली - नज़ीर बनारसी मिरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है ये दीवाली है सब को जीने का अंदाज़ देती है हृदय के द्वार पर रह रह के देता है कोई दस्तक बराबर ज़िंदगी आवाज़ पर आवाज़ देती है सिमटता है अंधेरा पाँव फैलाती है दीवाली हँसाए जाती है …

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में - नज़ीर बनारसी

दीपो के पर्व दीपावली पर कुछ अशआर घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में आज ढूँढने पर भी मिल सकी न तारीकी मौत खो गई शायद ज़िंदगी के रेले में इस तरह से हँसती हैं आज दीप-मालाएँ श…

हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का - नज़ीर अकबराबादी

हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का सभी के दिल में समाँ भा गया दिवाली का किसी के दिल को मज़ा ख़ुश लगा दीवाली का अजब बहार का है दिन बना दिवाली का जहाँ में यारो अजब तरह क…

दिवाली के दीप जले हैं - हैदर बयाबानी

दिवाली के दीप जले हैं दिवाली के दीप जले हैं यार से मिलने यार चले हैं चारों जानिब धूम-धड़ाका छोटे रॉकेट और पटाख़ा घर में फुल-झड़ियाँ छूटे मन ही मन में लड्डू फूटे दीप जले हैं घर आँगन में उजयारा हो जाए मन में अपनों की तो बात अलग है आज तो…

घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन - नजीर बनारसी

घर की किस्मत जगी घर में आए सजन घर की किस्मत जगी घर में आए सजन ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन आज धरती पे है स्वर्ग का बाँकपन अप्सराएँ न क्यूँ गाएँ मंगलाचरण ज़िंदगी से है हैरान यमराज भी आज हर दीप अँधेरे पे है ख़ंदा-ज़न उन के क़दमों से फूल और फ…

ना दिवाली होती, और ना पठाखे बजते - शकील प्रेम

ना दिवाली होती, और ना पठाखे बजते ना दिवाली होती और ना पठाखे बजते ना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होते तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता, ....काश कोई धर्म ना होता.... ....काश कोई मजहब ना होता.... ना अर्ध देते, ना स्नान होता ना मुर्दे बहाए ज…

दीपावली पर बेहतरीन शायरी

दीपो के पर्व दिवाली / दीपावली पर शायरो के कुछ अशआर कुछ ग़रीबों की गली में भी दिए जल जाएँ इस से बेहतर भी दिवाली का उजाला क्या है - अजय सहाब आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ - अज़्म शाकरी था इंतिज़ार मनाएँगे मि…

इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी

इक दिया नाम का आज़ादी के एक दो भी नहीं छब्बीस दिए एक एक करके जलाये मैंने इक दिया नाम का आज़ादी के उसने जलते हुए होठो से कहाँ चाहे जिस मुल्क से गेहूं माँगो हाथ फ़ैलाने की आज़ादी है इस दिया नाम का खुशहाली के उस के जलते ही यह मालूम हुआ कितनी बद…

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