बहरूपनी - कैफ़ी आज़मी
बहरूपनी एक गर्दन पे सैकड़ों चेहरे और हर चेहरे पर हजारों दाग़ और हर दाग़ बंद दरवाज़ा रौशनी इन से आ नहीं सकती रौशनी इन से जा नहीं सकती तंग सीना है हौज़ मस्जिद का दिल वो दूना पुजारियों के ब'अद चाटते रहते हैं जिसे कुत्ते कुत्ते दूना जो चाट…