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हिंदी और उर्दू - सआदत हसन मंटो

हिंदी और उर्दू हिन्दी और उर्दू का झगड़ा एक ज़माने से जारी है। मौलवी अब्दुल-हक़ साहब, डाक्टर तारा चंद जी और महात्मा गांधी इस झगड़े को समझते हैं लेकिन मेरी समझ से ये अभी तक बालातर है। कोशिश के बावजूद इस का मतलब मेरे ज़हन में नहीं आया। हिन्दी के हक़ में ह…

सआदत हसन मंटो के उद्धरण | Saadat Hasan Manto Quotes in Hindi

सआदत हसन मंटो के उद्द्धरण | Saadat Hasan Manto Quotes in Hindi चेख़व के बाद मंटो ही थे जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी जगह बना ली यानी उन्होंने कोई उपन्यास नहीं लिखा | मंटो ने अपनी कहानियों में विभाजन, दंगों और सांप्रदायिकता पर जितने तीखे …

दिवाली के दीये - सआदत हसन मंटो

दिवाली के दीये - सआदत हसन मंटो छत की मुंडेर पर दिवाली के दीये हाँपते हुए बच्चों के दिल की तरह धड़क रहे थे। मुन्नी दौड़ती हुई आई। अपनी नन्ही सी घगरी को दोनों हाथों से ऊपर उठाए छत के नीचे गली में मोरी के पास खड़ी हो गई। उसकी रोती हुई आँखों में मुंडे…

खुशबूदार तेल - सआदत हसन मंटो

खुशबूदार तेल - सआदत हसन मंटो "आप का मिज़ाज अब कैसा है?" "ये तुम क्यों पूछ रही हो अच्छा भला हूँ मुझे क्या तकलीफ़ थी " "तकलीफ़ तो आप को कभी नहीं हुई एक फ़क़त मैं हूँ जिस के साथ कोई न कोई तकलीफ़ या आरिज़ा चिमटा रहता है &qu…

काली सलवार - सआदत हसन मंटो

काली सलवार दिल्ली आने से पहले वो अंबाला छावनी में थी जहां कई गोरे उसके गाहक थे। उन गोरों से मिलने-जुलने के बाइस वो अंग्रेज़ी के दस पंद्रह जुमले सीख गई थी, उनको वो आम गुफ़्तगु में इस्तेमाल नहीं करती थी लेकिन जब वो दिल्ली में आई और उसका कारोबार न च…

सआदत हसन मंटो जीवन परिचय

सआदत हसन मंटो जीवन परिचय सआदत हसन मंटो साहब का जन्म 11 मई 1912 को समराला (पंजाब) में हुआ था | आपने भारत पकिस्तान के विभाजन को अपनी आँखों से देखा सो इस दर्द को अपनी कहानियों में उतारा | आपकी लेखन की प्रमुख भाषा उर्दू रही है | आपने मुख्य रूप से कहान…

सआदत हसन मंटो की पांच लघुकथाए

सआदत हसन मंटो की पांच लघुकथाए 1 ) करामात लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए। लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अँधेरे में बाहर फेंकने लगे; कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल भी मौका पाकर अपने से अलहदा कर दिया, कानूनी गिरफ्त…

नेहरू के नाम मंटो का खत - सआदत हसन मंटो

नेहरू के नाम मंटो का खत पंडित जी, अस्सलाम अलैकुम। यह मेरा पहला खत है जो मैं आपको भेज रहा हूँ। आप माशा अल्लाह अमरीकनों में बड़े हसीन माने जाते हैं। लेकिन मैं समझता हूँ कि मेरे नाक-नक्श भी कुछ ऐसे बुरे नहीं हैं। अगर मैं अमरीका जाऊँ तो शायद मु…

टोबा टेक सिंह - सआदत हसन मंटो

टोबा टेक सिंह बँटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख़्याल आया कि अख़्लाक़ी क़ैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पागल हिंदुस्तान के पागलख़ानों में हैं, उन्हें पाकिस्तान पहुँचा दिया जाए और जो हिंद…

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