आत्ममंथन - महावीर उत्तरांचली
आत्ममंथन - महावीर उत्तरांचली सम्पूर्ण विश्व में मेरा ही वर्चस्व है, भूख ने भयानक स्वर में गर्जना की। मै कुछ समझी नहीं, प्यास बोली। मुझसे व्याकुल होकर ही लोग नाना प्रकार के उद्योग करते हैं। यहाँ तक कि कुछ अपना ईमान तक बेच देते हैं, भूख ने उसी घ…