कीमत - दीपक मशाल

कीमत - दीपक मशाल

कीमत - दीपक मशाल

दीपक मशाल जी का असल नाम दीपक चौरसिया है आप मशाल उपनाम लिखते है | कोंच, उरई उत्तर प्रदेश, भारत के रहने वाले है | आपको अक्षरम, दिल्ली एवं प्रवासी दुनिया द्वारा वर्ष 2012 का प्रवासी युवा साहित्य सम्मान मिल चुके है ।
रमा के मामा रमेश के घर में कदम रखते ही रमा के पिताजी को लगा कि जैसे उनकी सारी समस्याओं का निराकरण हो गया ।
रमेश फ्रेश होने के पश्चात, चाय की चुस्कियां लेने अपने जीजाजी के साथ कमरे के बाहर बरामदे में आ गया। ठंडी हवा चल रही थी। जिससे शाम का मज़ा दोगुना हो गया। पश्चिम में सूर्य उनींदा सा बिस्तर में घुसने कि तैयारी में लगा था। कि चुस्कियों के बीच में ही जीजाजी ने अपने आपातकालीन संकट का कालीन खोल दिया-
“यार रमेश, अब तो तुम ही एकमात्र सहारा हो, मैं तो हर तरफ से हताश हो चुका हूँ।”
मगर जीजाजी की बात ने जैसे रमेश की चाय में करेले का रस घोल दिया, उसे महसूस हुआ की उस पर अभी बिन मौसम बरसात होने वाली है। लेकिन बखूबी अपने मनोभावों को छुपाते हुए उसने कहा-
“मगर जीजाजी, हुआ क्या है?”
“अरे होना क्या है, वही पुराना रगडा।। तीन साल हो गए रमा के लिए घर तलाशते हुए। अभी वो ग्वालियर वाले शर्मा जी के यहाँ तो हमने रिश्ता पक्का ही समझा था मगर।।। उन्होंने ये कह के टाल दिया की लड़की कम से कम पोस्ट ग्रेज़ुएट तो चाहिए ही चाहिए। उससे पहिले जो कानपूर वाले मिश्रा जी के यहाँ आस लगाई तो उन्होंने सांवले रंग की दुहाई देके बात आई गई कर दी।”
“वैसे ये लड़के करते क्या थे जीजा जी?”
“अरे वो शर्मा जी का लड़का तो इंजीनिअर था किसी प्राइवेट कंपनी में और उनका मिश्रा जी का बैंक में क्लर्क।” लम्बी सांस लेते हुए रमा के पिताजी बोले।
“आप कितने घर देख चुके हैं अभी तक बिटिया के लिए?” रमेश ने पड़ताल करते हुए पूछा।
“वही कोई १०-१२ घर तो देख ही चुके हैं बीते ३ सालों में” जवाब मिला।
“ वैसे जीजा जी आप बुरा ना मानें तो एक बात पूछूं?” रमेश ने एक कुशल विश्लेषक की तरह तह तक जाने की कोशिश प्रारंभ कर दी।
“हाँ-हाँ जरूर”
“आप लेन-देन का क्या हिसाब रखना चाहते हैं? कहीं हलके फुल्के में तो नहीं निपटाना चाहते?” सकुचाते हुए रमेश बोला।
“नहीं यार १६-१७ लाख तक दे देंगे पर कोई मिले तो।” जवाब में थोड़ा गर्व मिश्रित था।
रमेश अचानक चहका-
“अरे इतने में तो कोई भी भले घर का बेहतरीन लड़का फंस जायेगा, जबलपुर में वही मेरे पड़ोस वाले दुबे जी हैं ना, उनका लड़का भी तो पिछले महीने ऍम।डी। कर के लौटा है रूस से।। उन्हें भी ऐसे घर की तलाश है जो उनके लड़के की अच्छी कीमत दे सके।”
रमा के पिताजी को लगा जैसे ज़माने भर का बोझ उनके कन्धों से उतर गया।
मगर परदे के पीछे खड़ी रमा को इस बात ने सोचने पे मजबूर कर दिया कि यह उसकी खुशियों की कीमत है या उसके होने वाले पति की????
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