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एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब-के-सब यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्साे लिया जाएगा। आखिर एक हिरन पकड़ा और मारा गया। जब साथ के जानवर हिस्सार लगाने चले, शेर ने धक्केए मारकर उन्हेंर अलग कर दिया और कुल हिस्से छाप बैठा।

उसने गुर्राकर कहा, ''बस, हाथ हटा लो। यह हिस्साा मेरा है, क्योंरकि मैं जंगल का राजा हूँ और यह हिस्सार इसलिए मेरा है, क्योंटकि मैं इसे लेना चाहता हूँ, और यह इसलिए कि मैंने बड़ी मेहनत की है। और एक चौथे हिस्से के लिए तुम्हेंट मुझसे लड़ना होगा, अगर तुम इसे लेना चाहोगे।'' खैर, उसके साथी न तो कुछ कह सकते थे, न कर सकते थे; जैसा अकसर होता है, शक्ति सत्ये पर विजय पाती है, वैसा ही हुआ।
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