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निराला गुड्डा - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

निराला गुड्डा - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी अब तक इस मकान में झाड़ू नहीं दी गई? शमीम ने रौब जमाया... तो बड़ी काम-चोर हो गई है शहनाज़। और शहनाज़ अपने फटे हुए दुपट्टे से घरौंदे को इस तरह तनदही से साफ़ करने लगी जैसे वाक़ई वो इस घर की मामा हो और शमीम उसकी मालकिन…

छोटा जादूगर - जयशंकर प्रसाद

छोटा जादूगर कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हँसी और विनोद का कलनाद गूँज रहा था। मैं खड़ा था। उस छोटे फुहारे के पास, जहाँ एक लडक़ा चुपचाप शराब पीनेवालों को देख रहा था। उसके गले में फटे कुरते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जे…

शिकार को निकला शेर - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

शिकार को निकला शेर If you cannot see the audio controls, your browser does not support the audio element एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब के बीच मे यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्सा लिया जाएगा…

ईदगाह - मुंशी प्रेमचंद

ईदगाह रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा…

चूहा और मै - हरिशंकर परसाई

चूहा और मै चाहता तो लेख का शीर्षक "मैं और चूहा" रख सकता था। पर मेरा अहंकार इस चूहे ने नीचे कर दिया। जो मैं नहीं कर सकता, वह मेरे घर का यह चूहा कर लेता है। जो इस देश का सामान्य आदमी नहीं कर पाता, वह इस चूहे ने मेरे साथ करके बता दिया। इस …

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