nazeer-banarasi

प्यारा हिन्दोस्तान - नज़ीर बनारसी

प्यारा हिन्दोस्तान जिस का है सब को ज्ञान यही है सारे जहाँ की जान यही है जिस से है अपनी आन यही है मेरा निवास स्थान यही है प्यारा हिन्दोस्तान यही है हँसता पर्बत हँसमुख झरना पाँव पसारे गंगा जमुना गोदी खोले धरती माता मेरा निवास स्थान यही है…

दीपावली - नज़ीर बनारसी

दीपावली - नज़ीर बनारसी मिरी साँसों को गीत और आत्मा को साज़ देती है ये दीवाली है सब को जीने का अंदाज़ देती है हृदय के द्वार पर रह रह के देता है कोई दस्तक बराबर ज़िंदगी आवाज़ पर आवाज़ देती है सिमटता है अंधेरा पाँव फैलाती है दीवाली हँसाए जाती है …

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में - नज़ीर बनारसी

दीपो के पर्व दीपावली पर कुछ अशआर घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में आज ढूँढने पर भी मिल सकी न तारीकी मौत खो गई शायद ज़िंदगी के रेले में इस तरह से हँसती हैं आज दीप-मालाएँ श…

घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन - नजीर बनारसी

घर की किस्मत जगी घर में आए सजन घर की किस्मत जगी घर में आए सजन ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन आज धरती पे है स्वर्ग का बाँकपन अप्सराएँ न क्यूँ गाएँ मंगलाचरण ज़िंदगी से है हैरान यमराज भी आज हर दीप अँधेरे पे है ख़ंदा-ज़न उन के क़दमों से फूल और फ…

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर, मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल, गई तो हाथ न आएगी जान भी देकर बुज़ुर्गवार ने इसके लिए तो कुछ न कहा, गए हैं मुझको दुआ-ए-सल…

दीपावली पर बेहतरीन शायरी

दीपो के पर्व दिवाली / दीपावली पर शायरो के कुछ अशआर कुछ ग़रीबों की गली में भी दिए जल जाएँ इस से बेहतर भी दिवाली का उजाला क्या है - अजय सहाब आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ - अज़्म शाकरी था इंतिज़ार मनाएँगे मि…

Load More
That is All
preload preload preload preload preload