यह सावन है - क़तील शिफ़ाई
यह सावन है यह सावन है मन भावन है छा जाये तो ढमढम ढोल बजे बरसे तो छनकती झाँझन है ये अपने प्यार के छींटों से मन-धरती को जल-थल कर दे जो धड़कन हो मुरझाई, उस धड़कन को चंचल कर दे ये बरसा है मुझ पर जब से मन मेरा गुलशन-गुलशन है यह सावन है मन भावन है…