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होली - नज़ीर अकबराबादी

होली - नज़ीर अकबराबादी क़ातिल जो मेरा ओढ़े इक सुर्ख़ शाल आया खा खा के पान ज़ालिम कर होंठ लाल आया गोया निकल शफ़क़ से बदर-ए-कमाल आया जब मुँह से वो परी-रु मल कर गुलाल आया इक दम तो देख उस को होली को हाल आया ऐश-ओ-तरब का सामान है आज सब घर उस के …

महादेव जी का ब्याह - नज़ीर अकबराबादी

महादेव जी का ब्याह - नज़ीर अकबराबादी पहले नाँव गणेश का, लीजिए सीस नवाए जा से कारज सिद्ध हों, सदा महूरत लाए बोल बचन आनंद के, प्रेम, पीत और चाह सुन लो यारो, ध्यान धर, महादेव का ब्याह जोगी जंगम से सुना, वो भी किया बयान और कथा में जो सुना, उस क…

राखी - नज़ीर अकबराबादी

राखी - नज़ीर अकबराबादी चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी बनी है गो कि नादिर ख़ूब हर सरदार की राखी सलोनों में अजब रंगीं है उस दिलदार की राखी न पहुँचे एक गुल को यार जिस गुलज़ार की राखी अयाँ है अब…

रोटियाँ - नज़ीर अकबराबादी

रोटियाँ जब आदमी के पेट में आती हैं रोटियाँ फूली नहीं बदन में समाती हैं रोटियाँ आँखें परी-रुख़ों से लड़ाती हैं रोटियाँ सीने उपर भी हाथ चलाती हैं रोटियाँ जितने मज़े हैं सब ये दिखाती हैं रोटियाँ रोटी से जिस का नाक तलक पेट है भरा करता परे है क…

मौत का धड़का - नज़ीर अकबराबादी

मौत का धड़का दुनिया के बीच यारो, सब ज़ीस्त का मज़ा है। जीतों के वास्ते ही यह ठाठ सब ठठा है। जब मर गए तो आखिर, फिर उम्र ख़ाके पा है। ने बाप है न बेटा, ने यार आश्ना है। डरती है रूह यारो, और जी भी कांपता है॥ मरने का नाम मत लो, मरना बुरी बला है॥1॥ …

रक्षाबंधन पर बेहतरीन शायरी | राखी पर शायरी

रक्षाबंधन पर बेहतरीन शायरी | राखी पर शायरी राखी / रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम का त्यौहार है मानवीय भावनाओ का त्यौहार है | आज हम आपके लिए उन चुनिन्दा अशआरो को लाये है जिन्हें शायरों और कवियों ने या तो बहनों के लिए या फिर इस त्यौहार को लेकर लिखे है :…

जब आई होली रंग भरी, सो नाज़ो-अदा से मटक-मटक - नज़ीर अकबराबादी

जब आई होली रंग भरी, सो नाज़ो-अदा से मटक-मटक जब आई होली रंग भरी, सो नाज़ो-अदा से मटक-मटक और घूँघट के पट खोल दिये,वह रूप दिखाया चमक -चमक कुछ मुखड़ा करता दमक-दमक कुछ अबरन करता झलक-झलक जब पांव रखा खु़शवक़्ती से तब पायल बाजी झनक-झनक कुछ उछ्लें, सैंन…

चूहों का अचार - नज़ीर अकबराबादी

चूहों का अचार फिर गर्म हुआ आन के बाज़ार चूहों का। हमने भी किया खोमचा तय्यार चूहों का। सर पांव कुचल कूट के दो चार चूहों का। जल्दी से कचूमर सा किया मार चूहों का॥ क्या ज़ोर मजे़दार है आचार चूहों का॥ आगे थे कई अब तो हमीं एक हैं चूहे मार। मुद्दत …

हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का - नज़ीर अकबराबादी

हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का हर इक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का सभी के दिल में समाँ भा गया दिवाली का किसी के दिल को मज़ा ख़ुश लगा दीवाली का अजब बहार का है दिन बना दिवाली का जहाँ में यारो अजब तरह क…

अव्वल तो दिल में कीजिए पूजन गनेश जी - नज़ीर अकबराबादी

अव्वल तो दिल में कीजिए पूजन गनेश जी अव्वल तो दिल में कीजिए पूजन गनेश जी। स्तुति भी फिर बखानिए धन-धन गनेश जी। भक्तों को अपने देते हैं दर्शन गनेश जी। वरदान बख़्शते हैं जो देवन गनेश जी। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ अ…

दीपावली पर बेहतरीन शायरी

दीपो के पर्व दिवाली / दीपावली पर शायरो के कुछ अशआर कुछ ग़रीबों की गली में भी दिए जल जाएँ इस से बेहतर भी दिवाली का उजाला क्या है - अजय सहाब आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ - अज़्म शाकरी था इंतिज़ार मनाएँगे मि…

दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम - नज़ीर अकबराबादी

दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम बस तरसते ही चले अफ़सोस पैमाने को हम मय भी है मीना भी है, सागर भी है साकी नहीं दिल में आता है लगा दे, आग मयखाने को हम ताक-ए-अबरू में सनम के क्या खुदाई रह गई अब तो पूजे…

हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी - नज़ीर अकबराबादी

हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी तेरी पिचकारी की तक़दीद में ऐ गुल हर सुबह साथ ले निकले है सूरज की किरण पिचकारी जिस पे हो रंग फिशाँ उसको बना देती है सर से ले पाँव तलक रश…

हिंद के गुलशन में जब आती है होली की बहार - नज़ीर अकबराबादी

हिंद के गुलशन में जब आती है होली की बहार हिन्द के गुलशन में जब आती है होली की बहार। जांफिशानी चाही कर जाती है होली की बहार।। एक तरफ से रंग पड़ता, इक तरफ उड़ता गुलाल। जिन्दगी की लज्जतें लाती हैं, होली की बहार।। जाफरानी सजके चीरा आ मेरे शाकी श…

तब देख बहारे होली की - नज़ीर अकबराबादी

तब देख बहारे होली की जब फागुन रंग झमकते हो तब देख बहारे होली की और दफ़ के शोर खदकते हो तब देख बहारे होली की परियो के रंग दमकते हो तब देख बहारे होली की ख़म शीशए जाम छलकते हो तब देख बहारे होली की महबूब नशे में छलकते हो तब देख बहारे होली की हो ना…

बचपन - नज़ीर अकबराबादी

बचपन क्या दिन थे यारो वह भी थे जबकि भोले भाले । निकले थी दाई लेकर फिरते कभी ददा ले ।। चोटी कोई रखा ले बद्धी कोई पिन्हा ले । हँसली गले में डाले मिन्नत कोई बढ़ा ले ।। मोटें हों या कि दुबले, गोरे हों या कि काले । क्या ऐश लूटते हैं मासूम भोले भाल…

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