होली - नज़ीर अकबराबादी
होली - नज़ीर अकबराबादी क़ातिल जो मेरा ओढ़े इक सुर्ख़ शाल आया खा खा के पान ज़ालिम कर होंठ लाल आया गोया निकल शफ़क़ से बदर-ए-कमाल आया जब मुँह से वो परी-रु मल कर गुलाल आया इक दम तो देख उस को होली को हाल आया ऐश-ओ-तरब का सामान है आज सब घर उस के …