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सत्ता - अटल बिहारी वाजपेयी

सत्ता - अटल बिहारी वाजपेयी मासूम बच्चों, बूढ़ी औरतों, जवान मर्दों की लाशों के ढेर पर चढ़कर जो सत्ता के सिंहासन तक पहुंचना चाहते हैं उनसे मेरा एक सवाल है : क्या मरने वालों के साथ उनका कोई रिश्ता न था? न सही धर्म का नाता, क्या धरती का भी स…

यक्ष प्रश्न - अटल बिहारी वाजपेयी

यक्ष प्रश्न जो कल थे, वे आज नहीं हैं। जो आज हैं, वे कल नहीं होंगे। होने, न होने का क्रम, इसी तरह चलता रहेगा, हम हैं, हम रहेंगे, यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा। सत्य क्या है? होना या न होना? या दोनों ही सत्य हैं? जो है, उसका होना सत्य है, जो…

मौत से ठन गई - अटल बिहारी वाजपेयी

मौत से ठन गई ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िंदगी से बड़ी हो गई मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िंदगी-सिलसिला, आज-कल की नहीं मैं जी भर जिया, मैं मन स…

अटल इरादों वालें अटल - नरेन्द्र सोनकर कुमार सोनकरन

अटल इरादों वालें अटल सीधे-सादे थे सरल भारत के स्वर्णिम कल पुण्यतिथि पर करूं नमन थे अटल इरादों वालें अटल सर्वगुण-संपन्न सफल सच्चे राष्ट्र-नायक असल पुण्यतिथि पर करूं नमन थे अटल इरादों वालें अटल सोच,शोध थे और पहल तन-मन से उज्जवल-निर्मल पुण…

रोते-रोते रात सो गई - अटल बिहारी वाजपेयी

रोते-रोते रात सो गई रोते-रोते रात सो गई झुकी न अलकें झपी न पलकें सुधियों की बारात खो गई दर्द पुराना मीत न जाना बातों ही में प्रात हो गई घुमड़ी बदली बूँद न निकली बिछुड़न ऐसी व्यथा बो गई रोते-रोते रात सो गई - अटल बिहारी वाजपेयी rote ro…

आओ फिर से दिया जलाएँ - अटल बिहारी वाजपेयी

आओ फिर से दिया जलाएँ आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अँधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ हम पड़ाव को समझे मंज़िल लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल वर्त्तमान के मोहजाल में- आने वाला कल…

सपना टूट गया - अटल बिहारी वाजपेयी

सपना टूट गया हाथों की हल्दी है पीली पैरों की मेहँदी कुछ गीली पलक झपकने से पहले ही सपना टूट गया दीप बुझाया रची दीवाली लेकिन कटी न अमावस काली व्यर्थ हुआ आवाहन स्वर्ण सबेरा रूठ गया सपना टूट गया नियति नटी की लीला न्यारी सब कुछ स्वाहा की तै…

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