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सत्ता - अटल बिहारी वाजपेयी

सत्ता - अटल बिहारी वाजपेयी मासूम बच्चों, बूढ़ी औरतों, जवान मर्दों की लाशों के ढेर पर चढ़कर जो सत्ता के सिंहासन तक पहुंचना चाहते हैं उनसे मेरा एक सवाल है : क्या मरने वालों के साथ उनका कोई रिश्ता न था? न सही धर्म का नाता, क्या धरती का भी स…

झूट को सच तो मिरे यार बना सकता है - हनीफ़ दानिश इंदौरी

झूट को सच तो मिरे यार बना सकता है झूट को सच तो मिरे यार बना सकता है ये हुनर सुन तुझे सरदार बना सकता है तुझ को भी हक़ है सियासत में चले जाने का तू अगर रेत की दीवार बना सकता है ये नया दौर-ए-तरक़्क़ी है यहाँ सिक्कों से कोई ख़िर्क़ा कोई दस्तार …

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर - सबीहुद्दीन शोऐबी

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर कारवाँ यूँही भटकता रहे हर बार हुज़ूर नेक निय्यत न हों गर क़ाफ़िला-ए-सालार हुज़ूर वो जो अज़-ख़ुद ही बने बैठे हैं सरदार हुज़…

हुकूमत, हुक्मरान, सरकार पर शायरी

हुकूमत, हुक्मरान, सरकार पर शायरी हुकूमत, हुक्मुरान, सरकार पर कई शायरों ने बहुत कुछ लिखा है | कई शायरों और रचनाकारों ने हुकूमत, सरकार को अपनी रचना/कविता/शायरी में जगह दी है | यह शेर किसी तरह से हुकूमत की आलोचना करते हुए होते है या फिर किसी तरह का व…

सरकार सो रही है - माधव अवाना

सरकार सो रही है मत शिकायत करो कि सरकार सो रही है ज़बाँ पे लगाम रखो कि सरकार सो रही है महँगाई ने बे-शक जीना मुहाल किया है दिल की दिल में रखो कि सरकार सो रही है मत लगाओ नारे न उतरो सड़क पर जेल जाओगे पिटोगे, डरो कि सरकार सो रही है रोज़ दाम बढ़ा…

भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम - अदम गोंडवी

भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम सन सत्तासी नज्र कर दें, मजहबी दंगों के नाम दोस्त, मलियाना के पसमंजर में जाके देखिए दो कदम हिटलर से आगे हैं ये जम्हूरी निजाम है इधर फाक़ाकशी से रात का कटना मुहाल रक़्स क…

कहने को है जनता राज - अदीबी मालिगाँवी

कहने को है जनता राज कहने को है जनता राज लेकिन जनता है मोहताज हुस्न की आँखों में आँसू बह गई उलटी गंगा आज आज है अपनों का रोना कल थे गैरों के मोहताज किस-किस की हम बात सुने हर कोई है, साहब-ए-ताज जिसके पसीने से खिरमन वह खुद रोटी को मोहताज …

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो - निदा फ़ाज़ली

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो रहेगी वा'दों में कब तक असीर ख़ुश-हाली हर एक बार ही कल क्यूँ कभी तो आज भी हो न करते शोर-शराबा तो और क्या करते तुम्हारे शहर में कुछ …

बीस घराने हैं आबाद - हबीब जालिब

बीस घराने हैं आबाद बीस घराने हैं आबाद और करोड़ों हैं नाशाद सद्र अय्यूब ज़िन्दाबाद आज भी हम पर जारी है काली सदियों की बेदाद सद्र अय्यूब ज़िन्दाबाद बीस रूपय्या मन आटा इस पर भी है सन्नाटा गौहर, सहगल, आदमजी बने हैं बिरला और टाटा मुल्क के द…

सभी की बात सुनती हो, वही सरकार होती है - देवेंद्र गौतम

सभी की बात सुनती हो, वही सरकार होती है सभी की बात सुनती हो, वही सरकार होती है हुकूमत में लचीलेपन की भी दरकार होती है सियासत के लिए बर्बाद कर देते हो क्यों आखिर बड़ी मुश्किल से कोई नस्ल जो तैयार होती है खुली आंखों से जो तस्वीर दिखती है निगाहों…

कार सरकार - शैल चतुर्वेदी

कार सरकार नए-नए मंत्री ने अपने ड्राईवर से कहा- "आज कार हम चलायेंगे।" ड्राईवर बोला- "हम उतर जायेंगे हुज़ूर! चलाकर तो देखिये आपकी आत्मा हिल जायेगी ये कार है सरकार नहीं, जो भगवान भरोसे चल जायेगी।" - शैल चतुर्वेदी car sar…

ख़ूब आज़ादी-ए-सहाफ़त है - हबीब जालिब

ख़ूब आज़ादी-ए-सहाफ़त है ख़ूब आज़ादी-ए-सहाफ़त है नज़्म लिखने पे भी क़यामत है दा'वा जम्हूरियत का है हर-आन ये हुकूमत भी क्या हुकूमत है धाँदली धोंस की है पैदावार सब को मा'लूम ये हक़ीक़त है ख़ौफ़ के ज़ेहन-ओ-दिल पे साए हैं किस की इज़्ज़…

मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता - अहमद नदीम क़ासमी

मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता एक ज़र्रा भी तो बेकार नहीं हो सकता इस क़दर प्यार है इंसाँ की ख़ताओं से मुझे कि फ़रिश्ता मिरा मेआ'र नहीं हो सकता ऐ ख़ुदा फिर ये जहन्नम का तमाशा किया है तेरा शहक…

रिश्वत - जोश मलीहाबादी

रिश्वत लोग हम से रोज़ कहते हैं, ये आदत छोड़िए ये तिजारत है खिलाफे-आदमियत छोड़िए इस से बदतर लत नहीं है कोई, ये लत छोड़िए रोज़ अख़बारों में छपता है कि रिश्वत छोड़िए भूल कर भी जो कोई लेता है रिश्वत, चोर है आज क़ौमी पागलों में रात दिन ये शोर ह…

इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगे - बेकल उत्साही

इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगे इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगे मंदिर-मस्जिद कुछ नहीं होंगे घर-घर में मयख़ाने होंगे जीवन के इतिहास में ऐसी एक किताब लिखी जाएगी जिसमें हक़ीक़त औरत होगी मर्द सभी अफ़्साने होंगे राजनीति व्यवसा…

जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया - रमेश तैलंग

जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया खाली हथेली पर दुआ का सिक्का धर दिया। कब तक निभाते दुश्मनी हम वक्त से हर दिन इस बार जब मिला वो तो बाँहों में भर लिया। उस गाँव के बाशिंदों में अजीब रस्म है, बच्ची के जन…

न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना

न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ ग़ज़ल मै आप बीती को मै जग बीती बनाता हूँ ग़ज़ल वो सिंफे-नाजुक है जिसे अपनी रफाक़त से वो महबूबा बना लेता है मै बेटी बनाता हूँ मुझे इस शहर की सब लड़किया आदाब करती है …

संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है - अनवर जलालपुरी

संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है राह सबकी है मगर अज़्म-ए-सफ़र मेरा है सारे फलदार दरख्तों पे तसर्रुफ उसका जिसमे पत्ते भी नहीं है वह शज़र मेरा है दर व दीवार पे सब्जे की हुकूमत है यहाँ होगा ग़ालिब का कभी अब त…

मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है - बशीर बद्र

मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सबसे खूबसूरत है कभी-कभी कोई इंसान ऐसा लगता है पुराने शहर में जैसे नयी ईमारत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी खूबसूरत है ये ज़…

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