सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं - अदम गोंडवी
सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है कोठियों से मुल्क के मेआर को मत आँकिए असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है जिस शहर में मुंतज़िम अंधे हों जल्वागाह के उस शहर में रोशन…