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सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं - अदम गोंडवी

सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं दिल रखकर हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है कोठियों से मुल्क के मेआर को मत आँकिए असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है जिस शहर में मुंतज़िम अंधे हों जल्वागाह के उस शहर में रोशन…

भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम - अदम गोंडवी

भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम भुखमरी, बेरोजगारी, तस्करी के एहतिमाम सन सत्तासी नज्र कर दें, मजहबी दंगों के नाम दोस्त, मलियाना के पसमंजर में जाके देखिए दो कदम हिटलर से आगे हैं ये जम्हूरी निजाम है इधर फाक़ाकशी से रात का कटना मुहाल रक़्स क…

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को - अदम गोंडवी

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आप को जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर मर गई फुलिया बिचारी एक कुएँ में डूब कर है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी आ रही है सामने से हरखु…

विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्‍यास लिखा है - अदम गोंडवी

विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्‍यास लिखा है विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्‍यास लिखा है बूढ़े बरगद के वल्‍कल पर सदियों का इतिहास लिखा है क्रूर नियति ने इसकी किस्‍मत से कैसा खिलवाड़ किया है मन के पृष्‍ठों पर शाकुंतल अधरों पर संत्र…

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग - अदम गोंडवी

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग हमसाये के लहू में नहाए हुए हैं लोग ये तिश्नगी गवाह है घायल है इनकी रूह चेहरे ही तबस्सुम से सजाए हुए हैं लोग ग़ैरत मरी तो वाक़ई इंसान मर गया जीने की सिर्फ़ रस्म निभाए हुए…

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी - अदम गोंडवी

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी । फिर कहाँ से बीच में मस्जिद और मंदर आ गए । जिनके चेहरे पर लिखी थी जेल की ऊँची फ़सील, रामनामी ओढ़कर संसद के अन्दर आ गए । देखना सुनना व सच कहना जिन्हें भाता नहीं कुर्सिय…

कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीको रकीब के - अदम गोंडवी

कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीको रकीब के कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीको रकीब के शोलो में अब ढलेंगे ये आंसू गरीब के इक हम है भुखमरी के जहन्नुम में जल रहे इक आप है दुहरा रहे किस्से नसीब के उतरी है जबसे गाँव में फाकाकशी की शाम बेमानी होके रह गए रिश्ते करीब …

टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो - अदम गोंडवी

टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो बह गए कितने सिकंदर वक्त के सैलाब में, अक्ल इस कच्चे घड़े से कैसे दरिया पार हो सभ्यता ने मौत से डरकर उठाये है कदम, ताज की का…

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये - अदम गोंडवी

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं; जुम्मन का घर…

काजू भुने पलेट में व्हिस्की गिलास में - अदम गोंडवी

काजू भुने पलेट में व्हिस्की गिलास में काजू भुने पलेट में, व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है खादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनाएं तो किस तरह जो आ गये फुटपाथ पर घर की …

उनका दावा मुफलिसी का मोर्चा सर हो गया - अदम गोंडवी

उनका दावा मुफलिसी का मोर्चा सर हो गया उनका दावा मुफलिसी का मोर्चा सर हो गया पर हकीकत ये है मौसम और बदतर हो गया बंद कल को क्या किया मुखिया के खेतों में बेगार अगले दिन ही एक होरी और बेघर हो गया जब हुई नीलाम कोठे पर किसी की आबरू फिर अहल्या का स…

अदम गोंडवी और उनकी शायरी

अदम गोंडवी और उनकी शायरी 22 अक्टूम्बर 1947 को गोस्वामी तुलसीदास के गुरु स्थान सूकर क्षेत्र के करीब परसपुर (गोंडा) के आटा ग्राम में स्व. श्रीमती मांडवी सिंह एवं श्री देवी कलि सिंह के पुत्र के रूप में आपका जन्म हुआ, जन्म नाम था रामनाथ सिंह | और आप ब…

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