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दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती - निदा फ़ाज़ली

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती कुछ लोग यूँही शहर में हम से भी ख़फ़ा हैं हर एक से अपनी भी तबीअ'त नहीं मिलती देखा है जिसे मैं ने कोई और था शायद वो कौन …

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है - निदा फाजली

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम हर वक़्त का रोना तो बे-कार का रोना है बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस राह से बचन…

तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे - निदा फ़ाज़ली

तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं देर न करना घर आने में वर्ना घर खो जाएँगे बच्चों के छोटे हाथों को च…

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया - निदा फ़ाज़ली

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया चार घरों के एक मोहल्ले के बाहर भी है आबादी जैसी तुम्हें दिखाई दी है सब की वही नहीं है दुनिया घ…

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो - निदा फ़ाज़ली

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो रहेगी वा'दों में कब तक असीर ख़ुश-हाली हर एक बार ही कल क्यूँ कभी तो आज भी हो न करते शोर-शराबा तो और क्या करते तुम्हारे शहर में कुछ …

घर से निकले तो हो, सोचा भी किधर जाओगे - निदा फाज़ली

घर से निकले तो हो, सोचा भी किधर जाओगे घर से निकले तो हो, सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं, बिखर जाओगे इतना आसाँ नहीं, लफ़्ज़ों पे भरोसा करना घर की दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे शाम होते ही सिमट जाएँगे सारे रस्ते बहते दरिया से जहाँ होगे…

मन बैरागी तन अनूरागी क़दम क़दम दुश्वारी है - निदा फ़ाज़ली

मन बैरागी तन अनूरागी क़दम क़दम दुश्वारी है मन बैरागी तन अनूरागी क़दम क़दम दुश्वारी है जीवन जीना सहल न जानो बहुत बड़ी फ़नकारी है औरों जैसे हो कर भी हम बा-इज़्ज़त हैं बस्ती में कुछ लोगों का सीधा-पन है कुछ अपनी अय्यारी है जब जब मौसम झूमा हम ने क…

तुम्हारे खत - निदा फ़ाज़ली

तुम्हारे खत वो जो तुम ने लिखे थे कभी कभी मुझ को मै आज सोच रहा हूँ, उन्हें जला डालू ! बुझा बुझा सा चला आ रहा हूँ आफिस से दिमाग गर्म है जलते हुए तवे की तरह नहिफ़ हाथो से फिर फाइलों के गारो में उदास दिन का हिमालय गिरा के आया हूँ ! बदन निढाल है…

वालिद पर फातिहा - निदा फ़ाज़ली

वालिद पर फातिहा तुम्हारी कब्र पर मैं फातिहा पढ़ने नहीं आया मुझे मालूम था तुम मर नहीं सकते तुम्हारी मौत की सच्ची ख़बर जिसने उड़ाई थी वो झूठा था वो तुम कब थे कोई सूखा हुआ पत्ता हवा से हिल के टूटा था मेरी आँखें तुम्हारे मंजरों में कैद हैं अ…

आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बरसात लिखो - निदा फ़ाज़ली

आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बरसात लिखो आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ़ को बरसात लिखो जिस से नाराज हो उस शख्स की हर बात लिखो जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाकी है उसी अंजान शहंशाह की मुलाकात लिखो जिस्म मस्जिद की तरह आँखे नमाजो जैसी जब गुनाहों में इबा…

निदा फ़ाज़ली उर्दू शायरी का आफ़ताब

निदा फ़ाज़ली उर्दू शायरी का आफ़ताब उनकी पूर्ण जीवनी यहाँ पढ़ सकते है निदा फ़ाज़ली शायरी को जानने वालो के लिए ये कोई नया नाम नहीं है और यह नाम उर्दू शायरी में एक अलग मुकाम रखता है । आप वो शायर है जो फ़ारसी उर्दू जो की उर्दू शायरी में बरसो से चली आ रही थी उ…

यूँ तो गुज़र रहा है हर एक पल खुशी के साथ - निदा फ़ाज़ली

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है, दो आँखों में एक से हँसना, एक से रोना है | अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं 8 फरवरी 2016 [08/02/2016]) अपने ही शेरो को सच्चाई में तब्दील करते हुए शायर निदा फ़ाज़ली साहब हमें विदा कह गए । यूँ तो गुज़र र…

अपनी तरह से बोलने वाला - निदा फ़ाज़ली

अपनी तरह से बोलने वाला अपनी तरह से बोलने वाला अपनी तरह से सोचने वाला अपनी तरह से अपने घर के दरवाजो को खोलने वाला अपनी तरह से लिखने वाला टीवी पर अपने चेहरे-सा दिखने वाला पकिस्तान के मुस्लिम जैसा हिन्दुस्तान का हिन्दू भी अब अपने देश के ह…

राक्षस था न खुदा था पहले- निदा फाज़ली

राक्षस था न खुदा था पहले राक्षस था न खुदा था पहले आदमी कितना बड़ा था पहले आसमां, खेत, समंदर, सब लाल खून कागज पे उगा था पहले मै वो मक्तूल जो क़ातिल न बना हाथ मेरा भी उठा था पहले अब किसी से भी शिकायत न रही जाने किस-किस से गिला था पहले शहर…

ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें

ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें इतिहास सिर्फ़ राजाओं और बादशाहों की हार-जीत का नहीं होता. इतिहास उन छोटी-बड़ी वस्तुओं से भी बनता है जो अपने समय से जुड़ी होती हैं और समय गुज़र जाने के बाद ख़ुद इतिहास बन जाती हैं | ये बज़ाहिर मामूली चीज़ें बहुत ग़ैरमामू…

ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती

ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती हमारे एक दोस्त का कहना है कि ग़ज़ल दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती है। बतौर शायर आप भले ही दावा करें कि आपने नई ज़मीन ईजाद की है मगर सच यही है कि आप दूसरों की ज़मीन पर ही शायरी की फ़सल उगाते हैं। कोई ऐसा क़ाफ़िया, र…

एक थे शमीम फ़रहत - निदा फाज़ली

एक थे शमीम फ़रहत - निदा फाज़ली मै कौन हूँ - मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबैर से था | वो एक स्थानीय गर्ल्स हाई स्कूल में टीचर थी, इन सवालों को पूछने वाला ए…

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो - निदा फाजली

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो सिर्फ़ आँखों से ही दुनिया नहीं देखी जाती दिल की धड़कन को भी बीनाई बना कर देखो पत्थरों में भी ज़बाँ होती है दिल होते हैं अपने घर के…

खुदा तो खैर मुस्लमा था

खुदा तो खैर मुस्लमा था आज़ादी के समय के आसपास लिखे गये तीन शेरो के बारे में पढते है जिनके बारे में मशहूर शायर निदा फाज़ली लिख रहे है और विश्लेषण कर रहे है | जगन्नाथ आज़ाद भारतीय साहित्य का जाना पहचाना नाम है| शायरी विरासत में मिली| उनके पिता डाक्…

ग़ालिब - निदा फ़ाज़ली

ग़ालिब - निदा फ़ाज़ली निदा फ़ाज़ली के बारे में जितना कहा जाये उतना कम है | आप एक मशहूर शायर और लेखक है, आपने कई शायरों पर लेख लिखे है जिनमे से ग़ालिब पर लिखा यह लेख पेश है | ग़ालिब अपने युग में आने वाले कई युगों के शायर थे, अपने युग में उन्हें इत…

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