मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में - इक़बाल साजिद
मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में भरो न हद से ज़ियादा हवा ग़ुबारे में तमाशा ख़त्म हुआ धूप के मदारी का सुनहरी साँप छुपे शाम के पिटारे में जिसे मैं देख चुका उस को लोग क्यूँ देखें न छोड़ी कोई भी बाक़ी कशिश नज…