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मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में - इक़बाल साजिद

मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में मुझे नहीं है कोई वहम अपने बारे में भरो न हद से ज़ियादा हवा ग़ुबारे में तमाशा ख़त्म हुआ धूप के मदारी का सुनहरी साँप छुपे शाम के पिटारे में जिसे मैं देख चुका उस को लोग क्यूँ देखें न छोड़ी कोई भी बाक़ी कशिश नज…

फ़ुर्सत में रहा करते हैं फ़ुर्सत से ज़्यादा - सुल्तान अख़्तर

फ़ुर्सत में रहा करते हैं फ़ुर्सत से ज़्यादा फ़ुर्सत में रहा करते हैं फ़ुर्सत से ज़्यादा मसरूफ़ हैं हम लोग ज़रूरत से ज़्यादा मिलता है सुकूँ मुझ को क़नाअत से ज़्यादा मसरूर हूँ मैं अपनी मसर्रत से ज़्यादा चलता ही नहीं दानिश ओ हिकमत से कोई काम बन…

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती - निदा फ़ाज़ली

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती कुछ लोग यूँही शहर में हम से भी ख़फ़ा हैं हर एक से अपनी भी तबीअ'त नहीं मिलती देखा है जिसे मैं ने कोई और था शायद वो कौन …

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