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ख़्वाब का शायर फैज़ फ़ैज़ - मंगलेश डबराल

ख़्वाब का शायर फ़ैज़ - मंगलेश डबराल सन 1972 में फ़ैज़ को नई दिल्ली में एफ्रो एशियाई लेखक सम्मलेन में पहली बार देखा था, लेकिन ठीक से नही देखा था क्योकि तब हम लोग सम्मेलन का विरोध और बहिष्कार कर रहे थे | एफ्रो-एशियाई लेखक सम्मलेन का रिश्ता भारतीय कम्यु…

दिनकर की कविताओं में उनका जीवन संघर्ष - जियाउर रहमान जाफरी

दिनकर की कविताओं में उनका जीवन संघर्ष - डॉ. जियाउर रहमान जाफरी हिंदी में छायावाद के पतन के बाद जिस स्वच्छंदतावाद की नींव पड़ी दिनकर उसके सबसे बड़े कवि थे | दिनकर का गद्य और पद्य दोनों में समान अधिकार था | उनका अपना शब्द भंडार और कविता की अपनी शैली …

दाऊद अख़्तर काबरी - किताबों में अटकी हुई हर सांस

दाऊद अख़्तर काबरी - किताबों में अटकी हुई हर सांस उम्र लगभग पचासी साल | आँखें बिल्कुल धंसी हुई | पूरे हाथों में कंपकंपी | लोगों से मिलते हुए मुहब्बत का सैलाब | आंखों में मद्धिम सी रौशनी | हर एक सांस लेने में तकलीफ | आह और कराह, लेकिन दवाई से ज़्यादा क…

खूब पहचान लो असरार हूँ मै लेख

खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै लेख यह लेख मजाज़ पर लिखी गयी किताब मजाज़ और उनकी शायरी का एक अंश है आधुनिक शायरी का यह प्रिय शायर 19 अक्टूम्बर सन 1911 में अवध के एक प्रसिद्द कस्बे रदौली में पैदा हुआ | पिता सिराजुल हक रदौली के पहले व्यक्ति थे जि…

निदा फ़ाज़ली उर्दू शायरी का आफ़ताब

निदा फ़ाज़ली उर्दू शायरी का आफ़ताब उनकी पूर्ण जीवनी यहाँ पढ़ सकते है निदा फ़ाज़ली शायरी को जानने वालो के लिए ये कोई नया नाम नहीं है और यह नाम उर्दू शायरी में एक अलग मुकाम रखता है । आप वो शायर है जो फ़ारसी उर्दू जो की उर्दू शायरी में बरसो से चली आ रही थी उ…

इंटरव्यू से घबराता हूँ - इब्ने इंशा

इंटरव्यू से घबराता हूँ इब्ने इंशा के एक पुराने इंटरव्यू के कुछ हिस्से .... इंटरव्यू से घबराता हूँ, सवाल छोटे होने चाहिए, नहीं हुए तो! तो जवाब छोटे कर दूँगा | मैंने ग्यारह साल से ही शायरी शुरू कर दी! छटी जमात से ही... तब तो ये हाल है! शेर मोहम्…

खुदा तो खैर मुस्लमा था

खुदा तो खैर मुस्लमा था आज़ादी के समय के आसपास लिखे गये तीन शेरो के बारे में पढते है जिनके बारे में मशहूर शायर निदा फाज़ली लिख रहे है और विश्लेषण कर रहे है | जगन्नाथ आज़ाद भारतीय साहित्य का जाना पहचाना नाम है| शायरी विरासत में मिली| उनके पिता डाक्…

मेरे मेहमान - मजाज़ लखनवी -2

मेरे मेहमान - मजाज़ लखनवी -2 इसकी पिछली कड़ी आप यहाँ पढ़ सकते है | जो लोग मजाज़ को उसकी बेरोजगारी के लिए निशाना बनाते है, वो नहीं जानते की इस बेरोजगारी के पीछे उसकी नाकाम जद्दोजहद की कटनी लंबी दास्तान है | उसने कई मुलाज़मते की, लेकिन मुलाज़मत की …

मेरा मेहमान मजाज़

मेरा मेहमान मजाज़ यादे याद रह जाती है और यही हमें कुछ वक्त के बाद सताती है, रुलाती है और चेहरे पर मुस्कराहट का कारण भी बन जाती है कुछ इसी तरह की यादे जाँनिसार अख्तर साहब इस लेख में बता रहे है अपने अज़ीज़ दोस्त मजाज़ लखनवी के बारे में... ये सन 45 की…

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