ibne-insha

जोग बिजोग की बातें झूठी, सब जी का बहलाना हो - इब्ने इंशा

जोग बिजोग की बातें झूठी, सब जी का बहलाना हो जोग बिजोग की बातें झूठी, सब जी का बहलाना हो| फिर भी हम से जाते जाते एक ग़ज़ल सुन जाना हो| सारी दुनिया अक्ल की बैरी, कौन यहां पर सयाना हो, नाहक़ नाम धरें सब हम को, दीवाना दीवाना हो| तुम ने तो इक रीत …

तारीख के चंद दौर - इब्ने इंशा

तारीख के चंद दौर - इब्ने इंशा राहो में पत्थर जलसों में पत्थर सीनों में पत्थर अक्लो में पत्थर आस्तानो में पत्थर दीवानों में पत्थर पत्थर ही पत्थर यह जमाना पत्थर का जमाना कहलाता है देंगे ही देंगे चमचे ही चमचे सिक्के ही सिक्के सोना ही स…

हमारा देश - इब्ने इंशा

हमारा देश - इब्ने इंशा "ईरान में कौन रहता है?" "ईरान में ईरानी कौम रहती है।" "इंग्लिस्तान (इंग्लैंड) में कौन रहता है?" "इंग्लिस्तान में अंग्रेज कौम रहती है।" "फ्रांस में कौन रहता है?" "फ्र…

इंटरव्यू से घबराता हूँ - इब्ने इंशा

इंटरव्यू से घबराता हूँ इब्ने इंशा के एक पुराने इंटरव्यू के कुछ हिस्से .... इंटरव्यू से घबराता हूँ, सवाल छोटे होने चाहिए, नहीं हुए तो! तो जवाब छोटे कर दूँगा | मैंने ग्यारह साल से ही शायरी शुरू कर दी! छटी जमात से ही... तब तो ये हाल है! शेर मोहम्…

उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा - इब्ने इंशा

उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा वो शहर वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगी वो दर्द कि उट्ठा था यहाँ याद रहेगा हम शौक़ के शोले की लपक भूल भी जाएँ वो शम-ए-फ़सुर्दा का धुआँ याद रहेग…

पीत के रोगी सब कुछ बुझे जाने होते है - इब्ने इंशा

पीत के रोगी सब कुछ बुझे जाने होते है पीत के रोगी सब कुछ बुझे जाने होते है, इन लोगो के ईट न मारो, कहाँ दीवाने होते है आहे इनकी उमड़ते बादल आंसू इनके अब्रे-मतीर, दश्त में इनको बाग़ लगाने शहर बसाने होते है हम न कहेंगे आप है पीत के दुश्मन मन के …

कल चौदवीं की रात थी, शब् भर रहा चर्चा तेरा - इब्ने इंशा

कल चौदवीं की रात थी, शब् भर रहा चर्चा तेरा कल चौदवीं की रात थी, शब् भर रहा चर्चा तेरा कुछ ने कहा ये चाँद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा हम भी वही मौजूद थे, हमसे भी सब पूछा किये हम हस दिए, हम चुप रहे, मंजूर था पर्दा तेरा इस शहर में किस से मिले, हम…

हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है - इब्ने इंशा

हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है, कुछ अपनी जसारत होती है, कुछ उनका इशारा होता है काटने लगी राते आँखों में, देख नहीं पलकों पर अक्सर, याँ शामे-गरीबां का जुगनू या सुबह का तारा होता…

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