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तुम्हारा प्यार लड्डुओं का थाल है - मंगलेश डबराल

तुम्हारा प्यार लड्डुओं का थाल है एक पहाड़ी लोकगीत से प्रेरित तुम्हारा प्यार लड्डुओं का थाल है जिसे मैं खा जाना चाहता हूँ तुम्हारा प्यार एक लाल रूमाल है जिसे मैं झंडे-सा फहराना चाहता हूँ तुम्हारा प्यार एक पेड़ है जिसकी हरी ओट से मैं तारॊं को…

ख़्वाब का शायर फैज़ फ़ैज़ - मंगलेश डबराल

ख़्वाब का शायर फ़ैज़ - मंगलेश डबराल सन 1972 में फ़ैज़ को नई दिल्ली में एफ्रो एशियाई लेखक सम्मलेन में पहली बार देखा था, लेकिन ठीक से नही देखा था क्योकि तब हम लोग सम्मेलन का विरोध और बहिष्कार कर रहे थे | एफ्रो-एशियाई लेखक सम्मलेन का रिश्ता भारतीय कम्यु…

घटती हुई ऑक्सीजन - मंगलेश डबराल

घटती हुई ऑक्सीजन अ क्सर पढ़ने में आता है दुनिया में ऑक्सीजन कम हो रही है कभी ऐन सामने दिखाई दे जाता है कि वह कितनी तेज़ी से घट रही है रास्तों पर चलता हूँ, खाना खाता हूँ, पढ़ता हूँ, सोकर उठता हूँ तो एक लंबी जमहाई आती है जैसे ही किसी बंद वातानु…

आधा शहर - मंगलेश डबराल

आधा शहर - मंगलेश डबराल आधा शहर नाक पर रुमाल रखकर पार करना पड़ता है आधा शहर कम से कम कपड़ों में आपका स्वागत करता है! आधा शहर त्वचा और देह है आधा रेत और राख है आधा शहर रात में दिन है आधा शहर दिन में रात है! आधा शहर भीषण खानपान है आधा शहर गहरा न…

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