सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है - असरार-उल-हक़ मजाज़
सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है आज किन हाथों में दिल का साज़ है तू जहाँ है ज़मज़मा-पर्दाज़ है दिल जहाँ है गोश-बर-आवाज़ है हाँ ज़रा जुरअत दिखा ऐ जज़्ब-ए-दिल हुस्न को पर्दे पे अपने नाज़ है हम-नशीं दिल की हक़ीक़त क्या कहूँ …