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अमृतसर में रावण पुतला दहन के दौरान हुए रेल दुर्घटना में सैकड़ों लोगों के मारे जाने पर हरिवंशराय बच्चन की लिखी यह कविता आज के दौर में प्रासंगिक लगी। आप सभी के लिए पेश है :

ना दिवाली होती और ना पठाखे बजते
ना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होते
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,

....काश कोई धर्म ना होता....
....काश कोई मजहब ना होता....
ना अर्ध देते, ना स्नान होता

ना मुर्दे बहाए जाते, ना विसर्जन होता
जब भी प्यास लगती, नदियों का पानी पीते

पेड़ों की छाव होती, नदियों का गर्जन होता
ना भगवानों की लीला होती, ना अवतारों का नाटक होता

ना देशों की सीमा होती , ना दिलों का फाटक होता
ना कोई झुठा काजी होता, ना लफंगा साधु होता

ईन्सानीयत के दरबार मे, सबका भला होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता,

....काश कोई धर्म ना होता.....
....काश कोई मजहब ना होता....
कोई मस्जिद ना होती, कोई मंदिर ना होता

कोई दलित ना होता, कोई काफ़िर ना होता
कोई बेबस ना होता, कोई बेघर ना होता

किसी के दर्द से कोई बेखबर ना होता
ना ही गीता होती, और ना कुरान होती,

ना ही अल्लाह होता, ना भगवान होता
तुझको जो जख्म होता, मेरा दिल तड़पता.

ना मैं हिन्दू होता, ना तू भी मुसलमान होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता।
- हरिवंशराय बच्चन

Roman

naa diwali hoti aur naa pathakhe bajte
naa eid ki alamat, naa bakre shaheed hote
tu bhi insaan hota, mai bhi insaan hota

....kaash koi dharm naa hota ....
....kaash koi majhab naa hota ....
naa ardh dete, naa snan hota

naa murde bahaye jaate, naa visarjan jota
jab bhi pyas lagti, nadiyo ka paani pite

pedo ki chhanv hoti, nadiyo ka gajan hota
naa bhagwano ki leela hoti, naa avtaro ka natak hota

naa desho ki seema hoti, naa dilo ka faatk hota
naa koi jhutha kaazi hota, naa lafanga sadhu hota

insaniyat ke darbaar me, sabka bhala hota
tu bhi insaan hota, mai bhi insaan hota

....kaash koi dharm naa hota ....
....kaash koi majhab naa hota ....
koi masjid naa hoti, naa koi mandir hota

koi dalit naa hota, koi kafir naa hota
koi bebas naa hota, koi beghar naa hota

kisi ke dard se koi bekhabar naa hota
naa hi geeta hoti aur naa kuraan hoti

naa hi allah hota, naa bhagwan hota
tujhko jo jakhm hota, mera dil tadpata

naa mai hindu hota, naa tu bhi musalman hota
tu bhi insaan hoa, mai bhi insaan hota
- Harivansh Rai Bachchan
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