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दीपावली (नज़्म) - आदिल हयात

दीपावली - आदिल हयात जब से आई है दीपावली हर तरफ़ छाई है रौशनी हर जगह चाहतों के दिए शाम होते ही जलने लगे फुल-झड़ियों का बाज़ार है ये पटाख़ों का तेहवार है दीपों का है सुहाना समाँ जिन से धरती बनी कहकशाँ जितने रॉकेट पटाख़े चले आसमाँ पर ल…

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