तुम दीवाली बनकर जग का तम दूर करो - गोपालदास नीरज
तुम दीवाली बनकर जग का तम दूर करो तुम दीवाली बनकर जग का तम दूर करो, मैं होली बनकर बिछड़े हृदय मिलाऊँगा! सूनी है मांग निशा की चंदा उगा नहीं हर द्वार पड़ा खामोश सवेरा रूठ गया, है गगन विकल, आ गया सितारों का पतझर तम ऐसा है कि उजाले का दिल टूट गया,…