चिड़िया - शरद जोशी
चिड़िया 'च' ने चिड़िया पर कविता लिखी। उसे देख 'छ' और 'ज' ने चिड़िया पर कविता लिखी। तब त, थ, द, ध, न, ने फिर प, फ, ब, भ और म, ने 'य' ने, 'र' ने, 'ल' ने इस तरह युवा कविता की बारहखड़ी के सारे सदस्यो…
चिड़िया 'च' ने चिड़िया पर कविता लिखी। उसे देख 'छ' और 'ज' ने चिड़िया पर कविता लिखी। तब त, थ, द, ध, न, ने फिर प, फ, ब, भ और म, ने 'य' ने, 'र' ने, 'ल' ने इस तरह युवा कविता की बारहखड़ी के सारे सदस्यो…
अतिथि! तुम कब जाओगे तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि! तुम कब घर से निकलोगे मेरे मेहमान! तुम जिस सोफे पर टाँगें पसारे बैठे हो, उसके ठीक सामने एक कैलेंडर लगा है जिसकी फड़फड़ाती तारीखें मैं तुम्हे…
पानी की समस्या शरद जोशी जी का यह व्यंग्य लेख आप सभी के लिए पेश है यह लेख कम नाटक ज्यादा प्रतीत होता है सो इसे नाटक के रूप में ही प्रस्तुत किया है आशा है आप सभी को पसंद आएगा | वे लोग जो टीवी देखते हैं अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री वास्तवि…
सरकार का जादू : जादू की सरकार जादूगर मंच पर आकर खड़ा हो गया। वह एयर इंडिया के राजा की तरह झुका और बोला, "देवियो और सज्जनो, हम जो प्रोग्राम आपके सामने पेश करने जा रहे हैं, वह इस मुलुक का, इस देश का प्रोग्राम है जो बरसों से चल रहा है और मशहूर है।…
जिसके हम मामा हैं एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। 'मामाजी! मामाजी!' - लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहताने नहीं। बोले - 'तुम कौन?' 'मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?' 'मुन्ना?' वे…
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