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चीनी चाय पीते हुए - अज्ञेय

चीनी चाय पीते हुए चाय पीते हुए मैं अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ। आपने कभी चाय पीते हुए पिता के बारे में सोचा है? अच्छी बात नहीं है पिताओं के बारे में सोचना। अपनी कलई खुल जाती है। हम कुछ दूसरे हो सकते थे। पर सोच की कठिनाई यह है कि …

एकाकी तारा - अज्ञेय

एकाकी तारा - अज्ञेय ऐसा भी सूर्यास्त कहाँ हुआ होगा... उस पहाड़ की आड़ में से सूर्य का थोड़ा-सा अंश दीख पड़ रहा है, और उसके ऊपर आकाश में, बहुत दूर तक फैली हुई एक लम्बी वारिदमाला लाल-लाल दीख रही है, मानो प्रकृति के बालों की लाल-लाल लटें... या, जैसे …

सम्भावनाएँ - अज्ञेय

सम्भावनाएँ अब आप हीं सोचिये कि कितनी सम्भावनाएँ हैं कि मैं आप पर हँसूं और आप मुझे पागल करार दे दें याकि आप मुझ पर हँसें और आप हीं मुझे पागल करार दे दें | या कि आपको कोई बताए कि मुझे पागल करार किया गया और आप केवल हँस दें. या कि हँसी की बात जान…

रोज़ (गैंग्रीन) - अज्ञेय

यह कहानी सर्वप्रथम 'गैंग्रीन' नाम से प्रकाशित हुई थी लेकिन बाद में इसका शीर्षक बदलकर अज्ञेय ने इसे 'रोज़' शीर्षक से प्रकाशित की | 'रोज़' शीर्षक कहानी अज्ञेय के कहानी संकलन 'विपथगा' के पहले संस्करण में है परन्तु …

जो पुल बनाएँगे - अज्ञेय

जो पुल बनाएँगे जो पुल बनाएँगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएँगे। सेनाएँ हो जाएँगी पार मारे जाएँगे रावण जयी होंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बंदर कहलाएँगे। - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय jo pul banayenge jo pul b…

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