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क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी - संदीप ठाकुर

क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी चाँद के गालों पे पड़ते देखे हैं डिम्पल कभी नाम मेरा याद करके चुस्कियों के बीच में क्या हुई है चाय के कप में तिरे हलचल कभी जानता हूँ उम्र भर तू साथ दे सकता नहीं प…

चाय पर शायरी

चाय पर शायरी चाय में कुछ अलग ही नशा होता है और चाय पसंद करने वाले चाय के बीना नहीं रह सकते फिर चाहे वह कोई भी मौसम हो | कुछ लोगो को पढते वक्त और काम करते वक्त बीच-बीच में चाय की जरुरत लगती है | अगर आपको चाय पसंद है तो यह चाय पर शायरी भी पसंद आएगी,…

जो उस के सामने मेरा ये हाल आ जाए - वसी शाह

जो उस के सामने मेरा ये हाल आ जाए जो उस के सामने मेरा ये हाल आ जाए तो दुख से और भी उस पर जमाल आ जाए मिरा ख़याल भी घुँगरू पहन के नाचेगा अगर ख़याल को तेरा ख़याल आ जाए हर एक शाम नए ख़्वाब उस पे काढ़ेंगे हमारे हाथ अगर तेरी शाल आ जाए इन्ही दिनों…

तमाशे चुटकुले ताली में मत रख - प्रताप सोमवंशी

तमाशे चुटकुले ताली में मत रख तमाशे चुटकुले ताली में मत रख अदब को ऐसी बद-हाली में मत रख कि ज़हर हो जाएँगे पकवान सारे उन्हें एहसास की थाली में मत रख ख़यालों का परिंदा कह रहा है मुझे आकाश दे जाली में मत रख उदासी ख़ून में घुल जाएगी फिर उसे तू…

चीनी चाय पीते हुए - अज्ञेय

चीनी चाय पीते हुए चाय पीते हुए मैं अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ। आपने कभी चाय पीते हुए पिता के बारे में सोचा है? अच्छी बात नहीं है पिताओं के बारे में सोचना। अपनी कलई खुल जाती है। हम कुछ दूसरे हो सकते थे। पर सोच की कठिनाई यह है कि …

इतवार - गुलज़ार

इतवार - गुलज़ार हर इतवार यही लगता है देरे से आँख खुली है मेरी, या सूरज जल्दी निकला है जागते ही मैं थोड़ी देर को हैराँ-सा रह जाता हूँ बच्चों की आवाज़ें हैं न बस का शोर गिरजे का घंटा क्यों इतनी देर से बजता जाता है क्या आग लगी है? चाय...? चाय…

कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है - दिनेश कुमार

कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है सिर्फ़ कहने को हक़-बयानी है इश्क़-ए-फ़ानी रवाँ हुआ जब जब हसरतों पर चढ़ी जवानी है नाव साहिल पे आ के डूब गई ना-ख़ुदाओं की मेहरबानी है जो दिए ओट में थे वो ही बुझे ये हवाओं की पासबानी है…

टूटी हुई बिखरी हुई चाय - शमशेर बहादुर सिंह

टूटी हुई बिखरी हुई चाय टूटी हुई बिखरी हुई चाय की दली हुई पाँव के नीचे पत्तियाँ मेरी कविता बाल, झड़े हुए, मैले से रूखे, गिरे हुए, गर्दन से फिर भी चिपके ...कुछ ऐसी मेरी खाल, मुझसे अलग-सी, मिट्टी में मिली-सी दोपहर बाद की धूप-छाँह में खड़ी इं…

रक़म इतनी इकट्ठी हो गई थी - ख़ालिद महबूब

रक़म इतनी इकट्ठी हो गई थी रक़म इतनी इकट्ठी हो गई थी मगर वो चीज़ महँगी हो गई थी हम इतनी गर्म-जोशी से मिले थे हमारी चाय ठंडी हो गई थी तुम्हारे बा'द जितना रोए थे हम तबीअ'त उतनी अच्छी हो गई थी समझ कर हम दवाई पी गए थे तुम्हारी बात कड़…

देर में सो कर उठने वाले - सुहैल आज़ाद

देर में सो कर उठने वाले देर में सो कर उठने वाले पड़े हैं बिस्तर उठने वाले चाय की बरकत से ख़ाली हैं देर में अक्सर उठने वाले शोर नहीं इस चुप की तलाफ़ी दिल में बवंडर उठने वाले हाए वो दीवानों के सर हैं आह वो पत्थर उठने वाले ख़त्म हुए ख…

अर्ज़ी दी तो निकली धूप - सतपाल ख्याल

अर्ज़ी दी तो निकली धूप अर्ज़ी दी तो निकली धूप कोहरे ने ढक ली थी धूप दो क़दमों पर मंज़िल थी ज़ोरों से फिर बरसी धूप बूढ़ी अम्मा बुनती थी गर्म स्वेटर जैसी धूप धूप में तरसे साए को साए में याद आई धूप भूकी नंगी बस्ती ने खाई जूठन पहनी धूप फ…

यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है - वली आसी

यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है कच्ची उम्रों में मगर तजरबा कम होता है सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है इस तरह रोज़ हम इक ख़त उसे लिख देते हैं कि न काग़ज़ …

हवा गरम, फ़िज़ा गरम, दयार भी गरम-गरम - रंजीत भट्टाचार्य

हवा गरम, फ़िज़ा गरम, दयार भी गरम-गरम हवा गरम, फ़िज़ा गरम, दयार भी गरम-गरम मैं पी रहा हूँ चाय-सी, ये ज़िंदगी गरम-गरम ग़मों की सर्द रोटियों के साथ चाय की तरह तू कम से कम परोस दे मुझे हंसी गरम-गरम यूं देखने में था, वो सर्द शबनमी-बदन मगर मैं छू…

छोटू चाय वाला - देवेन्द्र देव

छोटू चाय वाला आपके एक साथ मै एक घटना बात रहा हूँ कुछ समय पहले मै और मेरे दोस्त चाय पीने चाय वाले के यहाँ गए चुकी वो एक अलग कमरा लेकर रहता है सो चाय पीने बाहर जाना ही पड़ता है और वैसे भी हम घूमते घूमते चाय की घुमटी पर पहुच ही जाते है हां तो फिर आग…

मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया - मुनव्वर राना

मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया, बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया ! न जाने लोग कैसे है मोम कर देते है पत्थर को, हमें तो आप को भी गुदगुदाना नहीं आया! शिकारी कुछ भी हो इतना सितम अच्छा नहीं होता, …

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