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हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए - बशीर बद्र

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाए कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए अजब हालात थे यूँ दिल का सौदा हो गया आख़िर मोहब्बत …

चांद - राघव अग्रवाल

चांद इतना चमकता चांद, तनहा गलियों में आवारा घूमता चांद, नदी के किनारे सर रख कर सोता चांद, बादल की बाहों में करवट बदलता चांद, बारिश में भी भीगता चांद, रोज़ रात नजर आता, ना जाने क्यू नहीं सोता ये चांद, कभी आधा कभी पूरा मिज़ाज का इतना पक्का चां…

क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी - संदीप ठाकुर

क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी क्या सितारों को तका है रात भर पल पल कभी चाँद के गालों पे पड़ते देखे हैं डिम्पल कभी नाम मेरा याद करके चुस्कियों के बीच में क्या हुई है चाय के कप में तिरे हलचल कभी जानता हूँ उम्र भर तू साथ दे सकता नहीं प…

दरिया की तह में ठिकाना चाहती है - संदीप ठाकुर

दरिया की तह में ठिकाना चाहती है दरिया की तह में ठिकाना चाहती है कश्ती तो बस आशियाना चाहती है लेट आकर गिफ़्ट लाई हैं घड़ी तू वक़्त की क़ीमत चुकाना चाहती है इससे पहले पेड़ उसको बोझ समझे सूखी डाली टूट जाना चाहती है प्यार में मरने की बातें कर…

मेरे ग़म को जो अपना बताते रहे - वसीम बरेलवी

मेरे ग़म को जो अपना बताते रहे मेरे ग़म को जो अपना बताते रहे वक़्त पड़ने पे हाथों से जाते रहे बारिशें आईं और फ़ैसला कर गईं लोग टूटी छतें आज़माते रहे आँखें मंज़र हुईं कान नग़्मा हुए घर के अंदाज़ ही घर से जाते रहे शाम आई तो बिछड़े हुए हम-सफ़…

छूना नहीं है चाँद को तकने दें दूर से - वीरेन्द्र खरे अकेला

छूना नहीं है चाँद को तकने दें दूर से छूना नहीं है चाँद को तकने दें दूर से बस इल्तजा यही है हमारी हुज़ूर से साक़ी ने बेहिसाब पिला दी है, क्या करूँ उसकी ख़ता भी कम नहीं मेरे क़ुसूर से इतराते माहताब से मैंने भी कह दिया तुझ पर ये आबो-ताब है सूरज क…

नील गगन में तैर रहा है, उजला-उजला पूरा चाँद - निदा फ़ाज़ली

नील गगन में तैर रहा है, उजला उजला पूरा चाँद नील गगन में तैर रहा है, उजला उजला पूरा चाँद किन आँखों से देखा जाए, चंचल चेहरे जैसा चाँद मुन्नी की भोली बातों सी चटकीं तारों की कलियाँ पप्पू की ख़ामोशी शरारत सा छुप छुप कर उभरा चाँद मुझ से पूछो कैसे…

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद -राही मासूम रज़ा

हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात उन आँखों में आँसू का इक क़तरा होगा चाँद रात ने ऐसा पेँच लगाया टूटी हाथ से …

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