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ये मेरे शहर को हुआ क्या है ? - देवेन्द्र देव

ये मेरे शहर को हुआ क्या है ? "ये मेरे शहर को हुआ क्या है ?" कविता मैंने करीब चार साल पहले 2011 में लिखी थी । यह Facebook timeline से लिया गया है देवेन्द्र गेहलोद कुछ दिनों से समाचार पत्रों में इंदौर में हुई घटनाओं को पढकर बड़ा अफ़सोस ह…

उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद है - देवेन्द्र देव

उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद है उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद है भले वो इंसान नहीं लेकिन उसका भी वजूद है फैली हुई है उसकी सब शाखे उसे सिर्फ ज़माने का भला करना मंज़ूर है होते है उसपे हमले तो हुआ करे उसे तो बस नेकी किये जाने का सुरूर है - देवे…

ख्वाबों में आते है, आखिर कुछ तो बात होगी - देवेन्द्र देव

ख्वाबों में आते है, आखिर कुछ तो बात होगी ख्वाबों में आते है, आखिर कुछ तो बात होगी जाते हुए भी मुड़ते जाते है, आखिर कुछ तो बात होगी ये दिल ठिकाने पे नहीं, न जाने क्या वजह है हर जगह टकराते है वो, आखिर कुछ तो बात होगी सोचकर के हैरां हूँँ सारे…

अली सरदार जाफरी परिचय

अली सरदार जाफरी परिचय अ ली सरदार जाफरी उर्दू साहित्य में एक अलग मुकाम रखते है | आप अपनी शायरी से अधिक उर्दू साहित्य को आम जनों तक उपलब्ध कराने के लिये मशहूर है | आपने उर्दू शायरी के कई महान शायरों की अमूल्य कृतियों को कहकशा नाम के प्रोग्राम से जनता…

वो तेरी आँखे तेरा चेहरा - देवेन्द्र देव

वो तेरी आँखे वो तेरा चेहरा वो तेरी आँखे वो तेरा चेहरा तेरी आँखों सा प्यार तेरा गहरा मेरे हर गुनाह को माफ कर देना बना दिया मेरी शोहरत का पन्ना सुनहरा मेरे जिस्म से छूकर तेरी खुशबु आये तू दूर है तो मै हू प्यासा सहरा - देवेन्द्र देव wo teri a…

एक आस जगी आज मन में - देवेन्द्र देव

एक आस जगी आज मन में एक आस जगी आज मन में दिल की बात है दबी आज मन में कभी तो ये आग उगलेगा अपनी कमान ये खुद लेगा बहुत सह लिया हमने भी अब तो खून लगा है उबलने भी हर किसी के नाम पर खेल है यह बस वोटो की रेलमपेल है वो कुर्सी पर आये सब भूल गए …

हवा का झोका हूँ तुझे छुकर निकल जाऊँगा - देवेन्द्र देव

हवा का झोका हूँ तुझे छुकर निकल जाऊँगा हवा का झोका हूँ तुझे छुकर निकल जाऊँगा देर न लगी तेरे दिल में यूँ उतर जाऊंगा नजरो के सामने रहूँगा हर पल निगाहों में यूँ बसर कर जाऊंगा मुझसा न मिलेगा कोई चाहने वाला तू भले पत्थर हो मै मोम कर जाऊंगा जो …

लकीरे - देवेन्द्र देव

लकीरे - देवेन्द्र देव पत्थरो की लकीरों सी है मेरे हाथ की लकीरे उभर के मिट जाती है जज्बात की लकीरे कभी हाथ की लकीरों में तो कभी तुझमे खोजते है हाथ की लकीरे खुद मिट जाती है तो मिटा जाती है हालात की लकीरे शहमात का खेल खेलती है जिन्दगी में लकीर…

वो भले वादा करके मुकर जायेंगे - देवेन्द्र देव

वो भले वादा करके मुकर जायेंगे वो भले वादा करके मुकर जायेंगे पर हमें यकीं है, पुकारे तो ठहर जायेंगे है भले आज लबो पे उनके ना पर हमारे इश्क के कशीदे भी कभी असर लायेंगे भले फेर ले रुख अपना हमें देखकर पर एक दिन वो हमारे सायो से लिपटते नज़र आयें…

छोटू चाय वाला - देवेन्द्र देव

छोटू चाय वाला आपके एक साथ मै एक घटना बात रहा हूँ कुछ समय पहले मै और मेरे दोस्त चाय पीने चाय वाले के यहाँ गए चुकी वो एक अलग कमरा लेकर रहता है सो चाय पीने बाहर जाना ही पड़ता है और वैसे भी हम घूमते घूमते चाय की घुमटी पर पहुच ही जाते है हां तो फिर आग…

हसरत - देवेन्द्र देव

हसरत हसरत है ये दिल की, हम भी तन्हाई से मिले ! देखे, तमाशा क्या है पूछेंगे, फिर किसी तमाशाई से मिले ! वफाए हमने भी की है, हसरत है अब बेवफाई से मिले ! लोग कहते है बेसबब नहीं ये, अब किसी कि जुदाई से मिले ! यकी मुझे नहीं, लोग उससे फ़रियाद…

ग़म - देवेन्द्र देव

ग़म - देवेन्द्र देव वायदे वो किया करते है जो निभाते नहीं मंजिल की और बढने को सब कहते है पर साथ आते नहीं कुछ बेगुनाह होते है मगर गुनाहगार कहलाते है असल में वो दुनिया को अपनी नेकिया दिखाते नहीं गम हर दिल में है, गमजदा हर इंसा है यहाँ वो बताते ह…

आखिर इन्सान हूँ मै - देवेन्द्र देव

आखिर इन्सान हूँ मै ऐ शहर तेरे बारे मै सोचकर हैरान हूँ मै क्या करूँ इन दिनों बहूँत परेशां हूँ मै कि अब तू कुछ बदल सा गया है आज इन ऊँची इमारतो के बीच मै एक छोटा सा मकान हूँ मै वो आज कही लुट गए तो कही क़त्ल किये जाते है कि अब और देखा सुना नहीं…

पागल सी लड़की - देवेन्द्र देव

पागल सी लड़की वो एक पागल सी लड़की कितने सवाल किये जाती है में सिर्फ जवाब देता हूँ और वो बवाल किये जाती है हर छोटी बात में राय लेती है मेरी बाते करते-करते मुझे बेहाल किये जाती है अब एक मुक्कमल जिन्दगी की तलाश है "मैखान" वो जिन्दग…

तेरे इन सवालो का क्या जवाब दूँ - देवेन्द्र देव

तेरे इन सवालो का क्या जवाब दूँ तेरे इन सवालो का क्या जवाब दूँ अपने गुनाहों का क्या हिसाब दूँ तुम जो रूठे तो मुझसे मेरा नसीब रूठ गया लोग पूछते है अब में क्या जवाब दूँ ज़माने भर का गम अपने दिल में छिपा रखा है बस कोई पूछे तो गमो का एक सैलाब दूँ …

वो गलियां, वो कुचे, वो घर याद आते है - देवेन्द्र देव

वो गलियां, वो कुचे, वो घर याद आते है वो गलियां, वो कुचे, वो घर याद आते है मुझे अब भी अपनी मुफलिसी के दिन याद आते है कोई भूल जाये आज के वक़्त को देखकर मुझे अब नानी के साथ गुजरे दिन याद आते है अब सुकून जिन्दगी में बचा ही कहाँ है मुझे आज भी बचप…

कभी-कभी खुद से लड़ता हूँ मै - देवेन्द्र देव

कभी-कभी खुद से लड़ता हूँ मै कभी-कभी खुद से लड़ता हूँ मै कभी जीत तो कभी हार जाता हूँ मै कई बाज़ी खेली है खुद के साथ मैंने पर असल जिन्दगी में हार जाता हूँ मै टुटा हूँ पर गिरा नहीं अपनी नजरो से कभी अकेले मै यूँ ही मुस्कुराता हूँ मै कभी लिखू तो…

मेरी सीरत को तू देख सूरत पे न जा - देवेन्द्र देव

मेरी सीरत को तू देख सूरत पे न जा मेरी सीरत को तू देख सूरत पे न जा यूँ भी न सह पायेगा की हकीकत पे न जा यूँ भी जिन्दगी इम्तिहान लेती है किये जा मेहनत अंजाम-ऐ-हसरत पे न जा कुछ तो कशिश है मुझमे जो हर जगह छा जाते है मेरी काबिलियत को देख मेरी हालत…

माथे पे पसीना लिए वो दो रोटी कमाता होगा - देवेन्द्र देव

माथे पे पसीना लिए वो दो रोटी कमाता होगा माथे पे पसीना लिए वो दो रोटी कमाता होगा इन के लिए वो खुद को कितना सताता होगा तुम तो खेल लेते हो अपने खिलोनो से वो खुद को कई बार खिलौना बनाता होगा सोच उठती भी है तो बस पेट भर निवाले के लिए क्या इसके सिवा…

मुजरिम - देवेन्द्र देव

मुजरिम हर वक़्त एक सा नहीं रहता ! दरख्त हमेशा हरा नहीं रहता !! हम भूल जाते है कि वो भी एक इंसा है ! बन जाता है वो, पर हर इंसा फितरत से बुरा नहीं रहता !! वो भी खलिश, एक चुभन दिल में लिए बेठा है ! पर ये जुर्म भी उसका दो पल से बड़ा नहीं रहता !! -…

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