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वो गलिया, वो कुचे, वो घर याद आते है !
मुझे अब भी अपनी मुफलिसी के दिन याद आते है !!

कोई भूल जाये आज के वक़्त को देखकर !
मुझे अब नानी के साथ गुजरे दिन याद आते है !!

अब सुकून जिन्दगी मै बचा ही कहा है !
मुझे आज भी बचपन के दिन याद आते है !!

है शराब में डूबा ये जमाना की क्या कहु !
नशे में होकर भी वो शरारती बचपन याद आते है !!

वो मेरे अब्बा का मेरे लिए ही जागना मैखान !
मेरी माँ के अश्को में बिताये दिन याद आते है !! - देवेन्द्र देव
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