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मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है - शेरी भोपाली

मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है तबस्सुम को चबाया जा रहा है वहीं तक आबरू में ज़ब्त-ए-ग़म है जहाँ तक मुस्कुराया जा रहा है दो आलम मैंने छोड़े जिसकी ख़ातिर वही दामन छुड़ाया जा रहा है क़रीब आने में है उनको तक़ल्लुफ़ वहीं…

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए - शेरी भोपाली

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए कि मंज़िल दूर हो और रास्ते में शाम हो जाए वही नाला वही नग़्मा बस इक तफ़रीक़-ए-लफ़्ज़ी है क़फ़स को मुंतशिर कर दो नशेमन नाम हो जाए तसद्दुक़ इस्मत-ए-कौनैन उस …

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