मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है - शेरी भोपाली
मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है तबस्सुम को चबाया जा रहा है वहीं तक आबरू में ज़ब्त-ए-ग़म है जहाँ तक मुस्कुराया जा रहा है दो आलम मैंने छोड़े जिसकी ख़ातिर वही दामन छुड़ाया जा रहा है क़रीब आने में है उनको तक़ल्लुफ़ वहीं…