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लाला जी की तोंद - सूर्यभानु गुप्त

लाला जी की तोंद लाला जी की बड़ी तोंद है घंटाघर की घड़ी तोंद है लाला जी से मिलो बाद में उनसे पहले खड़ी तोंद है कुरते में घुसने से पहले रोज लड़ाई लड़ी तोंद है। बस में चढ़ते और उतरते दरवाज़े में अड़ी तोंद है। किसी अंगूठी में ज्यों हीरा ला…

हिन्दी के समकालीन ग़ज़लकारों की मूल संवेदना

हिन्दी के समकालीन ग़ज़लकारों की मूल संवेदना - डॉ. जियाउर रहमान जाफरी ग़ ज़ल हिंदी की सबसे ज्यादा पढ़ी, समझी और सराही जाने वाली विधा है | यह अरबी से होते हुए फिर उर्दू से हिंदी में आई | अरबी फारसी और उर्दू की ग़ज़ल अपने कथ्य के स्तर पर एक ही सी रही | कह…

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