हमारा दिल तो मुकम्मल सुकून चाहता है - फ़ारुक़ अंजुम
हमारा दिल तो मुकम्मल सुकून चाहता है हमारा दिल तो मुकम्मल सुकून चाहता है मगर ये वक्त की हमसे जूनून चाहता है अब इस बहिश्त को मकतल का नाम दे दीजे कि अब ये खितए-कश्मीर , खून चाहता है फरेब इतने दी है उसे सहारो ने वो छत भी अपने लिए बेसुतून चाहत…