मै जैसा बचपन में था - मुनीर नियाजी
मै जैसा बचपन में था मै जैसा बचपन में था उसी तरह मै अब तक हूँ खिले बाग़ को देख-देख कर बुरी तरह हैरान आस-पास मिरे क्या होता है इन सब से अनजान - मुनीर नियाजी mai jaisa bachpan me tha mai jaisa bachpan me tha usi tarah mai ab tak hun khile b…