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मेले - जावेद अख़्तर

मेले - जावेद अख़्तर बाप की उँगली थामे इक नन्हा सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया देखी ये क्या है और वो क्या है सब उस ने पूछा बाप ने झुक कर कितनी सारी चीज़ों और खेलों का उस को नाम बताया नट का …

ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना - जावेद अख़्तर

ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना न सर पत्थर से टकराए तो कहना ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल समझ में जब ये आ जाए तो कहना बहुत ख़ुश हो कि उस ने कुछ कहा है न कह कर वो मुकर जाए तो कहना बदल जाओगे तुम ग़म सुन …

बड़ी रौनक थी इस घर में, ये घर ऐसा नहीं था - जावेद अख़्तर

बड़ी रौनक थी इस घर में, ये घर ऐसा नहीं था बड़ी रौनक थी इस घर में, ये घर ऐसा नहीं था, गिले-शिकवे भी रहते थे, मगर ऐसा नहीं था। जहां कुछ शीरीं बातें थीं, वहीं कुछ तल्ख बातें थीं, मगर उन तल्ख बातों का असर ऐसा नहीं था। इन्हीं शाखों पे गुल थे, बर्ग …

मेरे दिल में उतर गया सूरज - जावेद अख़्तर

मेरे दिल में उतर गया सूरज मेरे दिल में उतर गया सूरज तीरगी में निखर गया सूरज दर्स दे कर हमें उजाले का ख़ुद अँधेरे के घर गया सूरज हम से वा'दा था इक सवेरे का हाए कैसा मक्र गया सूरज चाँदनी अक्स चाँद आईना आईने में सँवर गया सूरज डूबते वक…

अब्दुल कावी देसनवी जीवनी

अब्दुल कावी देसनवी जीवनी अब्दुल कावी देसनवी वो उर्दू के लेखक थे जिनकी वजह से हमें आज जावेद अख्तर , मुज़फ़्फ़र हनफ़ी और इकबाल मसूद जैसे शायरो की शायरी पढने को मिली है जो कि देसनवी जी के शिष्य रहे है | अब्दुल कावी देसनवी का जन्म 1 नवम्बर 1930 क…

हमसे दिलचस्प कभी सच्चे नहीं होते है - जावेद अख़्तर

हमसे दिलचस्प कभी सच्चे नहीं होते है हमसे दिलचस्प कभी सच्चे नहीं होते है अच्छे लगते है मगर अच्छे नहीं होते है चाँद में दुनिया और बुजुर्गो में खुदा को देखे भोले इतने तो अब ये बच्चे नहीं होते है आज तारीख तो दोहराती है खुद को लेकिन इसमें जो बेहत…

सलमान अख्तर लाजवाब शायर

सलमान अख्तर लाजवाब शायर सलमान अख्तर, आपने कभी इनका नाम सुना है? जी ये भी शायरी से ताल्लुक रखते है और बकायदा ताल्लुक ही नहीं साहित्यिक खानदान से है| जी हां, डॉ. सलमान अख्तर साहब जावेद अख्तर के छोटे भाई है और मशहूर शायर जां निसार अख्तर और सफिया अख्त…

वो कमरा याद आता है - जावेद अख़्तर

वो कमरा याद आता है मैं जब भी ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तप कर मैं जब भी दूसरों के और अपने झूट से थक कर मैं सब से लड़ के ख़ुद से हार के जब भी उस एक कमरे में जाता था वो हल्के और गहरे कत्थई रंगों का इक कमरा वो बेहद मेहरबाँ कमरा जो अपनी नर्म…

तुमको देखा तो ये ख़याल आया - जावेद अख़्तर

तुमको देखा तो ये ख़याल आया तुमको देखा तो ये ख़याल आया ज़िंदगी धूप तुम घना साया आज फिर दिल ने एक तमन्ना की आज फिर दिल को हमने समझाया तुम चले जाओगे तो सोचेंगे हमने क्या खोया, हमने क्या पाया हम जिसे गुनगुना नहीं सकते वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ …

ये तेरा घर ये मेरा घर - जावेद अख़्तर

ये तेरा घर ये मेरा घर यह गीत साथ -साथ फिल्म में लिया गया है और फारुख शैख़ और दीप्ती नवल पर फिल्माया गया है | ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र ये घर बहुत हसीन है न बादलों की छाँव में, न चाँदनी …

मै खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है - जावेद अख़्तर

मै खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है मै खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था क्या मुझसे खो गया है, मुझे क्या मलाल है आसूदगी से दिल के सभी दाग धुल गए लेकिन वो कैसे जा…

हम तो बचपन में भी अकेले थे - जावेद अख़्तर

हम तो बचपन में भी अकेले थे हम तो बचपन में भी अकेले थे सिर्फ दिल की गली में खेले थे एक तरफ मोर्चे थे पलकों के एक तरफ आंसुओ के रेले थे थी सजी हसरते दुकानों पर जिन्दगी के अजीब मेले थे आज जेहन-ओ-दिल भूखो मरते है उन दिनों फाके भी हमने झेले थे…

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग - जावेद अख़्तर

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग जीवन जीवन हम ने जग में खेल यही होते देखा धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग वक़्त सिंहासन पर बैठा है…

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा - जावेद अख़्तर

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा बरस के खुल गए आँसू निथर गई है फ़ज़ा चमक रहा है सर-ए-शाम दर्द का तारा किसी की आँख से टपका था इक अमानत है मिरी हथेली पे रक्खा हु…

ग़म होते हैं जहाँ ज़ेहानत होती है - जावेद अख़्तर

ग़म होते हैं जहाँ ज़ेहानत होती है ग़म होते हैं जहाँ ज़ेहानत होती है दुनिया में हर शय की क़ीमत होती है अक्सर वो कहते हैं वो बस मेरे हैं अक्सर क्यूँ कहते हैं हैरत होती है तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है …

ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम - जावेद अख़्तर

ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम पानी छलनी में ले चले हैं हम छाछ फूंकें कि अपने बचपन में दूध से किस तरह जले हैं हम ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारी अपने पैरों के आबले हैं हम तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया तू ने ढाल…

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है - जावेद अख़्तर

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है जमीं सूरज की उंगलियों से फिसल रही है जो मुझको जिन्दा जला रहे है वो बेखबर है कि मेरी जंजीर धीरे-धीरे पिघल रही है मै क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन मेरे लहू से…

हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी - जावेद अख़्तर

हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी क़दम रक्खा कि मंज़िल रास्ता थी बिछड़ के डार से बन बन फिरा वो हिरन को अपनी कस्तूरी सज़ा थी कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था मिर…

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