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ऐ मेरे प्यारे वतन - प्रेम धवन

ऐ मेरे प्यारे वतन यह गीत (कविता) फिल्म काबुलीवाला ( 1961) में लिया गया था जिसे मन्ना डे साहब ने गाया था और बलराज साहनी साहब पर फिल्माया गया था | ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझ पे दिल क़ुर्बान तू ही मेरी आरज़ू तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी…

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया - साहिर लुधियानवी

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया जो खो गया मैं उस को भुलाता चला …

आज जाने की ज़िद न करो - फ़य्याज़ हाशमी

आज जाने की ज़िद न करो आज जाने की ज़िद न करो यूँ ही पहलू में बैठे रहो आज जाने की ज़िद न करो हाए मर जाएँगे, हम तो लुट जाएँगे ऐसी बातें किया न करो आज जाने की ज़िद न करो तुम ही सोचो ज़रा क्यूँ न रोकें तुम्हें जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम …

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है - मीर तक़ी मीर

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है आगे उस मुतकब्ब…

मैं पल दो पल का शायर हूँ पल दो पल मिरी कहानी है - साहिर लुधियानवी

मैं पल दो पल का शायर हूँ पल दो पल मिरी कहानी है मैं पल दो पल का शायर हूँ पल दो पल मिरी कहानी है पल दो पल मेरी हस्ती है पल दो पल मिरी जवानी है मुझ से पहले कितने शायर आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नग़्मे गा कर चले गए वो भी इक पल क…

करोगे याद तो हर बात याद आयेगी - बशर नवाज

करोगे याद तो हर बात याद आयेगी उर्दू शायरी के बडे शायरो में शुमार किये जाने वाले शायर बशर नवाज साहब का 9 जुलाई 2015 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में निधन हो गया । आपका यह गीत उन्होंने बाजार फिल्म के लिए लिखा था जिससे उन्हें बहुत नाम और शोहरत हासिल हुई …

ये तेरा घर ये मेरा घर - जावेद अख़्तर

ये तेरा घर ये मेरा घर यह गीत साथ -साथ फिल्म में लिया गया है और फारुख शैख़ और दीप्ती नवल पर फिल्माया गया है | ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र ये घर बहुत हसीन है न बादलों की छाँव में, न चाँदनी …

मायूस तो हूँ वादे से तिरे - साहिर लुधियानवी

मायूस तो हूँ वादे से तिरे मायूस तो हूँ वादे से तिरे कुछ आस नहीं कुछ आस भी है मैं अपने ख़यालों के सदक़े तू पास नहीं और पास भी है हम ने तो ख़ुशी माँगी थी मगर जो तू ने दिया अच्छा ही दिया जिस ग़म का तअ'ल्लुक़ हो तुझ से वो रास नहीं और रास…

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया - साहिर लुधियानवी

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं बारहा ऐसे सवालात पे रोना आ…

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता - निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इस की वहाँ नहीं मिल…

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