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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है - मीर तक़ी मीर

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश को बाले तक उस को फ़लक चश्म-ए-मह-ओ-ख़ुर की पुतली का तारा जाने है आगे उस मुतकब्ब…

असर उस को ज़रा नहीं होता - मीर तक़ी मीर

असर उस को ज़रा नहीं होता असर उस को ज़रा नहीं होता रंज राहत-फ़ज़ा नहीं होता बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी वादा-वफ़ा नहीं होता ज़िक्र-ए-अग़्यार से हुआ मा'लूम हर्फ़-ए-नासेह बुरा नहीं होता किस को है ज़ौक़-ए-तल्ख़-कामी लेक जंग बिन कुछ मज़…

मीर तक़ी मीर के 25 बेहतरीन शेर

मीर तक़ी मीर के 25 बेहतरीन शेर मीर तक़ी मीर साहब जिन्हें उर्दू शायरी में बहुत ऊँचा मुकाम हासिल है आपको खुदा-ए-सुखन (शायरी का खुदा) और उनकी शायरी की छाप आज के शायरों पर भी मिलती है | इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या आगे आगे देखिये होता है क्या पत्…

क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़ - मीर तक़ी मीर

क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़ क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़ जान का रोग है बला है इश्क़ इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखो सारे आलम में भर रहा है इश्क़ इश्क़ है तर्ज़ ओ तौर इश्क़ के तईं कहीं बंदा कहीं ख़ुदा है इश्क़ इश्क़ मा'श…

क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़ - मीर तक़ी मीर

क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़ क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़ हक़-शनासों के हाँ ख़ुदा है इश्क़ दिल लगा हो तो जी जहाँ से उठा मौत का नाम प्यार का है इश्क़ और तदबीर को नहीं कुछ दख़्ल इश्क़ के दर्द की दवा है इश्क़ क्या डुबाया मुहीत में…

सोज़िश दिल से मुफ़्त गलते हैं - मीर तक़ी मीर

सोज़िश दिल से मुफ़्त गलते हैं सोज़िशे-दिल से मुफ़्त गलते हैं दाग़ जैसे चराग़ जलते हैं इस तरह दिल गया कि अब तक हम बैठे रोते हैं हाथ मिलते हैं भरी आती हैं आज यूँ आँखें जैसे दरिया कहीं उबलते हैं दम-ए-आख़िर है बैठ जा, मत जा सब्र कर टुक कि हम …

तेरे बंदे हम है खुदा जानता है - मीर तक़ी मीर

तेरे बंदे हम है खुदा जानता है तेरे बंदे हम है खुदा जानता है खुदा जाने तू हमको क्या जानता है नहीं इश्क का दर्द लज्जत से खाली जिसे ज़ौक है वह मज़ा जानता है हमेशा दिल अपना जो बेजा है उस बिन मेरे क़त्ल को जा बजा जानता है किये ज़ेर बुरका गए गेसुओ म…

ऐ दिल तुझे हुआ क्या है

ऐ दिल तुझे हुआ क्या है कई बरसो से यह बात चलती आ रही है कि आदमी को दिल से सोचना चाहिए या दिमाग से और कहा जाता है दिल तो पागल है दिल का क्या है ? कई वर्षों के बाद ग़ालिब ने कहा दिले नादां तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है मै हू मुश्…

मुद्दत से तो दिल की मुलाकात भी गई - मीर तक़ी मीर

मुद्दत से तो दिल की मुलाकात भी गई मुद्दत से तो दिल की मुलाकात भी गई जाहिर का पास था, सो मदारात भी गई कितने दिनों से आई थी उसकी शबे-विसाल बाहम रही लड़ाई, सो वह रात भी गई कुछ कहते आ के हम, तो सुना करते वो खामोश अब हर सुखन पे बहस है, वह बात भी…

कोफ़्त से जान लब पे आई है - मीर तक़ी मीर

कोफ़्त से जान लब पे आई है कोफ़्त से जान लब पे आई है हमने क्या चोट दिल पे खाई है दीदनी है शिकस्तगी दिल की क्या ईमारत ग़मों ने ढाई है दिल से नजदीक और इतना दूर किस से उसको कुछ आशनाई है जिस मर्ज में की जान जाती है दिलबरो ही की वह जुदाई है मर…

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