यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए - अजय सहाब
यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए फिर वो मासूम सा बचपन का ज़माना आए काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर काश फिर से मिरे हाथों में ख़ज़ाना आए काश दुनिया की भी फ़ितरत हो मिरी माँ जैसी जब मैं बिन बात के रूठू…