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यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए - अजय सहाब

यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए फिर वो मासूम सा बचपन का ज़माना आए काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर काश फिर से मिरे हाथों में ख़ज़ाना आए काश दुनिया की भी फ़ितरत हो मिरी माँ जैसी जब मैं बिन बात के रूठू…

नए साल कुछ बेहतरीन शेर

नए साल कुछ बेहतरीन शेर आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे - अहमद फ़राज़ इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी - हफ़ीज़ मेरठी इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार आई है जनवरी तो …

किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है -अजय पाण्डेय 'सहाब'

किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है जो आईने को भी हैरत में डाल देता है वो दौर आया कि नन्हा सा एक जुगनू भी चमकते चाँद में गलती निकाल देता है अगर किसी से मैं पूछूं कि ये ग़ज़ल क्या है हरेक शख्स तो तेरी मिसाल देता …

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