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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें - अहमद फ़राज़

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार …

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ - अहमद फ़राज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही न…

ये सोच कर के ग़म के ख़रीदार आ गए - अहमद फ़राज़

ये सोच कर के ग़म के ख़रीदार आ गए ये सोच कर के ग़म के ख़रीदार आ गए हम ख़्वाब बेचने सर ए बाज़ार आ गए यूसुफ़ न थे मगर सर-ए-बाज़ार आ गए ख़ुशफहमियाँ ये थीं कि ख़रीदार आ गए हम कजअदा चिराग़ कि जब भी हवा चली ताको को छोड़कर सर-ए-दीवार आ गए फिर इस तरह हुआ मुझे…

जुज़ तिरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे - अहमद फ़राज़

जुज़ तिरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे जुज़ तिरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे तू कहाँ है मगर ऐ दोस्त पुराने मेरे तू भी ख़ुशबू है मगर मेरा तजस्सुस बेकार बर्ग-ए-आवारा की मानिंद ठिकाने मेरे शम्अ की लौ थी कि वो तू था मगर हिज्र की रात देर तक रोता रहा…

नए साल कुछ बेहतरीन शेर

नए साल कुछ बेहतरीन शेर आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे - अहमद फ़राज़ इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी - हफ़ीज़ मेरठी इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार आई है जनवरी तो …

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन - अहमद फ़राज़

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन देखना सब रक़्स-ए-बिस्मल में मगन हो जाएँगे जिस तरफ़ से तीर आयेगा उधर देखेगा कौन जख्म जितने भी थे सब मंसूब कातिल…

कठिन है राह गुज़र, थोडी देर साथ चलो - अहमद फ़राज़

कठिन है राह गुज़र, थोडी देर साथ चलो कठिन है राह गुज़र, थोडी देर साथ चलो बहुत कडा है सफर, थोडी देर साथ चलो तमाम उम्र कहां कोइ साथ देता है ये जानता हुं मगर, थोडी देर साथ चलो नशे में चूर हुं में, तुम्हें भी होश नहीं बडा मज़ा हो अगर, थोडी देर सा…

अहमद फ़राज़ एक महान शायर | अहमद फ़राज़ जीवन परिचय

अहमद फ़राज़ एक महान शायर | अहमद फ़राज़ जीवन परिचय अ हमद फ़राज़, शायरी को पढ़ने और समझने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो इस नाम से परिचित नहीं होगा | आपका जन्म पकिस्तान के (कोहत) नौशेरा शहर में 12, जनवरी, 1931 को हुआ | आप अपने समय के महानतम शायरों में…

हम भरे शहरो में भी तन्हा है जाने किस तरह - अहमद फ़राज़

तुम जमाना-आशना, तुमसे जमाना ना-आशना तुम जमाना-आशना , तुमसे जमाना ना-आशना और हम अपने लिए भी अजनबी, ना-आशना रास्ते भर की रिफाक़त भी बहुत है जानेमन वरना मंजिल पर पहुच कर कौन किसका आशना मुद्दते गुजरी इसी बस्ती में लेकिन अब तलक लोग नावाकिफ, फ़ज…

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है - अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकी सो हम भी उसकी ग…

कभी मोम बन के पिघल गया - अहमद फ़राज़

कभी मोम बन के पिघल गया कभी मोम बन के पिघल गया कभी गिरते गिरते संभल गया वो बन के लम्हा गुरेज का मेरे पास से निकल गया उसे रोकता भी तो किस तरह कि वो शख्स इतना अजीब था कभी तड़प उठा मेरी आह से कभी अश्क से न पिघल सका सर-ए-राह मिला वो अगर कभी…

दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला - अहमद फ़राज़

दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभानेवाला वही अंदाज है जालिम का जमानेवाला तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया आज तनहा हु तो कोई नहीं आने वाला मुन्तजिर किस का हु टूटी हुए दहलीज पे मै कौन आएगा यहाँ कौन है आनेवाला म…

शोला था जल बुझा हूँ, हवाए मुझे न दो - अहमद फ़राज़

शोला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो शोला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो मैं कब का जा चुका हूँ सदाएँ मुझे न दो जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएँ मुझे न दो ये भी बड़ा करम है सलामत है जिस्म अभी ऐ ख़ुसरवान-ए-श…

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