पायेदान, प्रेम और मैं - अनुष्का चड्डा
पायेदान, प्रेम और मैं मां बुनती हैं, ऊन से एक स्वेटर, और उसमें भरती हैं खूब सारा प्यार, हर गांठ को अपने प्रेम और ममता की चाशनी में भीगो कर वो डालती हैं उसमें फंदे, हर फंदे के साथ साथ प्रेम की गांठ और अधिक मजबूत होती चली जाती हैं, पिता जी…