shailendra

झूठे सपनों के छल से निकल - शंकर शैलेन्द्र

झूठे सपनों के छल से निकल झूठे सपनों के छल से निकल चलती सड़कों पर आ! अपनों से न रह यों दूर-दूर आ क़दम से क़दम मिला! हम सबकी मुश्किलें एक सी हैं, ये भूख, रोग, बेकारी, कुछ सोच कि सब कुछ होते हुए हम क्यों बन चले भिखारी, क्यों बाँझ हो चली यह धरती…

तुम रहे आकाश को ही देखते - शंकर शैलेन्द्र

तुम रहे आकाश को ही देखते ज़िंदगी अरमान बनके गुनगुनाई एक नई पहचान बनके मुस्कुराई तुम रहे आकाश को ही देखते। जब समझ पाए न तुम उसका इशारा नाम लेकर भी तुम्हें उसने पुकारा क्या मिला क्या तुम गँवाते आ रहे हो पूछ देखो जानता है दिल तुम्हारा प्रीत प…

हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है - शैलेन्द्र

हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में, हड़ताल हमारा नारा है हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में, हड़ताल हमारा नारा है! तुमने माँगें ठुकराई हैं, तुमने तोड़ा है हर वादा, छीना हमसे सस्ता अनाज, तुम छँटनी पर हो आमादा तो अपनी भी तैयारी है, तो हमने भी ललकारा है, हर ज…

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर - शैलेन्द्र

तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर! सुबह औ' शाम के रंगे हुए गगन को चूमकर, तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूमकर, तू आ मेरा सिंगार कर, तू आ मुझ…

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