parvez-waris

उसने बिगड के मुझसे कहा बात-बात में - परवेज वारिस

उसने बिगड के मुझसे कहा बात-बात में उसने बिगड के मुझसे कहा बात-बात में रोते नहीं यूँ अहले-वफ़ा बात बात में कुछ बात थी जो उसकी जुबां कह न सकी कुछ सोच-सोच कर वो रुका बात-बात में उसकी भी चश्म नम हुई दौराने-गुफ्तगू याद आ गया मुझे भी खुदा बात बात…

चलते-चलते रुका करे कोई - परवेज़ वारिस

चलते-चलते रुका करे कोई चलते-चलते रुका करे कोई इक तमाशा खड़ा करे कोई सुस्त रफ़्तार हम नहीं लेकिन भीड़ इतनी है क्या करे कोई लुत्फ़ आये जो चांदनी में कभी बनके खुशबू मिला करे कोई जिस्म पोशाक से झलकता हो यूँ न खुद को ढका करे कोई हम तो मुरझाये शाम…

सिर्फ धोखा था कोई तेरा कि जो था वो न था - परवेज़ वारिस

सिर्फ धोखा था कोई तेरा कि जो था वो न था सिर्फ धोखा था कोई तेरा कि जो था वो न था मैंने सोचा था तुझे जैसा कि जो था वो न था मंजिलो की जुस्तजू में घर से मै निकला मगर था सभी कुछ ठीक पर रस्ता कि जो था वो न था साथ था दिन भर वो मेरे इक मुसाफिर की तरह…

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