hasrat-mohani

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं - हसरत मोहानी

भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं इलाही तर्के-उल्फ़त पर वो क्योंकर याद आते हैं न छेड़ ऐ हम नशीं कैफ़ीयते-सहबा के अफ़साने शराबे-बेख़ुदी के मुझको साग़र याद आते हैं रहा करते हैं क़ैद-ए-होश में ऐ वाये न…

चुपके-चुपके रात-दिन आंसू बहाना याद है - हसरत मोहानी

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ारां इश्तियाक, तुझसे वो पहले पहल दिल का लगाना याद है, तुझसे मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा, और तेरा…

मै तो समझा था क़यामत आ गई - हसरत मोहानी

मै तो समझा था क़यामत आ गई मै तो समझा था क़यामत आ गई खैर फिर साहब सलामत हो गई मस्जिदों में कौन जाये वाइज़ा अब तो एक बुत से इरादत हो गई जब मै जानू दिल में भी आओ न याद गरचे जाहिर में अदावत हो गई उनको कब मालूम था तर्ज-ए-ज़फ़ा गैर की सोहबत क़यामत …

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